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Fatehabad News: ग्रामीण सतर्क होते तो बच जाती अरमान की जान
Sat, 11 Jul 2026 10:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 11 Jul 2026 10:40 PM IST
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2 वर्ष पूर्व संगरूर में आयोजित कबड्डी प्रतियोगिता में बेस्ट प्लेयर अवॉर्ड लेते हुए अरमान,स्त्रो
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रतिया। गांव बादलगढ़ में नौवीं कक्षा के छात्र और कबड्डी के उभरते खिलाड़ी 14 वर्षीय अरमान की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण सदमे में हैं। परिजनों का आरोप है कि जिस समय अरमान का झगड़ा हुआ उस दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव का प्रयास नहीं किया। उनका कहना है कि समय रहते दोनों नाबालिगों को समझाया जाता तो अरमान की जान बच सकती थी।
अरमान के भाई अवि ने रोते हुए बताया कि घटना के समय गांव के चौक पर कई दुकानदार और ग्रामीण मौजूद थे। इसके बावजूद किसी ने झगड़ा कर रहे दोनों बच्चों को रोकने या समझाने की पहल नहीं की। उन्होंने कहा कि मौके पर मौजूद लोगों की थोड़ी सजगता अरमान की जिंदगी बचा सकती थी।
अरमान के रिश्ते के चाचा गुरप्रीत ने भी घटना पर दुख जताते हुए कहा कि चौक पर काफी लोग मौजूद थे। अगर किसी ने समझदारी दिखाते हुए झगड़ा रुकवा दिया होता तो गांव का होनहार खिलाड़ी आज उनके बीच होता। गुरप्रीत ने आरोप लगाया कि झगड़े के समय आरोपी नवनीत का पिता भी मौके पर मौजूद था लेकिन उसने अपने बेटे को कैंची ले जाने से नहीं रोका। उन्होंने बताया कि अरमान छोटी उम्र में ही कई बड़ी कबड्डी प्रतियोगिताओं में भाग ले चुका था और उससे काफी उम्मीदें थीं।
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दो दिन पहले दोनों में हुई थी कहासुनी
नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले अरमान और नवनीत दोनों कबड्डी खेलते थे और उनके बीच खेल को लेकर आपसी द्वेष चल रहा था। दो दिन पहले स्कूल में भी दोनों के बीच कहासुनी और देख लेने की धमकी हुई थी। वीरवार देर शाम जब अरमान चौक पर बर्गर खा रहा था तभी नवनीत वहां पहुंचा। दोनों में बहस इतनी बढ़ी कि हाथापाई शुरू हो गई। इसी दौरान नवनीत गुस्से में अपने पिता की क्लीनिक के अंदर गया और वहां रखी कैंची लाकर अरमान की छाती में घोंप दी। गंभीर रूप से घायल अरमान ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया था।
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अरमान के भाई अवि ने रोते हुए बताया कि घटना के समय गांव के चौक पर कई दुकानदार और ग्रामीण मौजूद थे। इसके बावजूद किसी ने झगड़ा कर रहे दोनों बच्चों को रोकने या समझाने की पहल नहीं की। उन्होंने कहा कि मौके पर मौजूद लोगों की थोड़ी सजगता अरमान की जिंदगी बचा सकती थी।
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अरमान के रिश्ते के चाचा गुरप्रीत ने भी घटना पर दुख जताते हुए कहा कि चौक पर काफी लोग मौजूद थे। अगर किसी ने समझदारी दिखाते हुए झगड़ा रुकवा दिया होता तो गांव का होनहार खिलाड़ी आज उनके बीच होता। गुरप्रीत ने आरोप लगाया कि झगड़े के समय आरोपी नवनीत का पिता भी मौके पर मौजूद था लेकिन उसने अपने बेटे को कैंची ले जाने से नहीं रोका। उन्होंने बताया कि अरमान छोटी उम्र में ही कई बड़ी कबड्डी प्रतियोगिताओं में भाग ले चुका था और उससे काफी उम्मीदें थीं।
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दो दिन पहले दोनों में हुई थी कहासुनी
नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले अरमान और नवनीत दोनों कबड्डी खेलते थे और उनके बीच खेल को लेकर आपसी द्वेष चल रहा था। दो दिन पहले स्कूल में भी दोनों के बीच कहासुनी और देख लेने की धमकी हुई थी। वीरवार देर शाम जब अरमान चौक पर बर्गर खा रहा था तभी नवनीत वहां पहुंचा। दोनों में बहस इतनी बढ़ी कि हाथापाई शुरू हो गई। इसी दौरान नवनीत गुस्से में अपने पिता की क्लीनिक के अंदर गया और वहां रखी कैंची लाकर अरमान की छाती में घोंप दी। गंभीर रूप से घायल अरमान ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया था।