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Charkhi Dadri News: प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने गांव-गांव पहुंचेगी संयुक्त टीमें, किसानों को करेंगी जागरूक

संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sun, 14 Jun 2026 12:04 AM IST
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Joint teams will visit every village to promote natural farming and raise awareness among farmers
गांव रामबास में आयोजित जागरूकता शिविर में किसानों को संबोधित करते हुए चेतना कुमारी।  - फोटो : 1
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चरखी दादरी। धरती की उर्वरा शक्ति को बचाने और आम जनमानस को रसायनों के दुष्प्रभाव से मुक्त भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिले में एक विशेष मुहिम की शुरुआत की गई है। जिले भर के किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने और इसे बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग और बागवानी विभाग ने एक संयुक्त जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है। अभियान के तहत दोनों विभागों की संयुक्त टीमें धरातल पर उतरकर सीधे किसानों से संवाद करेंगी और उन्हें इस पारंपरिक खेती पद्धति के हर पहलू से रूबरू कराएंगी।


गौरतलब है कि किसानों में फसल की उपज बढ़ाने की प्रतिर्स्पधा के चलते रासायनिक खेती की और किसान आकर्षित हो रहे है। जिससे उपजाऊ मिट्टी पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। रासायनिक खेती के प्रति किसानों का रुझान कम करने के लिए कृषि और बागवानी विभाग संयुक्त रूप से गांव-गांव पहुंच कर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। विभागों के अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता टीम को सुनियोजित तरीके से तैयार किया गया है ताकि जिले का कोई भी किसान इस जानकारी से वंचित न रहे। विभाग की ओर से गठित संयुक्त टीमें रोजाना ब्लॉक स्तर पर सक्रिय रहेंगी। ये टीमें हर रोज दो गांवों का दौरा करेंगी।
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प्रथम चरण में इन गांवों से होगी शुरुआत
प्रशासन की ओर से इस महाअभियान के पहले चरण की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। शुरुआती चरण के तहत जिले के छह प्रमुख गांवों का चयन किया गया है। टीम में शामिल चेतना कुमार को गांव रामबास, रामधन को साहू-सौंफ, ओमप्रकाश को मिर्च, जिलेसिंह को आदमपुर और नरवीर सिंह को गोकल में सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है।
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प्राकृतिक खेती के फायदे
विशेषज्ञों के अनुसार इस अभियान में किसानों को केवल इसके लाभ ही नहीं, बल्कि शुरुआत में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों के बारे में भी ईमानदारी से बताया जा रहा है ताकि किसानों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। वहीं प्राकृतिक खेती से भूमि की उपजाऊ क्षमता में सुधार होता है। इसमें रासायनिक खादों और कीटनाशकों का खर्च शून्य हो जाता है जिससे किसानों की लागत घटती है। साथ ही इस पद्धति से पैदा होने वाली फसल स्वास्थ्य के लिए अमृत समान होती है।

देसी गाय के गोबर-मूत्र से तैयार कर सकते है खाद
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि रासायनिक खेती से अचानक प्राकृतिक खेती पर आने से शुरुआती एक-दो साल पैदावार में मामूली कमी आ सकती है। इसके अलावा इसमें देसी गाय के गोबर-मूत्र (जीवामृत, घनजीवामृत) को तैयार करने के लिए थोड़ी अधिक शारीरिक मेहनत की आवश्यकता होती है। जिससे देशी खाद तैयार कर मिट्टी को बेहतर उपजाऊ बनाया जा सकता है।


वर्सन:
हमारी संयुक्त टीमें प्रतिदिन ब्लॉक स्तर पर दो-दो गांवों में पहुंच कर किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक करेंगेी, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान अभियान से जुड़ कर खराब होते जमीन के स्तर को समय पर बचा सके। -डॉ. कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग।
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