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Hisar News: एआई वॉइस क्लोनिंग के जरिये से हो सकती हैं ठगी
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सिद्धांत जैन
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हिसार। आज के डिजिटल युग में अपराधी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसी ही एक तकनीक एआई वॉइस क्लोनिंग तकनीक है। इस तकनीक की मदद से साइबर अपराधी आपके परिचितों या रिश्तेदारों की हूबहू आवाज निकालकर पैसों की मांग करते हैं। इसे एआई वॉइस स्कैम भी कहा जाता है।
साइबर अपराधी सोशल मीडिया से आपके रिश्तेदारों की आवाज के सैंपल लेते हैं और एआई सॉफ्टवेयर के जरिए उनकी आवाज की नकल (क्लोनिंग) करते हैं। इसके बाद वे आपको कॉल करके एक्सीडेंट, गिरफ्तारी या किसी इमरजेंसी का बहाना बनाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं।
ये बरतें सावधानी
यदि कोई रिश्तेदार बनकर पैसे मांगे तो तुरंत कॉल काटकर उनके पुराने नंबर पर दोबारा कॉल करें या परिवार के अन्य सदस्यों से बात करके सच्चाई का पता लगाएं। आवाज पर संदेह होने पर सामने वाले व्यक्ति को वीडियो कॉल करने के लिए कहें। अपराधी आमतौर पर वीडियो कॉल से बचते हैं। अपराधी अक्सर इमरजेंसी का डर दिखाकर आपको सोचने का समय नहीं देते। शांत रहें और बिना जांचे पैसे न भेजें। अपने परिवार के साथ एक सीक्रेट वर्ड या कोड तय करें जिसका उपयोग केवल आपातकालीन स्थिति में ही किया जाए। कभी भी फोन पर अपना ओटीपी, बैंक विवरण या पिन साझा न करें।
मदद के लिए यहां संपर्क करें
यदि आप या आपके आसपास कोई इस तरह की ठगी का शिकार होता है तो बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, हिसार पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर 8814058100, आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल करें। इसके अलावा पीड़ित www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
आजकल अपराधी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसा ही एक तरीका एआई वॉइस क्लोनिंग है। अगर किसी के पास कोई संदिग्ध कॉल आती है वे घबराएं नहीं और पुलिस की तरफ से जारी गाइडलाइन का पालन करें।
- सिद्धांत जैन, पुलिस अधीक्षक।
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ये बरतें सावधानी
यदि कोई रिश्तेदार बनकर पैसे मांगे तो तुरंत कॉल काटकर उनके पुराने नंबर पर दोबारा कॉल करें या परिवार के अन्य सदस्यों से बात करके सच्चाई का पता लगाएं। आवाज पर संदेह होने पर सामने वाले व्यक्ति को वीडियो कॉल करने के लिए कहें। अपराधी आमतौर पर वीडियो कॉल से बचते हैं। अपराधी अक्सर इमरजेंसी का डर दिखाकर आपको सोचने का समय नहीं देते। शांत रहें और बिना जांचे पैसे न भेजें। अपने परिवार के साथ एक सीक्रेट वर्ड या कोड तय करें जिसका उपयोग केवल आपातकालीन स्थिति में ही किया जाए। कभी भी फोन पर अपना ओटीपी, बैंक विवरण या पिन साझा न करें।
मदद के लिए यहां संपर्क करें
यदि आप या आपके आसपास कोई इस तरह की ठगी का शिकार होता है तो बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, हिसार पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर 8814058100, आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल करें। इसके अलावा पीड़ित www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
आजकल अपराधी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसा ही एक तरीका एआई वॉइस क्लोनिंग है। अगर किसी के पास कोई संदिग्ध कॉल आती है वे घबराएं नहीं और पुलिस की तरफ से जारी गाइडलाइन का पालन करें।
- सिद्धांत जैन, पुलिस अधीक्षक।