सॉरी मम्मी पापा: किताब पर लिख पंखे से झूल गई बीटेक छात्रा, NIT कुरुक्षेत्र का मामला; दो माह में चौथी घटना
NIT कुरुक्षेत्र में गुरुवार को एक और छात्रा ने आत्महत्या कर ली। छात्रा अपने हॉस्टल के पंखे से लटक गई। बीते दो माह में शिक्षण संस्थान में यह चौथी आत्महत्या का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद छात्रों में रोष है।
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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र (एनआईटी) के महिला छात्रावास में तीसरी मंजिल पर वीरवार को कमरे में छात्रा (19) ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्रा का शव पंखे पर लटका मिला। बीटेक के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस के द्वितीय वर्ष की छात्रा दीक्षा दूबे बिहार के बक्सर जिले के बसौली की रहने वाली थी। वह कावेरी छात्रावास के कमरा नंबर 441 में रह रही थी। एनआईटी में एक सप्ताह में दूसरा व दो माह में आत्महत्या का यह चौथा मामला सामने आने के बाद से एनआईटी प्रशासन सकते में है।
घटना की सूचना मिलने के बाद पहुंची पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। हॉस्टल के कमरे को सील कर दिया गया है। छात्रा के परिवार को सूचना दे दी गई है। छात्रावास में दीक्षा के आसपास के कमरों में रहने वाली छात्राओं ने बताया है कि वह सुबह कक्षा में गई थी, लेकिन दोपहर 12 बजे के करीब वापस अपने कमरे में आ गई। दोपहर दो बजे के करीब एक छात्रा ने जब उसका दरवाजा खटखटाया तो अंदर से कोई आवाज न आने पर सुरक्षाकर्मी को सूचित किया। सुरक्षाकर्मी ने तुरंत स्थिति को समझते हुए खिड़की से झांककर देखा तो दीक्षा फंदे से लटकी हुई मिली। थर्ड गेट चौकी प्रभारी विनोद कुमार ने मुताबिक अभी तक दीक्षा के आत्महत्या करने की वजह साफ नहीं हो सकी है। पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है।
रजिस्टर में लिखा सुसाइड, बुक पर लिखा सॉरी मम्मी-पापा...
पुलिस को सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, लेकिन कमरे में एक रजिस्टर के बीच के खाली पेज पर सुसाइड लिखा हुआ मिला है। पुलिस जांच में सामने आया है कि दीक्षा की एआई की किताबों के मोड़े हुए एक पेज पर सॉरी मम्मी-पापा लिखा हुआ था। पुलिस ने उसे अपने कब्जे में लेकर लिखाई व अन्य सामान को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया।
कारणों का लगाया जा रहा पता
छात्रा द्वारा आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जा रहा है। छात्रों की मानसिक परिस्थिति समझने के लिए प्रशासन ने हर 15 से 20 छात्रों पर मेनटोर लगाएं हैं, जो हर छात्र से दूसरे से तीसरे दिन संवाद कर रहे हैं। -डॉ. ज्ञान भूषण, प्रवक्ता, एनआईटी, कुरुक्षेत्र।
दो माह में चौथी घटना
16 अप्रैल- दीक्षा दूबे , बक्सर (बिहार)
9 अप्रैल - प्रियांशु वर्मा (22), सिरसा
31 मार्च - पवन कुमार (22) , नूंह
16 फरवरी - अंगोद शिवा (19), तेलंगाना
छात्रों में रोष
वीरवार देर रात संस्थान के छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा और सड़कों पर उतर आए। सभी मामलों की सही जांच करने व आरोपी शिक्षक व अन्य कर्मियों पर कार्रवाई की मांग करते रहे। सैंकड़ों छात्र-छात्राओं के गुस्से को देख भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। वहीं इसी बीच एनआईटी प्रशासन ने देर रात संस्थान में शुक्रवार से चार मई तक परीक्षा की तैयारी के रूप में छुट्टी का एलान कर दिया है।
संस्थान की ओर से छुट्टी के संबंध में जारी किए गए पत्र में स्पष्ट किया गया कि थ्योरी परीक्षाएं पहले से तय शेड्यूल के अनुसार होंगी, जिसकी पूरी जानकारी साइट पर दी गई है। वहीं, प्रैक्टिल परीक्षाएं ऑनलाइन ली जाएंगी। उधर छात्र-छात्राएं छुट्टी का एलान होने के बावजूद भी देर रात तक धरने पर डटे रहे। इस दौरान पुलिस बल भी तैनात रहा। छात्रों के गुस्से को देख संस्थान के निदेशक का कार्यभार संभाल रहे डॉ ब्रह्मजीत अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्र-छात्राओं को मनाने का प्रयास किया लेकिन वे अड़े रहे।
रोष जता रहे छात्र-छात्राओं ने एक प्रोफेसर पर आरोप लगाए कि प्रियांशु की आत्महत्या मामले के बाद जब उनके प्रबंधन ने बातचीत करनी शुरू की तो एक प्रोफेसर ने यहां तक कहा कि अगर मरना है तो ब्रह्मसरोवर पर जाएं लेकिन यहां न मरें। ऐसे प्रोफेसर पर कार्रवाई की जाए। वहीं, कईं छात्राओं ने होस्टल वार्डन पर भी आरोप लगाए कि आज दीक्षा दुबे के मामले में लापरवाही बरती गई। जब उसे फंदे पर लटके देखा तो तत्काल ही वार्डन को बता दिया गया था लेकिन वह आराम से चाय पीती रही। दीक्षा को फंदे से तीन घंटे बाद उतारा गया। समय रहते गंभीरता बरती जाती तो शायद वह बच सकती थी।
वहीं, छात्र-छात्राओं ने प्रबंधन से जवाब मांगा है कि इस तरह हो रही घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और छुट्टियां क्यों की गई है। इस पर डॉ ब्रह्जीत ने कहा कि कमेटी बनाकर जांच कराई जाएगी। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के प्रतिनिधिमंडल को कार्यालय में बुलाया लेकिन वे जाने को तैयार नहीं हुए। देर रात तक विवाद चलता रहा तो भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। वहीं संस्थान अधिकारी भी काार्यलयों में बैठे रहे।
