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परमात्मा को पाने के लिए लोभ और क्रोध का करें त्याग : पूनम बहन
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 24 Feb 2026 11:59 PM IST
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अलविदा तनाव कार्यक्रम के दौरान भारत माता की वेशभूषा में कलाकार व पूनम बहन व अन्य बहने। संवाद
- फोटो : महाराज सिंह इंटर कॉलेज से बोर्ड परीक्षा देकर बाहर निकलते छात्र-छात्राएं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
टोहाना। अलविदा तनाव शिविर के अंतिम दिन बहन पूनम ने वर्ल्ड ड्रामा के रहस्य और समय की पहचान पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि सृष्टि चक्र चार युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग में घूमता है। प्रत्येक युग 1250 वर्ष का होता है और पूरे चक्र का समय 5000 वर्ष है।
बहन पूनम ने कहा कि परमात्मा को पाने के लिए लोभ और क्रोध का त्याग करना होगा। परम पिता निराकार शिव ने स्वयं प्रजापिता ब्रह्मा के तन में अवतरित होकर यह ज्ञान बच्चों को दिया है। उन्होंने वर्ल्ड ड्रामा के चार चरणों की व्याख्या करते हुए बताया कि सतयुग में आत्मा की ऊर्जा सौ प्रतिशत चार्ज होती है और स्वर्ग का सुखमय वातावरण होता है। त्रेता युग में ऊर्जा 98 प्रतिशत थी और सुख-समृद्धि का शासन था। द्वापर युग में ऊर्जा घटकर 65 प्रतिशत हो गई, जिसे कॉपर एज कहा गया और दुख-अशांति का आरंभ हुआ।
इस दौरान दिव्य ज्योति और शिव की पूजा के महत्व को भी बताया गया। उन्होंने कहा कि परमात्मा शिव प्रजापिता ब्रह्मा के तन में अवतरित होकर नई सतयुगी दुनिया की स्थापना कर रहे हैं। आत्मा को सतयुग में जाने के लिए अपने अंदर के काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को निकालना होगा। इसके लिए परमात्मा का ज्ञान सुनना और मेडिटेशन करना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि आत्मा सतयुग से कलयुग तक कई जन्मों के माध्यम से अनुभव प्राप्त करती है और यह प्रक्रिया अनगिनत बार चलती रहती है। शिविर में बच्चों और अन्य लोगों ने इस ज्ञान से आत्मिक ऊर्जा और मानसिक शांतिईपाइ। इस शिविर ने लोगों को संतुलन और आध्यात्मिक दिशा अपनाने की प्रेरणा दी।
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महाविजय उत्सव मनाया गया
अंतिम दिन महाविजय उत्सव मनाया गया जिसमें शंख, घंटी की आवाज के साथ ब्रह्माकुमारी बहनें हाथ में शिव ध्वज लेकर मंच पर लहरा रही थीं तथा भारत माता के हाथ में तिरंगा दिखाया गया। इस दौरान जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा गीत पर प्रस्तुति दी गई। अंत में एक अद्भुत हवन कुंड में पंडित ने तनाव, भय, क्रोध, डिप्रेशन, ईर्ष्या, नफरत, हृदय रोग, सर दर्द, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, व्यसन, गुटका, बीडी- सिगरेट, शराब, तंबाकू सभी कमी कमजोरी, सभी दुख अशांति को स्वाहा किया। आज सभी ने अपनी- अपनी एक कमजोरी परमात्मा को सामने रखते हुए कागज पर लिखकर हवन कुंड में स्वाहा करते हुए समर्पित किया। अंत में सेंटर निमित्त बहन वंदना ने ब्रह्माकुमारी पूनम दीदी का अलविदा तनाव कार्यक्रम के लिए आभार जताया।
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टोहाना। अलविदा तनाव शिविर के अंतिम दिन बहन पूनम ने वर्ल्ड ड्रामा के रहस्य और समय की पहचान पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि सृष्टि चक्र चार युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग में घूमता है। प्रत्येक युग 1250 वर्ष का होता है और पूरे चक्र का समय 5000 वर्ष है।
बहन पूनम ने कहा कि परमात्मा को पाने के लिए लोभ और क्रोध का त्याग करना होगा। परम पिता निराकार शिव ने स्वयं प्रजापिता ब्रह्मा के तन में अवतरित होकर यह ज्ञान बच्चों को दिया है। उन्होंने वर्ल्ड ड्रामा के चार चरणों की व्याख्या करते हुए बताया कि सतयुग में आत्मा की ऊर्जा सौ प्रतिशत चार्ज होती है और स्वर्ग का सुखमय वातावरण होता है। त्रेता युग में ऊर्जा 98 प्रतिशत थी और सुख-समृद्धि का शासन था। द्वापर युग में ऊर्जा घटकर 65 प्रतिशत हो गई, जिसे कॉपर एज कहा गया और दुख-अशांति का आरंभ हुआ।
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इस दौरान दिव्य ज्योति और शिव की पूजा के महत्व को भी बताया गया। उन्होंने कहा कि परमात्मा शिव प्रजापिता ब्रह्मा के तन में अवतरित होकर नई सतयुगी दुनिया की स्थापना कर रहे हैं। आत्मा को सतयुग में जाने के लिए अपने अंदर के काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को निकालना होगा। इसके लिए परमात्मा का ज्ञान सुनना और मेडिटेशन करना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि आत्मा सतयुग से कलयुग तक कई जन्मों के माध्यम से अनुभव प्राप्त करती है और यह प्रक्रिया अनगिनत बार चलती रहती है। शिविर में बच्चों और अन्य लोगों ने इस ज्ञान से आत्मिक ऊर्जा और मानसिक शांतिईपाइ। इस शिविर ने लोगों को संतुलन और आध्यात्मिक दिशा अपनाने की प्रेरणा दी।
महाविजय उत्सव मनाया गया
अंतिम दिन महाविजय उत्सव मनाया गया जिसमें शंख, घंटी की आवाज के साथ ब्रह्माकुमारी बहनें हाथ में शिव ध्वज लेकर मंच पर लहरा रही थीं तथा भारत माता के हाथ में तिरंगा दिखाया गया। इस दौरान जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा गीत पर प्रस्तुति दी गई। अंत में एक अद्भुत हवन कुंड में पंडित ने तनाव, भय, क्रोध, डिप्रेशन, ईर्ष्या, नफरत, हृदय रोग, सर दर्द, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, व्यसन, गुटका, बीडी- सिगरेट, शराब, तंबाकू सभी कमी कमजोरी, सभी दुख अशांति को स्वाहा किया। आज सभी ने अपनी- अपनी एक कमजोरी परमात्मा को सामने रखते हुए कागज पर लिखकर हवन कुंड में स्वाहा करते हुए समर्पित किया। अंत में सेंटर निमित्त बहन वंदना ने ब्रह्माकुमारी पूनम दीदी का अलविदा तनाव कार्यक्रम के लिए आभार जताया।