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भाखड़ा नहर के पानी पर चानौत का हक : प्रो. संपत
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हिसार। भाजपा सरकार भाखड़ा के पानी का गलत तरीके से उपयोग कर हांसी क्षेत्र को पानी देने की योजना पर काम कर रही है। चानौत गांव के ग्रामीण केवल टी-कनेक्शन के माध्यम से अपने हिस्से का पानी मांग रहे हैं। चानौत गांव भाखड़ा कमांड एरिया में आता है इसलिए ग्रामीणों का भाखड़ा के पानी पर हक है। सरकार किसानों पर दर्ज केस वापस ले और ग्रामीणों की मांग स्वीकार करे। यह बात इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय संरक्षक एवं हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने कही।
यहां जारी बयान में पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जायज मांग मानने के बजाय लोगों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया। पंजाब क्षेत्र में भाखड़ा मुख्य नहर की बुर्जी संख्या 445 से 466 तक मरम्मत और किनारों की ऊंचाई बढ़ाकर लगभग 450 क्यूसेक अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए हरियाणा सरकार वर्ष 2015 में 372.11 लाख रुपये पंजाब सरकार को दे चुकी है लेकिन परियोजना अधूरी है। राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को पत्र लिखकर काम बंद करवा दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर काम शुरू कराने की मांग की किंतु कोई कदम नहीं उठाया गया।
प्रो. संपत ने कहा कि बरवाला लिंक नहर की डिजाइन क्षमता 1,750 क्यूसेक है, जबकि वर्तमान में केवल 1,250 क्यूसेक पानी ही प्रवाहित किया जा रहा है। तकनीकी सुधार और पुल के नवीनीकरण से इसकी पूरी क्षमता बहाल की जा सकती है। उनका दावा है कि इससे लगभग 700 क्यूसेक अतिरिक्त पानी उपलब्ध होगा जिससे नलवा, हिसार और आदमपुर क्षेत्र के गांवों व शहरों को नियमित जलापूर्ति संभव हो सकेगी। उन्होंने सरकार से तकनीकी कमियां दूर कर स्थायी समाधान करने की अपील की।
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यहां जारी बयान में पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जायज मांग मानने के बजाय लोगों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया। पंजाब क्षेत्र में भाखड़ा मुख्य नहर की बुर्जी संख्या 445 से 466 तक मरम्मत और किनारों की ऊंचाई बढ़ाकर लगभग 450 क्यूसेक अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए हरियाणा सरकार वर्ष 2015 में 372.11 लाख रुपये पंजाब सरकार को दे चुकी है लेकिन परियोजना अधूरी है। राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को पत्र लिखकर काम बंद करवा दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर काम शुरू कराने की मांग की किंतु कोई कदम नहीं उठाया गया।
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प्रो. संपत ने कहा कि बरवाला लिंक नहर की डिजाइन क्षमता 1,750 क्यूसेक है, जबकि वर्तमान में केवल 1,250 क्यूसेक पानी ही प्रवाहित किया जा रहा है। तकनीकी सुधार और पुल के नवीनीकरण से इसकी पूरी क्षमता बहाल की जा सकती है। उनका दावा है कि इससे लगभग 700 क्यूसेक अतिरिक्त पानी उपलब्ध होगा जिससे नलवा, हिसार और आदमपुर क्षेत्र के गांवों व शहरों को नियमित जलापूर्ति संभव हो सकेगी। उन्होंने सरकार से तकनीकी कमियां दूर कर स्थायी समाधान करने की अपील की।
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