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Hisar News: एचएयू की मूंग की उन्नत किस्मों के लिए उत्तराखंड की कंपनी से समझौता

संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Fri, 05 Jun 2026 01:14 AM IST
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HAU signs MoU with Uttarakhand company for improved mung bean varieties
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हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) की ओर से विकसित मूंग की उन्नत किस्मों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय ने तकनीकी व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड की एक कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत अब मूंग की दो किस्मों एमएच 1142 और एमएच 1762 का बीज उत्पादन कर कंपनी किसानों तक पहुंचाएगी जिससे उन्हें प्रमाणित और विश्वसनीय बीज उपलब्ध हो सकेगा।

मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. रमेश यादव ने बताया कि समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग और हेमट्रिक्स एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड की ओर से जोनल मैनेजर बीएन मिश्रा ने हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के तहत कंपनी विश्वविद्यालय को लाइसेंस फीस अदा करेगी जिसके बदले उसे बीज उत्पादन और विपणन का अधिकार प्राप्त होगा।
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डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि खरीफ मौसम में बोई जाने वाली मूंग की किस्म एमएच 1142 को उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम के लिए अनुमोदित किया गया है। इसकी फलियां काले रंग की होती हैं जबकि बीज मध्यम आकार के हरे और चमकीले होते हैं।
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पौधा कम फैलावदार, सीधा और सीमित बढ़वार वाला होने के कारण इसकी कटाई आसान होती है। यह किस्म विभिन्न राज्यों में 63 से 70 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और इसकी औसत पैदावार भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार 12 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक आंकी गई है। वहीं मूंग की दूसरी किस्म एमएच 1762 पीला मोज़ैक और अन्य रोगों के प्रति प्रतिरोधी है।
यह किस्म बसंत एवं ग्रीष्मकाल में उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में बिजाई के लिए अनुमोदित की गई है। यह लगभग 60 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसके दाने चमकीले हरे रंग के और मध्यम आकार के होते हैं। यह किस्म प्रचलित किस्मों की तुलना में 10 से 15 प्रतिशत अधिक पैदावार देने में सक्षम है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. वीरेन्द्र मोर, डॉ. योगेश जिंदल, डॉ. अनुराग, डॉ. रविका और डॉ. पवन उपस्थित रहे।
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