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Charkhi Dadri News: औसतन एक दिन में 33 लोगों को काट रहे हैं कुत्ते
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 09 Mar 2026 01:46 AM IST
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शहर की नई सब्जी मंडी के सामने झुंड में मौजूद आवारा कुत्ते।
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चरखी दादरी। दादरी जिले में लावारिस घूम रहे कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे आमजन में भय का माहौल बना हुआ है। दादरी के नागरिक अस्पताल में हर रोज औसतन 33 मामले कुत्तों के काटने के पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बंदरों की तुलना में बिल्लियां लोगों को अधिक अपना शिकार बना रही हैं। आवारा जानवरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी एंटी रेबीज वैक्सीन का पर्याप्त भंडारण होने का दावा किया है।
बता दें कि इन दिनों जिला नागरिक अस्पताल के इंजेक्शन कक्ष में रेबीज का टीका लगवाने वाले मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो अकेले फरवरी माह में कुल 1028 लोगों को रेबीज की वैक्सीन लगाई गई है। इनमें सबसे अधिक 920 मामले कुत्तों के काटने के थे, जबकि 45 लोगों को बिल्लियों ने अपना शिकार बनाया। इसके अलावा बंदरों के हमले के भी 33 मामले सामने आए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि जिले में आवारा कुत्तों के अलावा बंदरों व बिल्लियों का भी आतंक बढ़ रहा है।
पहला टीका काटने के तुरंत बाद लगवाना अनिवार्य
जिला नोडल अधिकारी डॉ. कमल कुमार ने बताया कि कुत्ते, बंदर या बिल्ली जैसे जानवरों के काटने पर पीड़ित को रेबीज से बचाने के लिए कुल पांच टीके लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि संक्रमण से बचाव के लिए पहला टीका काटने के तुरंत बाद लगवाना अनिवार्य है। इसके बाद दूसरा टीका तीसरे दिन, तीसरा टीका सातवें दिन, चौथा टीका 14वें दिन और पांचवां व अंतिम टीका 28 दिन की अवधि पूरी होने पर लगाया जाता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे टीकाकरण का कोर्स बीच में न छोड़ें।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात के समय ये आवारा कुत्ते और भी अधिक खूंखार हो जाते हैं। पुराना डाकघर कॉलोनी निवासी करुण कालरा, निक्शन, दीपक कुमार, पुष्पा कालरा और अंकित कुमार ने बताया कि आवारा कुत्तों का भय इस कदर फैल चुका है कि लोग रात के समय गलियों में निकलने से कतराने लगे हैं। कई बार ये कुत्ते रात के अंधेरे में राहगीरों पर अचानक हमला कर चुके हैं। गांव छपार निवासी अन्नु देवी जब घर की छत पर गई थीं, तो बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इसके अलावा शहर के राजू रावल, ज्ञान देवी, अनीता देवी, टेकराम और सुनीता देवी सहित दर्जनों लोग इन जानवरों के आतंक का शिकार हो चुके हैं।
वर्सन :
विभाग के पास वर्तमान में लगभग आठ हजार रेबीज वैक्सीन का स्टॉक मौजूद है। जैसे ही स्टॉक में कमी आती है तो तुरंत मुख्यालय को नई डिमांड भेज दी जाती है। विभाग का उद्देश्य है कि जिले के किसी भी नागरिक को वैक्सीन के लिए परेशान न होना पड़े और सभी को उचित स्वास्थ्य लाभ मिले।
-डॉ. राहुल अरोड़ा, डिप्टी सिविल सर्जन एवं प्रवक्ता स्वास्थ्य विभाग, दादरी।
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बता दें कि इन दिनों जिला नागरिक अस्पताल के इंजेक्शन कक्ष में रेबीज का टीका लगवाने वाले मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो अकेले फरवरी माह में कुल 1028 लोगों को रेबीज की वैक्सीन लगाई गई है। इनमें सबसे अधिक 920 मामले कुत्तों के काटने के थे, जबकि 45 लोगों को बिल्लियों ने अपना शिकार बनाया। इसके अलावा बंदरों के हमले के भी 33 मामले सामने आए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि जिले में आवारा कुत्तों के अलावा बंदरों व बिल्लियों का भी आतंक बढ़ रहा है।
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पहला टीका काटने के तुरंत बाद लगवाना अनिवार्य
जिला नोडल अधिकारी डॉ. कमल कुमार ने बताया कि कुत्ते, बंदर या बिल्ली जैसे जानवरों के काटने पर पीड़ित को रेबीज से बचाने के लिए कुल पांच टीके लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि संक्रमण से बचाव के लिए पहला टीका काटने के तुरंत बाद लगवाना अनिवार्य है। इसके बाद दूसरा टीका तीसरे दिन, तीसरा टीका सातवें दिन, चौथा टीका 14वें दिन और पांचवां व अंतिम टीका 28 दिन की अवधि पूरी होने पर लगाया जाता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे टीकाकरण का कोर्स बीच में न छोड़ें।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात के समय ये आवारा कुत्ते और भी अधिक खूंखार हो जाते हैं। पुराना डाकघर कॉलोनी निवासी करुण कालरा, निक्शन, दीपक कुमार, पुष्पा कालरा और अंकित कुमार ने बताया कि आवारा कुत्तों का भय इस कदर फैल चुका है कि लोग रात के समय गलियों में निकलने से कतराने लगे हैं। कई बार ये कुत्ते रात के अंधेरे में राहगीरों पर अचानक हमला कर चुके हैं। गांव छपार निवासी अन्नु देवी जब घर की छत पर गई थीं, तो बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इसके अलावा शहर के राजू रावल, ज्ञान देवी, अनीता देवी, टेकराम और सुनीता देवी सहित दर्जनों लोग इन जानवरों के आतंक का शिकार हो चुके हैं।
वर्सन :
विभाग के पास वर्तमान में लगभग आठ हजार रेबीज वैक्सीन का स्टॉक मौजूद है। जैसे ही स्टॉक में कमी आती है तो तुरंत मुख्यालय को नई डिमांड भेज दी जाती है। विभाग का उद्देश्य है कि जिले के किसी भी नागरिक को वैक्सीन के लिए परेशान न होना पड़े और सभी को उचित स्वास्थ्य लाभ मिले।
-डॉ. राहुल अरोड़ा, डिप्टी सिविल सर्जन एवं प्रवक्ता स्वास्थ्य विभाग, दादरी।