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Fatehabad News: अधिकारियों के दफ्तर छूटे पर नहीं छूटा फरियादियों की तारीखों का फेर, हर सप्ताह दो दिन लग रहा समाधान शिविर फिर भी लोग काट रहे चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 18 May 2026 10:29 PM IST
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फतेहाबाद। जनता की समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए शुरू किए समाधान शिविर अब खुद सवालों के घेरे में हैं। शिविरों में पहुंच रहे फरियादियों का आरोप है कि उनकी शिकायतें सुनी तो जा रही हैं लेकिन न्याय नहीं मिल रहा है। बार-बार आवेदन देने और चक्कर काटने के बाद भी समस्याएं जस की तस हैं जिससे लोगों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। संवाद संवाददाता द्वारा मई माह में 11 मई और 18 मई को आयोजित समाधान शिविरों की पड़ताल की गई जिसमें व्यवस्था के खोखले दावे खुलकर सामने आए।
पीपीपी से जुड़ीं सबसे ज्यादा शिकायतें
शिविरों में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इनमें सर्वाधिक मामले परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में आय, उम्र, पारिवारिक विवरण और नाम से जुड़ीं त्रुटियों हैं। कई फरियादियों ने बताया कि पीपीपी में गलत आय दर्ज होने के कारण उनके राशन कार्ड कट गए हैं और वे पेंशन व अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो गए हैं। शिविर में पहुंचे कई लोग ऐसे भी थे जो दूसरी या तीसरी बार गुहार लगाने आए थे। उनका सीधा आरोप है कि हर बार उन्हें केवल आश्वासन देकर टाल दिया जाता है।
समाधान शिविर में नहीं आते हैं उच्च अधिकारी
फरियादियों के अनुसार उपायुक्त (डीसी), अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) जैसे शीर्ष अधिकारियों के मौके पर न होने से जूनियर स्टाफ की जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है। सोमवार 18 मई को सुबह के समय उपायुक्त करीब एक घंटे तक शिविर में रहे लेकिन उनके जाने के बाद सीटीएम (सिटी मजिस्ट्रेट) ने औपचारिकताएं निभाईं। कई विभागाध्यक्षों ने तो खुद आने के बजाय अपने कनिष्ठ (जूनियर) कर्मचारियों को भेज रखा था। लोगों का कहना है कि यदि जिले के वरिष्ठ अधिकारी पूरे समय मौके पर मौजूद रहें तो फाइलों को लटकाने के बजाय समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान संभव हो सकता है। संवाद
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शिकायत लिखने के लिए लगाई कर्मचारियों की ड्यूटी
समाधान शिविर में आने वाले फरियादियों को परेशानी न हो इसको लेकर प्रशासन की ओर से शिकायत लिखने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगा रखी है। कई बार फरियादी को पता नहीं होता कि समाधान शिविर में शिकायत लिखकर लेकर आनी होती है। अगर कोई व्यक्ति अपनी समस्या लिखकर आया तो ठीक है नहीं तो कर्मचारी उनकी समस्या को लिखकर देते हैं।
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थकान भी दूर करते हैं अधिकारी
जिला मुख्यालय के लघु सचिवालय के सभागार में दो घंटे तक आयोजित होने वाले समाधान शिविर में कई कर्मचारी व अधिकारी नींद की झपकी लेते हुए नजर आए। शिविर में कई विभागों के अधिकारियों को बुला तो लिया जाता है लेकिन उस विभाग से संबंधित शिकायत नहीं आने से वे कुर्सी पर बैठकर थकान दूर करते नजर आए।
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पत्नी की जगह फैमिली आईडी में जोड़ा ससुर का नाम
मैने फैमिली आई में पत्नी का नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया था लेकिन उनके ससुर का नाम परिवार पहचान पत्र में दर्ज हो गया है। अब करीब छह माह से पत्नी का नाम दर्ज करवाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा हूं। समाधान शिविर में बैठे अधिकारी बोलते हैं कि आवेदन कर दो लेकिन पोर्टल पर आवेदन करने का कोई विकल्प ही नहीं आता है। - रोहित कुमार, निवासी शिवनगर।
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जन्म तिथि दुरुस्त कराने के लिए काट रही चक्कर
परिवार पहचान पत्र में दर्ज अपनी जन्म तिथि को ठीक करवाने के लिए चक्कर काट रही हूं। परिवार पहचान पत्र में दर्ज जन्म तिथि वोटर कार्ड में दर्ज जन्म तिथि के अनुसार करवाना चाहती हूं। वोटर कार्ड में नाम अलग होने के कारण दिक्कत आ रही है। जिस कारण बार-बार समाधान शिविर में आ रही हूं लेकिन समाधान नहीं हो रहा है। - हरजीत कौर, निवासी रतिया।
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पहले शिकायत लिखने को बोला, फिर गेट कीपर ने मना किया
परिवारिक विवाद में जाखल से एक व्यक्ति अपनी बेटी के साथ समाधान शिविर में सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर पहुंचा। मौके पर मौजूद सीटीएम व सीईओ जिला परिषद ने शिकायतकर्ता को प्रार्थना पत्र लिखकर लाने को कहा। जब वह प्रार्थना पत्र लिखकर शिविर में जाने लगा तो बाहर खड़े गेट कीपर ने शिविर का समय खत्म होने हवाला देते हुए उन्हें शिविर में जाने नहीं दिया। निराश व्यक्ति बिना शिकायत दिए वहां से चला गया।
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एक घंटे बाद चले गए डीसी
समाधान शिविर में उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने फरियादियों की शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों को समाधान के आदेश दिए। करीब एक घंटे बाद उपायुक्त शिविर से चले गए और सीटीएम गौरव गुप्ता व सीईओ जिला परिषद सुरेश कुमार ने फरियादियों की शिकायतें सुनीं।
फतेहाबाद। जनता की समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए शुरू किए समाधान शिविर अब खुद सवालों के घेरे में हैं। शिविरों में पहुंच रहे फरियादियों का आरोप है कि उनकी शिकायतें सुनी तो जा रही हैं लेकिन न्याय नहीं मिल रहा है। बार-बार आवेदन देने और चक्कर काटने के बाद भी समस्याएं जस की तस हैं जिससे लोगों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। संवाद संवाददाता द्वारा मई माह में 11 मई और 18 मई को आयोजित समाधान शिविरों की पड़ताल की गई जिसमें व्यवस्था के खोखले दावे खुलकर सामने आए।
पीपीपी से जुड़ीं सबसे ज्यादा शिकायतें
शिविरों में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इनमें सर्वाधिक मामले परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में आय, उम्र, पारिवारिक विवरण और नाम से जुड़ीं त्रुटियों हैं। कई फरियादियों ने बताया कि पीपीपी में गलत आय दर्ज होने के कारण उनके राशन कार्ड कट गए हैं और वे पेंशन व अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो गए हैं। शिविर में पहुंचे कई लोग ऐसे भी थे जो दूसरी या तीसरी बार गुहार लगाने आए थे। उनका सीधा आरोप है कि हर बार उन्हें केवल आश्वासन देकर टाल दिया जाता है।
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समाधान शिविर में नहीं आते हैं उच्च अधिकारी
फरियादियों के अनुसार उपायुक्त (डीसी), अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) जैसे शीर्ष अधिकारियों के मौके पर न होने से जूनियर स्टाफ की जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है। सोमवार 18 मई को सुबह के समय उपायुक्त करीब एक घंटे तक शिविर में रहे लेकिन उनके जाने के बाद सीटीएम (सिटी मजिस्ट्रेट) ने औपचारिकताएं निभाईं। कई विभागाध्यक्षों ने तो खुद आने के बजाय अपने कनिष्ठ (जूनियर) कर्मचारियों को भेज रखा था। लोगों का कहना है कि यदि जिले के वरिष्ठ अधिकारी पूरे समय मौके पर मौजूद रहें तो फाइलों को लटकाने के बजाय समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान संभव हो सकता है। संवाद
शिकायत लिखने के लिए लगाई कर्मचारियों की ड्यूटी
समाधान शिविर में आने वाले फरियादियों को परेशानी न हो इसको लेकर प्रशासन की ओर से शिकायत लिखने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगा रखी है। कई बार फरियादी को पता नहीं होता कि समाधान शिविर में शिकायत लिखकर लेकर आनी होती है। अगर कोई व्यक्ति अपनी समस्या लिखकर आया तो ठीक है नहीं तो कर्मचारी उनकी समस्या को लिखकर देते हैं।
थकान भी दूर करते हैं अधिकारी
जिला मुख्यालय के लघु सचिवालय के सभागार में दो घंटे तक आयोजित होने वाले समाधान शिविर में कई कर्मचारी व अधिकारी नींद की झपकी लेते हुए नजर आए। शिविर में कई विभागों के अधिकारियों को बुला तो लिया जाता है लेकिन उस विभाग से संबंधित शिकायत नहीं आने से वे कुर्सी पर बैठकर थकान दूर करते नजर आए।
पत्नी की जगह फैमिली आईडी में जोड़ा ससुर का नाम
मैने फैमिली आई में पत्नी का नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया था लेकिन उनके ससुर का नाम परिवार पहचान पत्र में दर्ज हो गया है। अब करीब छह माह से पत्नी का नाम दर्ज करवाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा हूं। समाधान शिविर में बैठे अधिकारी बोलते हैं कि आवेदन कर दो लेकिन पोर्टल पर आवेदन करने का कोई विकल्प ही नहीं आता है। - रोहित कुमार, निवासी शिवनगर।
जन्म तिथि दुरुस्त कराने के लिए काट रही चक्कर
परिवार पहचान पत्र में दर्ज अपनी जन्म तिथि को ठीक करवाने के लिए चक्कर काट रही हूं। परिवार पहचान पत्र में दर्ज जन्म तिथि वोटर कार्ड में दर्ज जन्म तिथि के अनुसार करवाना चाहती हूं। वोटर कार्ड में नाम अलग होने के कारण दिक्कत आ रही है। जिस कारण बार-बार समाधान शिविर में आ रही हूं लेकिन समाधान नहीं हो रहा है। - हरजीत कौर, निवासी रतिया।
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पहले शिकायत लिखने को बोला, फिर गेट कीपर ने मना किया
परिवारिक विवाद में जाखल से एक व्यक्ति अपनी बेटी के साथ समाधान शिविर में सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर पहुंचा। मौके पर मौजूद सीटीएम व सीईओ जिला परिषद ने शिकायतकर्ता को प्रार्थना पत्र लिखकर लाने को कहा। जब वह प्रार्थना पत्र लिखकर शिविर में जाने लगा तो बाहर खड़े गेट कीपर ने शिविर का समय खत्म होने हवाला देते हुए उन्हें शिविर में जाने नहीं दिया। निराश व्यक्ति बिना शिकायत दिए वहां से चला गया।
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एक घंटे बाद चले गए डीसी
समाधान शिविर में उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने फरियादियों की शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों को समाधान के आदेश दिए। करीब एक घंटे बाद उपायुक्त शिविर से चले गए और सीटीएम गौरव गुप्ता व सीईओ जिला परिषद सुरेश कुमार ने फरियादियों की शिकायतें सुनीं।