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विभाजन की स्मृतियों से सीख लेकर एकता का संकल्प लें: अग्निहोत्री
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विभाजन विभीषिका के प्रत्यक्षदर्शियों को सम्मानित करते मुख्य वक्ता प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री
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हिसार। भारत के विभाजन की त्रासदी केवल इतिहास का अध्याय नहीं बल्कि इसकी स्मृतियां आज भी समाज को गहराई से प्रभावित करती हैं। विभाजन के अनुभवों से सीख लेकर ऐसा भारत बनाने का संकल्प लेना चाहिए जिसमें एकता और मानवीय संवेदना सर्वोपरि हों। यह बात हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता बाेलते हुए कही।
शुक्रवार को गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिविलाइजेशन स्टडीज ऑन माइग्रेशन एंड डिस्प्लेसमेंट की ओर से कार्यक्रम का आयोजन हुआ। अग्निहोत्री ने कहा कि विभाजन ने मानवता को गहरी पीड़ा दी। लाखों लोगों को घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा और बड़ी संख्या में लोगों ने प्राण गंवाए। उन्होंने स्थायी शांति, संवाद और सामाजिक एकता की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद करना केवल अतीत को स्मरण करना नहीं बल्कि उससे सीख लेकर वर्तमान को बेहतर और भविष्य को अधिक मानवीय बनाने का संकल्प है। डॉ. प्रताप सिंह ने सामाजिक एकता, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
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कार्यक्रम में विभाजन विभीषिका से संबंधित प्रदर्शनी लगाई गई। प्रो. अग्निहोत्री ने इसका अवलोकन किया और विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया।
विभाजन के प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ितों प्यारेलाल लाहोरिया, चंद्रभान गांधी, गोपाल मनचंदा, वीरा देवी, जीवन देवी, गोविंद राम, इंद्र कुमार, खालिन्दा राम, कैलाश कुमारी, ईश्वर देवी तथा जयरामदास चावला को सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने अनुभव साझा कर उस दौर की पीड़ा और संघर्ष को याद किया।
शुक्रवार को गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिविलाइजेशन स्टडीज ऑन माइग्रेशन एंड डिस्प्लेसमेंट की ओर से कार्यक्रम का आयोजन हुआ। अग्निहोत्री ने कहा कि विभाजन ने मानवता को गहरी पीड़ा दी। लाखों लोगों को घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा और बड़ी संख्या में लोगों ने प्राण गंवाए। उन्होंने स्थायी शांति, संवाद और सामाजिक एकता की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद करना केवल अतीत को स्मरण करना नहीं बल्कि उससे सीख लेकर वर्तमान को बेहतर और भविष्य को अधिक मानवीय बनाने का संकल्प है। डॉ. प्रताप सिंह ने सामाजिक एकता, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
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कार्यक्रम में विभाजन विभीषिका से संबंधित प्रदर्शनी लगाई गई। प्रो. अग्निहोत्री ने इसका अवलोकन किया और विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया।
विभाजन के प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ितों प्यारेलाल लाहोरिया, चंद्रभान गांधी, गोपाल मनचंदा, वीरा देवी, जीवन देवी, गोविंद राम, इंद्र कुमार, खालिन्दा राम, कैलाश कुमारी, ईश्वर देवी तथा जयरामदास चावला को सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने अनुभव साझा कर उस दौर की पीड़ा और संघर्ष को याद किया।