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Hisar News: जीजेयू में अनियमितताओं का आरोप, सीएम से मिले गजुटा के अध्यक्ष
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मुख्यमंत्री को ज्ञापन देते गजुटा अध्यक्ष।
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हिसार। गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (गजुटा) के अध्यक्ष विनोद गोयल ने रविवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर विश्वविद्यालय में व्याप्त अनियमितताओं और समस्याओं पर ज्ञापन सौंपा।
गोयल ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार विश्वविद्यालय अधिनियम, नियमों और यूजीसी मानकों का उल्लंघन कर रहा है। विभागाध्यक्ष और डीन ऑफ संकाय की मनमानी नियुक्तियां, वरिष्ठता की अनदेखी, प्रमोशन, पुन: नियुक्ति और सेवानिवृत्ति लाभ में पक्षपात से प्रशासनिक पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। कार्यकारी परिषद के चुनाव नहीं कराए गए जबकि निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2025 में समाप्त हो चुका है।
गुजटा अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय में बढ़ती इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, छात्रावास संकट, मूलभूत सुविधाओं का अभाव और सुरक्षा संबंधित मुद्दों को भी गंभीर बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और प्रशासन पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जाए।
इन मांगों को पूरा करने की मांग :
उन्होंने मांग उठाई कि विश्वविद्यालय अधिनियम और नियमों का सख्ती से पालन हो। कार्यकारी परिषद के चुनाव तुरंत कराए जाएं। डीन और चेयरपर्सन की अवैध नियुक्तियां निरस्त कर सुधार किया जाए। दोषियों की जवाबदेही तय की जाए। विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
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गोयल ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार विश्वविद्यालय अधिनियम, नियमों और यूजीसी मानकों का उल्लंघन कर रहा है। विभागाध्यक्ष और डीन ऑफ संकाय की मनमानी नियुक्तियां, वरिष्ठता की अनदेखी, प्रमोशन, पुन: नियुक्ति और सेवानिवृत्ति लाभ में पक्षपात से प्रशासनिक पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। कार्यकारी परिषद के चुनाव नहीं कराए गए जबकि निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2025 में समाप्त हो चुका है।
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गुजटा अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय में बढ़ती इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, छात्रावास संकट, मूलभूत सुविधाओं का अभाव और सुरक्षा संबंधित मुद्दों को भी गंभीर बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और प्रशासन पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जाए।
इन मांगों को पूरा करने की मांग :
उन्होंने मांग उठाई कि विश्वविद्यालय अधिनियम और नियमों का सख्ती से पालन हो। कार्यकारी परिषद के चुनाव तुरंत कराए जाएं। डीन और चेयरपर्सन की अवैध नियुक्तियां निरस्त कर सुधार किया जाए। दोषियों की जवाबदेही तय की जाए। विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।