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Hisar News: जीजेयू में एमएससी बायोटेक्नोलॉजी के लिए आवेदन शुरू, 12 जुलाई तक कर सकेंगे अप्लाई
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Thu, 18 Jun 2026 12:06 AM IST
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हिसार। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) में शैक्षणिक सत्र 2026-28 के लिए डीबीटी प्रायोजित एमएससी बायोटेक्नोलॉजी कार्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से संचालित इस पाठ्यक्रम के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) से समर्थित इस कार्यक्रम में 30 सीटें उपलब्ध हैं। प्रवेश ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट-बायोटेक्नोलॉजी (जीएटी-बी) 2026 में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि जीजेयू हरियाणा का एकमात्र सरकारी विश्वविद्यालय है जो राष्ट्रीय स्तर की जीएटी-बी परीक्षा के माध्यम से इस कार्यक्रम में प्रवेश देता है। उन्होंने कहा कि उच्च शैक्षणिक मानकों, अनुसंधान उन्मुख दृष्टिकोण और विद्यार्थियों की उत्कृष्ट उपलब्धियों के कारण यह कार्यक्रम देश के प्रमुख डीबीटी समर्थित बायोटेक्नोलॉजी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में शामिल है तथा शीर्ष 10 कार्यक्रमों में स्थान रखता है।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार भानखड़ ने बताया कि विभाग आधुनिक जैव विज्ञान के क्षेत्र में उन्नत शिक्षण और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बन चुका है। अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को आणविक जीवविज्ञान, जीनोमिक्स, बायोइन्फॉर्मेटिक्स, पर्यावरणीय जैव प्रौद्योगिकी तथा बायोप्रोसेस प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है। पाठ्यक्रम के लिए ऑनलाइन आवेदन 12 जुलाई को सायं पांच बजे तक किए जा सकते हैं। चयनित अभ्यर्थियों की प्रथम सूची 14 जुलाई को जारी की जाएगी।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि जीजेयू हरियाणा का एकमात्र सरकारी विश्वविद्यालय है जो राष्ट्रीय स्तर की जीएटी-बी परीक्षा के माध्यम से इस कार्यक्रम में प्रवेश देता है। उन्होंने कहा कि उच्च शैक्षणिक मानकों, अनुसंधान उन्मुख दृष्टिकोण और विद्यार्थियों की उत्कृष्ट उपलब्धियों के कारण यह कार्यक्रम देश के प्रमुख डीबीटी समर्थित बायोटेक्नोलॉजी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में शामिल है तथा शीर्ष 10 कार्यक्रमों में स्थान रखता है।
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जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार भानखड़ ने बताया कि विभाग आधुनिक जैव विज्ञान के क्षेत्र में उन्नत शिक्षण और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बन चुका है। अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को आणविक जीवविज्ञान, जीनोमिक्स, बायोइन्फॉर्मेटिक्स, पर्यावरणीय जैव प्रौद्योगिकी तथा बायोप्रोसेस प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है। पाठ्यक्रम के लिए ऑनलाइन आवेदन 12 जुलाई को सायं पांच बजे तक किए जा सकते हैं। चयनित अभ्यर्थियों की प्रथम सूची 14 जुलाई को जारी की जाएगी।