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Hisar News: पूर्व मंत्री डॉ. कमल गुप्ता के घर में लगी आग, ड्राइंग रूम जलकर राख
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हिसार में छत से आग पर पानी डालता व्यक्ति।
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हिसार। पूर्व मंत्री डॉ. कमल गुप्ता के मलिक चौक स्थित घर के ड्राइंग रूम में रविवार शाम करीब साढ़े चार बजे आग लग गई। कमरे से धुआं और लपटें उठती देख घर में अफरातफरी मच गई। घटना के समय डॉ. गुप्ता, उनकी पत्नी और मां घर में मौजूद थीं। गनीमत रही कि किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा लेकिन आग बुझाने तक ड्राइंग रूम में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। सूचना मिलने के करीब 10 मिनट बाद दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। करीब 15 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। आग एसी में शॉर्ट सर्किट से लगी। इससे पहले 6 मई को होटल डिजायर में भी एसी में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटना सामने आई थी।
डॉ. गुप्ता के मकान के ग्राउंड फ्लोर पर उनका अस्पताल और पार्टी कार्यालय है जबकि पहली मंजिल पर परिवार रहता है। ड्राइंग रूम में लगे विंडो एसी से अचानक धुआं उठने लगा। उस समय कमरे में कोई मौजूद नहीं था इसलिए शुरुआत में किसी को इसकी जानकारी नहीं मिली। कुछ ही देर में कमरे से लपटें उठने लगीं और धुआं अन्य कमरों तक पहुंच गया। धुआं बढ़ता देख डॉ. गुप्ता ने नीचे मौजूद स्टाफ को आवाज लगाकर आग लगने की सूचना दी। इसके बाद दो दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और करीब पांच बजे आग पर काबू पा लिया गया।
स्टाफ ने सबसे पहले बंद किए बिजली के स्विच
डॉ. गुप्ता के स्टाफ में शामिल अमित ने बताया कि वह ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद था। अचानक ऊपर से आग लगने की आवाज आई तो अन्य कर्मचारियों के साथ तुरंत पहली मंजिल पर पहुंचा। वहां चारों ओर धुआं फैला था। सबसे पहले बिजली के सभी स्विच बंद किए गए। मदद के लिए आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। डॉ. गुप्ता की मां और पत्नी को ड्राइंग रूम से सटे कमरे के छज्जे के रास्ते पड़ोसी मकान की छत पर सुरक्षित उतारा। इसके बाद मकान के पीछे सीढ़ी लगाकर डॉ. गुप्ता को नीचे उतारा गया।
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धुएं में एक मिनट रुकना भी मुश्किल था
डॉ. कमल गुप्ता ने बताया कि वह घटना से करीब आधा घंटा पहले ही सोए थे। पत्नी ने आग लगने का शोर मचाया तो वह कमरे से बाहर आए। पूरे घर में धुआं फैल चुका था और ड्राइंग रूम में लपटें उठ रही थीं। धुआं इतना अधिक था कि वहां एक मिनट भी रुकना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कहा कि भगवान का शुक्र है कि आग घर के अन्य हिस्सों में नहीं फैली और समय रहते काबू पा लिया गया। घटना के बाद मेयर प्रवीण पोपली और भाजपा कार्यकर्ता भी डॉ. गुप्ता का हालचाल जानने पहुंचे।
एसी में आग लगने के प्रमुख कारण
एसी मैकेनिक गुरचरण के अनुसार ओवरलोडेड या खराब वायरिंग से शॉर्ट सर्किट हो सकता है। पतली या घटिया गुणवत्ता वाली वायरिंग गर्म होकर आग पकड़ सकती है। प्लग, सॉकेट या एमसीबी में ढीले कनेक्शन से स्पार्किंग होती है। लंबे समय तक लगातार एसी चलाने से कंप्रेसर और वायरिंग अधिक गर्म हो जाती है।
लोकल स्टेबलाइजर या एक्सटेंशन बोर्ड भी आग का कारण बन सकते हैं। धूल जमने से कूलिंग कॉइल और मोटर पर दबाव बढ़ता है। फैन मोटर जाम होने पर ओवरहीटिंग हो सकती है। लो वोल्टेज और बार-बार बिजली के उतार-चढ़ाव से भी खतरा बढ़ जाता है।
एसी में आग लगने से कैसे बचें
एसी के लिए अलग एमसीबी और उचित वायरिंग लगवाएं।
केवल आईएसआई मार्क वाले तार, प्लग और स्टेबलाइजर का उपयोग करें।
एसी को लगातार लंबे समय तक चलाने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक दें।
गर्मी शुरू होने से पहले हर साल सर्विसिंग करवाएं।
जलने की गंध, चिंगारी या असामान्य आवाज आने पर तुरंत एसी बंद करें।
एक्सटेंशन बोर्ड की बजाय सीधे पावर सॉकेट का उपयोग करें।
रात में एसी चलाने के लिए टाइमर मोड का इस्तेमाल करें।
आउटर यूनिट पर तीन-चार दिन में पानी डालते रहें।
-- --
आग लग जाए तो क्या करें
सबसे पहले मेन बिजली सप्लाई बंद करें।
बिजली चालू होने पर पानी डालने की गलती न करें।
आग बढ़ने पर तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दें।
डॉ. गुप्ता के मकान के ग्राउंड फ्लोर पर उनका अस्पताल और पार्टी कार्यालय है जबकि पहली मंजिल पर परिवार रहता है। ड्राइंग रूम में लगे विंडो एसी से अचानक धुआं उठने लगा। उस समय कमरे में कोई मौजूद नहीं था इसलिए शुरुआत में किसी को इसकी जानकारी नहीं मिली। कुछ ही देर में कमरे से लपटें उठने लगीं और धुआं अन्य कमरों तक पहुंच गया। धुआं बढ़ता देख डॉ. गुप्ता ने नीचे मौजूद स्टाफ को आवाज लगाकर आग लगने की सूचना दी। इसके बाद दो दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और करीब पांच बजे आग पर काबू पा लिया गया।
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स्टाफ ने सबसे पहले बंद किए बिजली के स्विच
डॉ. गुप्ता के स्टाफ में शामिल अमित ने बताया कि वह ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद था। अचानक ऊपर से आग लगने की आवाज आई तो अन्य कर्मचारियों के साथ तुरंत पहली मंजिल पर पहुंचा। वहां चारों ओर धुआं फैला था। सबसे पहले बिजली के सभी स्विच बंद किए गए। मदद के लिए आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। डॉ. गुप्ता की मां और पत्नी को ड्राइंग रूम से सटे कमरे के छज्जे के रास्ते पड़ोसी मकान की छत पर सुरक्षित उतारा। इसके बाद मकान के पीछे सीढ़ी लगाकर डॉ. गुप्ता को नीचे उतारा गया।
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धुएं में एक मिनट रुकना भी मुश्किल था
डॉ. कमल गुप्ता ने बताया कि वह घटना से करीब आधा घंटा पहले ही सोए थे। पत्नी ने आग लगने का शोर मचाया तो वह कमरे से बाहर आए। पूरे घर में धुआं फैल चुका था और ड्राइंग रूम में लपटें उठ रही थीं। धुआं इतना अधिक था कि वहां एक मिनट भी रुकना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कहा कि भगवान का शुक्र है कि आग घर के अन्य हिस्सों में नहीं फैली और समय रहते काबू पा लिया गया। घटना के बाद मेयर प्रवीण पोपली और भाजपा कार्यकर्ता भी डॉ. गुप्ता का हालचाल जानने पहुंचे।
एसी में आग लगने के प्रमुख कारण
एसी मैकेनिक गुरचरण के अनुसार ओवरलोडेड या खराब वायरिंग से शॉर्ट सर्किट हो सकता है। पतली या घटिया गुणवत्ता वाली वायरिंग गर्म होकर आग पकड़ सकती है। प्लग, सॉकेट या एमसीबी में ढीले कनेक्शन से स्पार्किंग होती है। लंबे समय तक लगातार एसी चलाने से कंप्रेसर और वायरिंग अधिक गर्म हो जाती है।
लोकल स्टेबलाइजर या एक्सटेंशन बोर्ड भी आग का कारण बन सकते हैं। धूल जमने से कूलिंग कॉइल और मोटर पर दबाव बढ़ता है। फैन मोटर जाम होने पर ओवरहीटिंग हो सकती है। लो वोल्टेज और बार-बार बिजली के उतार-चढ़ाव से भी खतरा बढ़ जाता है।
एसी में आग लगने से कैसे बचें
एसी के लिए अलग एमसीबी और उचित वायरिंग लगवाएं।
केवल आईएसआई मार्क वाले तार, प्लग और स्टेबलाइजर का उपयोग करें।
एसी को लगातार लंबे समय तक चलाने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक दें।
गर्मी शुरू होने से पहले हर साल सर्विसिंग करवाएं।
जलने की गंध, चिंगारी या असामान्य आवाज आने पर तुरंत एसी बंद करें।
एक्सटेंशन बोर्ड की बजाय सीधे पावर सॉकेट का उपयोग करें।
रात में एसी चलाने के लिए टाइमर मोड का इस्तेमाल करें।
आउटर यूनिट पर तीन-चार दिन में पानी डालते रहें।
आग लग जाए तो क्या करें
सबसे पहले मेन बिजली सप्लाई बंद करें।
बिजली चालू होने पर पानी डालने की गलती न करें।
आग बढ़ने पर तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दें।