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Hisar News: साइबर ठगों ने अकाउंटेंट से 3 लाख रुपये ठगे, कंपनी के नाम से फर्जी नंबर बनाकर की धोखाधड़ी
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हिसार। साइबर ठगों ने एक कंपनी के अकाउंटेंट को झांसे में लेकर 3 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच अधिकारी संजय कुमार के अनुसार डिफेंस कॉलोनी निवासी दिनेशा ने शिकायत में बताया कि वह हिसार बाईपास रोड स्थित एक कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत है। कंपनी द्वारा दिए गए एक मोबाइल नंबर का वह नियमित रूप से उपयोग करता है, जिसके माध्यम से वह डीलर, प्रिंसिपल और जनरल मैनेजर से संपर्क में रहता है। कंपनी के वित्तीय लेन-देन के दौरान ओटीपी जनरल मैनेजर के पास आता है, जिसके आधार पर बैंकिंग ट्रांजैक्शन किए जाते हैं।
पीड़ित के अनुसार 15 मई को उसके व्हाट्सएप पर एक संदेश आया, जिसमें पूछा गया कि वह कहां है। जवाब देने के बाद संबंधित नंबर से बातचीत शुरू हुई। व्हाट्सएप प्रोफाइल पर प्रिंसिपल डीलर की पत्नी की फोटो लगी होने के कारण उसे विश्वास हो गया कि यह वही आधिकारिक नंबर है। इसी दौरान उस नंबर से 3 लाख रुपये भेजने का मैसेज आया, जिसे उसने वास्तविक समझकर ट्रांसफर कर दिया।
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इसके बाद 18 और 19 मई को भी उसी नंबर से और रकम की मांग की गई। इस पर उसने कंपनी के जनरल मैनेजर से पुष्टि की जिन्होंने किसी भी तरह का भुगतान करने से इन्कार कर दिया। जांच के बाद सामने आया कि वह नंबर डीलर प्रिंसिपल का नहीं था और उसके साथ साइबर ठगी हुई है।
18 व 19 मई को उसी नंबर से रुपये मांगने के मैसेज मिले। इस बारे में उसने अपने जनरल मैनेजर से बात की और उन्होंने रुपये ट्रांसफर करने से मना कर दिया। बाद में पता चला कि उक्त नंबर डीलर प्रिंसिपल का नहीं था और उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।
जांच अधिकारी संजय कुमार के अनुसार डिफेंस कॉलोनी निवासी दिनेशा ने शिकायत में बताया कि वह हिसार बाईपास रोड स्थित एक कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत है। कंपनी द्वारा दिए गए एक मोबाइल नंबर का वह नियमित रूप से उपयोग करता है, जिसके माध्यम से वह डीलर, प्रिंसिपल और जनरल मैनेजर से संपर्क में रहता है। कंपनी के वित्तीय लेन-देन के दौरान ओटीपी जनरल मैनेजर के पास आता है, जिसके आधार पर बैंकिंग ट्रांजैक्शन किए जाते हैं।
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पीड़ित के अनुसार 15 मई को उसके व्हाट्सएप पर एक संदेश आया, जिसमें पूछा गया कि वह कहां है। जवाब देने के बाद संबंधित नंबर से बातचीत शुरू हुई। व्हाट्सएप प्रोफाइल पर प्रिंसिपल डीलर की पत्नी की फोटो लगी होने के कारण उसे विश्वास हो गया कि यह वही आधिकारिक नंबर है। इसी दौरान उस नंबर से 3 लाख रुपये भेजने का मैसेज आया, जिसे उसने वास्तविक समझकर ट्रांसफर कर दिया।
इसके बाद 18 और 19 मई को भी उसी नंबर से और रकम की मांग की गई। इस पर उसने कंपनी के जनरल मैनेजर से पुष्टि की जिन्होंने किसी भी तरह का भुगतान करने से इन्कार कर दिया। जांच के बाद सामने आया कि वह नंबर डीलर प्रिंसिपल का नहीं था और उसके साथ साइबर ठगी हुई है।
18 व 19 मई को उसी नंबर से रुपये मांगने के मैसेज मिले। इस बारे में उसने अपने जनरल मैनेजर से बात की और उन्होंने रुपये ट्रांसफर करने से मना कर दिया। बाद में पता चला कि उक्त नंबर डीलर प्रिंसिपल का नहीं था और उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।