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Hisar News: डेयरी प्लाजा प्रोजेक्ट में बदलाव अब 3 एजेंसियों से कराएंगे काम
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डेयरी प्रोजेक्ट के लिए चयनित जमीन।
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हिसार। नगर निगम की तरफ से डेयरी प्लाजा प्रोजेक्ट के लिए चार बार टेंडर लगाने के बाद भी इसे सिरे नहीं चढ़ाया जा सका। कोई भी एजेंसी सड़क, सीवरेज, पेयजल की लाइनों की शर्तों को पूरा नहीं कर पा रही थी। एक ही एजेंसी के पास तीनों कार्यों के अनुभव की शर्त पूरी नहीं हो रही थी जिस कारण चार बार में भी टेंडर सिरे नहीं चढ़ सका। अब नगर निगम ने सीवरेज, पेयजल, सड़क और स्ट्रीट लाइट के लिए अलग-अलग एजेंसियों से कार्य कराने का फैसला लिया है। तीनों कार्य तीन अलग-अलग एजेंसियां करेंगी। इसी के अनुसार नए टेंडर लगाए जाएंगे।
नगर निगम अधिकारियों ने मुख्यालय से टेंडर को तीन टुकड़ों में कर इसे पूरा करने की अनुमति मांगी है। शहर में संचालित करीब 396 पशु डेयरियों को यहां शिफ्ट करने के लिए 41.08 करोड़ रुपये की लागत से डेयरी प्लाजा को विकसित किया जाना है। इसके लिए नए सिरे से कवायद शुरू हुई है। 25 साल पहले पहली बार डेयरी शिफ्टिंग की घोषणा इनेलो सरकार में वर्ष 2000 में हुई थी।
निगम ने इसके लिए धान्सू रोड पर जमीन ली थी, मगर प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। इसके बाद वर्ष 2004-05 में डेयरी शिफ्टिंग का मुद्दा दोबारा से उठा, तो अफसरों को जमीन तलाशने की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2005 में जिला प्रशासन ने 24 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित की। साल 2010 में डेयरी शिफ्टिंग के लिए शहर में सर्वे भी हुआ था, जिसमें 292 डेयरियां संचालित पाई गईं।
निगम अधिकारियों ने अगस्त 2013 में बगला रोड पर 137 एकड़ 7 कनाल 14 मरले भूमि चिह्नित कर सरकार के पास प्रस्ताव भेजा, लेकिन इसके बाद भी प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। 29 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट के लिए फिर घोषणा की। शहर के चारों तरफ 25-25 एकड़ जमीन पर डेयरियां शिफ्ट करने की घोषणा की। इस तरह चारों ओर जमीन नहीं मिलने के बाद आखिरकार साउथ बाईपास (बगला रोड) पर ही 50 एकड़ जमीन फाइनल हुई।
नगर निगम प्रशासन ने बगला रोड पर चयनित करीब 50 एकड़ जमीन पर डेयरी प्लाजा प्रोजेक्ट का प्रारूप बनाकर कुछ प्लॉटों की बोली भी कर दी थी मगर इसी बीच मुख्यालय ने प्रारूप पर आपत्ति जता दी। इसके बाद निगम प्रशासन ने वर्ष 2023 में यह कहते हुए प्लॉट की बोली को रद्द कर दिया कि बिल्डिंग कोड के अनुसार प्रोजेक्ट डिजाइन नहीं किया गया।
इसके बाद इस प्रोजेक्ट की पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की गई। इसके तहत दोबारा से प्रोजेक्ट का प्रारूप तैयार कर मंजूरी ली गई, और प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त की। 2024 में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के चलते इस प्रोजेक्ट पर काम नहीं हो सका। वर्ष 2025 में इस प्रोजेक्ट के लिए चार बार टेंडर मांगे गए, लेकिन चारों बार इसके लिए एजेंसियां सामने नहीं आईं।
250 से 1000 गज तक के प्लॉट
बगला रोड पर विकसित किए जाने वाले डेयरी प्लाजा में कुल 342 प्लॉट का प्रावधान है। इनमें 250 गज के 239 प्लॉट, 350 गज के 68 प्लॉट, 500 गज के 27 प्लॉट और 1000 गज के 8 प्लॉट शामिल हैं। हालांकि पुराने लेआउट प्लान में कुल 410 प्लॉट थे। इसके अलावा 1170 गज में मिल्क चिलिंग प्लांट, 5360 गज में गोबर गैस प्लांट और 3688 गज में वाटर वर्क्स का प्रावधान किया गया है। डेयरी संचालकों को बोली के आधार पर प्लॉट दिए जाएंगे।
सीवरेज जाम से मिलेगी मुक्ति
डेयरी प्लाजा के निर्माण से शहर में चल रही पशु डेयरियों से बाहर शिफ्ट हो जाएंगी। इससे सीवर सिस्टम में सुधार होगा क्योंकि डेयरी संचालक पशुओं का गोबर सीधे ही सीवर में बहा देते हैं जिससे सीवर जाम की समस्या पैदा होती है। इसके अलावा ये डेयरी संचालक खुले में पशुओं का गोबर डालते हैं जिससे गंदगी भी फैलती है। कुछ डेयरी संचालक दूध निकालने के बाद अपने पशुओं को खुले में भी छोड़ देते हैं। सीवरेज में गोबर डालने की समस्या के अस्थायी समाधान के तौर पर नगर निगम ने ट्राली खड़ी कर उसमें गोबर एकत्र कर उसे शहर के बाहर एक स्थान पर डलवाना शुरू किया है।
इस प्रोजेक्ट को लेकर चार बार टेंडर प्रक्रिया के बाद भी एजेंसियां नहीं आईं। हमने इसका कारण पता किया तो जानकारी मिली कि एक ही एजेंसी के पास तीन अलग-अलग फील्ड का इतना अनुभव नहीं है। इस कारण एजेंसियों के आवेदन नहीं मिल पा रहे थे। इसके बाद हमने डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट को तीन टुकड़ों में करने का फैसला लिया है। इसमें पेयजल-सीवरेज, सड़क और लाइट के कार्य अलग-अलग एजेंसियों से कराए जाएंगे। इसके लिए मुख्यालय से अनुमति मांगी है।
- नीरज कुमार, निगम आयुक्त, हिसार।
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नगर निगम अधिकारियों ने मुख्यालय से टेंडर को तीन टुकड़ों में कर इसे पूरा करने की अनुमति मांगी है। शहर में संचालित करीब 396 पशु डेयरियों को यहां शिफ्ट करने के लिए 41.08 करोड़ रुपये की लागत से डेयरी प्लाजा को विकसित किया जाना है। इसके लिए नए सिरे से कवायद शुरू हुई है। 25 साल पहले पहली बार डेयरी शिफ्टिंग की घोषणा इनेलो सरकार में वर्ष 2000 में हुई थी।
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निगम ने इसके लिए धान्सू रोड पर जमीन ली थी, मगर प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। इसके बाद वर्ष 2004-05 में डेयरी शिफ्टिंग का मुद्दा दोबारा से उठा, तो अफसरों को जमीन तलाशने की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2005 में जिला प्रशासन ने 24 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित की। साल 2010 में डेयरी शिफ्टिंग के लिए शहर में सर्वे भी हुआ था, जिसमें 292 डेयरियां संचालित पाई गईं।
निगम अधिकारियों ने अगस्त 2013 में बगला रोड पर 137 एकड़ 7 कनाल 14 मरले भूमि चिह्नित कर सरकार के पास प्रस्ताव भेजा, लेकिन इसके बाद भी प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। 29 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट के लिए फिर घोषणा की। शहर के चारों तरफ 25-25 एकड़ जमीन पर डेयरियां शिफ्ट करने की घोषणा की। इस तरह चारों ओर जमीन नहीं मिलने के बाद आखिरकार साउथ बाईपास (बगला रोड) पर ही 50 एकड़ जमीन फाइनल हुई।
नगर निगम प्रशासन ने बगला रोड पर चयनित करीब 50 एकड़ जमीन पर डेयरी प्लाजा प्रोजेक्ट का प्रारूप बनाकर कुछ प्लॉटों की बोली भी कर दी थी मगर इसी बीच मुख्यालय ने प्रारूप पर आपत्ति जता दी। इसके बाद निगम प्रशासन ने वर्ष 2023 में यह कहते हुए प्लॉट की बोली को रद्द कर दिया कि बिल्डिंग कोड के अनुसार प्रोजेक्ट डिजाइन नहीं किया गया।
इसके बाद इस प्रोजेक्ट की पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की गई। इसके तहत दोबारा से प्रोजेक्ट का प्रारूप तैयार कर मंजूरी ली गई, और प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त की। 2024 में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के चलते इस प्रोजेक्ट पर काम नहीं हो सका। वर्ष 2025 में इस प्रोजेक्ट के लिए चार बार टेंडर मांगे गए, लेकिन चारों बार इसके लिए एजेंसियां सामने नहीं आईं।
250 से 1000 गज तक के प्लॉट
बगला रोड पर विकसित किए जाने वाले डेयरी प्लाजा में कुल 342 प्लॉट का प्रावधान है। इनमें 250 गज के 239 प्लॉट, 350 गज के 68 प्लॉट, 500 गज के 27 प्लॉट और 1000 गज के 8 प्लॉट शामिल हैं। हालांकि पुराने लेआउट प्लान में कुल 410 प्लॉट थे। इसके अलावा 1170 गज में मिल्क चिलिंग प्लांट, 5360 गज में गोबर गैस प्लांट और 3688 गज में वाटर वर्क्स का प्रावधान किया गया है। डेयरी संचालकों को बोली के आधार पर प्लॉट दिए जाएंगे।
सीवरेज जाम से मिलेगी मुक्ति
डेयरी प्लाजा के निर्माण से शहर में चल रही पशु डेयरियों से बाहर शिफ्ट हो जाएंगी। इससे सीवर सिस्टम में सुधार होगा क्योंकि डेयरी संचालक पशुओं का गोबर सीधे ही सीवर में बहा देते हैं जिससे सीवर जाम की समस्या पैदा होती है। इसके अलावा ये डेयरी संचालक खुले में पशुओं का गोबर डालते हैं जिससे गंदगी भी फैलती है। कुछ डेयरी संचालक दूध निकालने के बाद अपने पशुओं को खुले में भी छोड़ देते हैं। सीवरेज में गोबर डालने की समस्या के अस्थायी समाधान के तौर पर नगर निगम ने ट्राली खड़ी कर उसमें गोबर एकत्र कर उसे शहर के बाहर एक स्थान पर डलवाना शुरू किया है।
इस प्रोजेक्ट को लेकर चार बार टेंडर प्रक्रिया के बाद भी एजेंसियां नहीं आईं। हमने इसका कारण पता किया तो जानकारी मिली कि एक ही एजेंसी के पास तीन अलग-अलग फील्ड का इतना अनुभव नहीं है। इस कारण एजेंसियों के आवेदन नहीं मिल पा रहे थे। इसके बाद हमने डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट को तीन टुकड़ों में करने का फैसला लिया है। इसमें पेयजल-सीवरेज, सड़क और लाइट के कार्य अलग-अलग एजेंसियों से कराए जाएंगे। इसके लिए मुख्यालय से अनुमति मांगी है।
- नीरज कुमार, निगम आयुक्त, हिसार।
