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Fatehabad News: गेहूं का फाने जलाने वाले किसानों की सरकारी सुविधाएं होंगी बंद, कृषि विभाग गेहूं के अवशेष जलाने वाले किसानों पर रखेगा नजर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 06 Apr 2026 10:33 PM IST
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कन्हड़ी के खेत में कंबाइन से गेहूं की कटाई की गई।
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फतेहाबाद। धान के सीजन के बाद अब गेहूं की कटाई के साथ ही कृषि विभाग ने जिले में गेहूं के फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर निगरानी शुरू कर दी है। कृषि विभाग ने इसके लिए खंड स्तर पर टीम गठित की है। ऐसे में अगर कोई किसान खेतों में गेहूं के फसल अवशेष में आग लगाते हुए पाया गया तो उस किसान को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से भी वंचित कर दिया जाएगा।
कृषि विभाग ने इस निगरानी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए खंड स्तर पर जांच कमेटियों का गठन किया है। इस कमेटी में खंड के कृषि विकास अधिकारी और नायब तहसीलदारों को शामिल किया गया है। ये कमेटियां अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले गांवों का दौरा करेंगी और सैटेलाइट से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर मौके का मुआयना करेंगी। यह निगरानी अभियान 30 तक जारी रहेगा।
इस साल जिले में कृषि एवं कल्याण विभाग के अनुसार फसल अवशेष जलाने वाले किसान के डेटा मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रेड एंट्री में दर्ज किया जाएगा। जिससे किसान आगामी सीजन में सब्सिडी का लाभ नहीं ले पाएंगे कृषि यंत्रों पर मिलने वाली छूट रोक दी जाएगी और अन्य वित्तीय सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रखा जाएगा।
पिछले साल 45 स्थानों पर लगी आग
कृषि एवं कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग ने बताया कि जिले में पिछले कई वर्षों से धान के फसल अवशेष की पराली जलाने पर रोक के सफल क्रियान्वयन के बाद अब गेहूं के अवशेषों को जलाने पर रोक लगाई गई है। पिछले साल गेहूं के सीजन में जिले में लगभग 45 स्थानों पर आगजनी की घटनाएं दर्ज की गई थीं। इन घटनाओं को देखते हुए इस साल कृषि विभाग शून्य आगजनी का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
सैटेलाइट से होगी सीधी निगरानी
कृषि एवं कल्याण विभाग के तकनीकी सहायक डॉ. राजपाल ने बताया कि हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के माध्यम से खेतों में लगने वाली आग की रियल-टाइम लोकेशन विभाग को मिलेगी। कहीं आग लगने का अलर्ट जारी होगा खंड स्तर की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचकर चालान की प्रक्रिया शुरू कर देंगी। इस सख्ती का उद्देश्य बढ़ते प्रदूषण को रोकना और किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है। किसानों से अनुरोध है कि वे दंड से बचने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के विकल्पों को अपनाएं। किसान फसल अवशेष जलाने के बजाय उन्हें मिट्टी में मिलाएं या तूड़ी बनाने वाली मशीनों का उपयोग करें। यह पर्यावरण के लिए जरूरी है और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है।
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कृषि विभाग ने इस निगरानी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए खंड स्तर पर जांच कमेटियों का गठन किया है। इस कमेटी में खंड के कृषि विकास अधिकारी और नायब तहसीलदारों को शामिल किया गया है। ये कमेटियां अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले गांवों का दौरा करेंगी और सैटेलाइट से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर मौके का मुआयना करेंगी। यह निगरानी अभियान 30 तक जारी रहेगा।
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इस साल जिले में कृषि एवं कल्याण विभाग के अनुसार फसल अवशेष जलाने वाले किसान के डेटा मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रेड एंट्री में दर्ज किया जाएगा। जिससे किसान आगामी सीजन में सब्सिडी का लाभ नहीं ले पाएंगे कृषि यंत्रों पर मिलने वाली छूट रोक दी जाएगी और अन्य वित्तीय सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रखा जाएगा।
पिछले साल 45 स्थानों पर लगी आग
कृषि एवं कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग ने बताया कि जिले में पिछले कई वर्षों से धान के फसल अवशेष की पराली जलाने पर रोक के सफल क्रियान्वयन के बाद अब गेहूं के अवशेषों को जलाने पर रोक लगाई गई है। पिछले साल गेहूं के सीजन में जिले में लगभग 45 स्थानों पर आगजनी की घटनाएं दर्ज की गई थीं। इन घटनाओं को देखते हुए इस साल कृषि विभाग शून्य आगजनी का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
सैटेलाइट से होगी सीधी निगरानी
कृषि एवं कल्याण विभाग के तकनीकी सहायक डॉ. राजपाल ने बताया कि हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के माध्यम से खेतों में लगने वाली आग की रियल-टाइम लोकेशन विभाग को मिलेगी। कहीं आग लगने का अलर्ट जारी होगा खंड स्तर की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचकर चालान की प्रक्रिया शुरू कर देंगी। इस सख्ती का उद्देश्य बढ़ते प्रदूषण को रोकना और किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है। किसानों से अनुरोध है कि वे दंड से बचने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के विकल्पों को अपनाएं। किसान फसल अवशेष जलाने के बजाय उन्हें मिट्टी में मिलाएं या तूड़ी बनाने वाली मशीनों का उपयोग करें। यह पर्यावरण के लिए जरूरी है और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है।