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Hisar News: नागरिक अस्पताल में जिंदा मरीज को मृत व मृत को जिंदा दिखाने के मामले में मांगा स्पष्टीकरण
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ई उपचार पोर्टल पर श्रवण को दर्शाया गया मृत। स्रोत पीड़ित
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हिसार। जिला नागरिक अस्पताल में जिंदा मरीज को मृत और मृत को जिंदा दिखाने के मामले में अस्पताल प्रशासन ने संज्ञान लिया है। प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) ने जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं इस त्रुटि को ठीक करवाने के लिए मुख्यालय को पत्र भेजा गया है।
उकलाना मंडी निवासी सुशीला ने बताया कि उसका भाई श्रवण महावीर कॉलोनी में रहता है और गैस चूल्हे ठीक करने का काम करता है। 11 जून को श्रवण की तबीयत खराब होने पर वह उसे जिला नागरिक अस्पताल लेकर आई।
जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे काला पीलिया बताया और अस्पताल में भर्ती कर लिया। बीमारी के कारण उसका खून काफी पतला हो गया था इसलिए चिकित्सकों ने उसे प्लाज्मा चढ़ाने की सलाह दी। इस पर वह काउंटर पर ब्लड ग्रुप सैंपल का बिल बनवाने गई तो वहां ऑपरेटर ने बताया कि मरीज की मौत हो चुकी है। यह सुनकर वह हैरान रह गई। उसने ऑपरेटर से कहा कि मरीज जीवित है।
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गलती से मृत मरीज का डेटा हुआ दर्ज
सुशीला ने बताया कि वार्ड में उसे पता चला कि ई-उपचार पोर्टल पर उसके भाई श्रवण की पेशेंट आईडी पर किसी 10 वर्षीय श्रवण का डेटा दर्ज हो गया है। उक्त बच्चे की सांप के काटने से मौत हो गई थी। सुशीला के मुताबिक वार्ड स्टाफ का कहना है कि यह गलती इमरजेंसी वार्ड में हुई है।
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गलती ठीक नहीं हुई तो होगी परेशानी
सुशीला का कहना है कि अगर यह गलती ठीक नहीं हुई तो काफी परेशानी होगी। सरकारी सुविधाएं मिलनी बंद हो जाएंगी। यही नहीं, खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है और श्रवण अभी तक अविवाहित है।
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इस गलती के लिए जिम्मेदार स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा है। यह हमारा अंदरूनी मामला है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिलता है तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पोर्टल पर इस डेटा को दुरुस्त करवाने के लिए मुख्यालय को ईमेल भेजी गई है।
- डॉ. रीना जैन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल।
उकलाना मंडी निवासी सुशीला ने बताया कि उसका भाई श्रवण महावीर कॉलोनी में रहता है और गैस चूल्हे ठीक करने का काम करता है। 11 जून को श्रवण की तबीयत खराब होने पर वह उसे जिला नागरिक अस्पताल लेकर आई।
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जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे काला पीलिया बताया और अस्पताल में भर्ती कर लिया। बीमारी के कारण उसका खून काफी पतला हो गया था इसलिए चिकित्सकों ने उसे प्लाज्मा चढ़ाने की सलाह दी। इस पर वह काउंटर पर ब्लड ग्रुप सैंपल का बिल बनवाने गई तो वहां ऑपरेटर ने बताया कि मरीज की मौत हो चुकी है। यह सुनकर वह हैरान रह गई। उसने ऑपरेटर से कहा कि मरीज जीवित है।
गलती से मृत मरीज का डेटा हुआ दर्ज
सुशीला ने बताया कि वार्ड में उसे पता चला कि ई-उपचार पोर्टल पर उसके भाई श्रवण की पेशेंट आईडी पर किसी 10 वर्षीय श्रवण का डेटा दर्ज हो गया है। उक्त बच्चे की सांप के काटने से मौत हो गई थी। सुशीला के मुताबिक वार्ड स्टाफ का कहना है कि यह गलती इमरजेंसी वार्ड में हुई है।
गलती ठीक नहीं हुई तो होगी परेशानी
सुशीला का कहना है कि अगर यह गलती ठीक नहीं हुई तो काफी परेशानी होगी। सरकारी सुविधाएं मिलनी बंद हो जाएंगी। यही नहीं, खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है और श्रवण अभी तक अविवाहित है।
इस गलती के लिए जिम्मेदार स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा है। यह हमारा अंदरूनी मामला है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिलता है तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पोर्टल पर इस डेटा को दुरुस्त करवाने के लिए मुख्यालय को ईमेल भेजी गई है।
- डॉ. रीना जैन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल।