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Hisar News: तीन महिलाओं व एक पुरुष का कंकाल डीएनए के लिए चयनित
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Fri, 05 Jun 2026 01:11 AM IST
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राखीगढ़ी की साइट नंबर 7 पर कंकाल को निकालती एक्सपर्ट टीम।
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बास (हांसी)। विश्व प्रसिद्ध हड़प्पा कालीन पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी के साइट-7 पर मिले मानव कंकालों को सुरक्षित बाहर निकालने का कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। पुरातत्वविदों की टीम इन हजारों वर्ष पुराने अवशेषों को अत्यंत सावधानी के साथ मिट्टी से अलग कर संरक्षित करने में जुटी हुई है। उत्खनन के दौरान अब तक मिले 10 मानव कंकालों में से तीन महिलाओं और एक पुरुष के कंकाल को डीएनए सहित अन्य वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए चयनित किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार कंकालों को निकालने की प्रक्रिया सामान्य खोदाई से कहीं अधिक जटिल होती है। प्रत्येक हड्डी और उससे जुड़े पुरातात्विक साक्ष्यों को बिना नुकसान पहुंचाए बाहर निकालने के लिए परत-दर-परत मिट्टी हटाई जा रही है। कई कंकाल लंबे समय तक खेती होने के कारण कमजोर अवस्था में मिले हैं, जिससे संरक्षण कार्य और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
अब उत्खनन स्थल पर मिले कंकालों के साथ बड़ी संख्या में मिट्टी के बर्तन और अन्य अवशेष भी प्राप्त हुए हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इनसे हड़प्पा कालीन समाज की अंतिम संस्कार परंपराओं और सामाजिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। कंकालों के वैज्ञानिक परीक्षण के बाद उस समय के लोगों की आनुवंशिक संरचना, खानपान, स्वास्थ्य और जीवनशैली को लेकर भी नए तथ्य मिलने की उम्मीद है।
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पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार चयनित कंकालों को सुरक्षित निकालने के लिए मिट्टी की सतह सहित कंकाल को निकाला जाएगा। जांच के लिए कोलकाता में भेजा जाएगा। डीएनए जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राखीगढ़ी सभ्यता के लोगों के बारे में और अधिक प्रमाणिक जानकारी मिलने की संभावना है। संवाद
एक सप्ताह का और लग सकता है समय
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की उत्खनन शाखा के अधीक्षक पुरातत्वविद् मनोज सक्सेना ने बताया कि डीएनए जांच के लिए तीन महिलाओं और एक पुरुष के कंकाल का चयन किया गया है। कंकालों को सुरक्षित निकालने और संरक्षित करने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से चल रही है। उन्होंने बताया कि निष्कर्षण का कार्य पूरा होने में अभी करीब एक सप्ताह का समय और लग सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार कंकालों को निकालने की प्रक्रिया सामान्य खोदाई से कहीं अधिक जटिल होती है। प्रत्येक हड्डी और उससे जुड़े पुरातात्विक साक्ष्यों को बिना नुकसान पहुंचाए बाहर निकालने के लिए परत-दर-परत मिट्टी हटाई जा रही है। कई कंकाल लंबे समय तक खेती होने के कारण कमजोर अवस्था में मिले हैं, जिससे संरक्षण कार्य और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
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अब उत्खनन स्थल पर मिले कंकालों के साथ बड़ी संख्या में मिट्टी के बर्तन और अन्य अवशेष भी प्राप्त हुए हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इनसे हड़प्पा कालीन समाज की अंतिम संस्कार परंपराओं और सामाजिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। कंकालों के वैज्ञानिक परीक्षण के बाद उस समय के लोगों की आनुवंशिक संरचना, खानपान, स्वास्थ्य और जीवनशैली को लेकर भी नए तथ्य मिलने की उम्मीद है।
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एक सप्ताह का और लग सकता है समय
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की उत्खनन शाखा के अधीक्षक पुरातत्वविद् मनोज सक्सेना ने बताया कि डीएनए जांच के लिए तीन महिलाओं और एक पुरुष के कंकाल का चयन किया गया है। कंकालों को सुरक्षित निकालने और संरक्षित करने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से चल रही है। उन्होंने बताया कि निष्कर्षण का कार्य पूरा होने में अभी करीब एक सप्ताह का समय और लग सकता है।