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हिसार: अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित होंगे मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल और पैरा एथलीट एकता भ्याण
Tue, 18 Aug 2026 04:26 PM IST
मयूर शर्मा
संवाद न्यूज, हिसार
संवाद न्यूज, हिसार
Published by: मयूर शर्मा
Updated Tue, 18 Aug 2026 04:26 PM IST
सार
दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों में हालिया प्रदर्शन ने भी चार चांद लगाए हैं। खासकर ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में नरेंद्र बेरवाल ने 90+ किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। वहीं, सड़क हादसे में पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद एकता ने डिस्कस थ्रो में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है।
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अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित होंगे हिसार के मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल और पैरा एथलीट एकता भ्याण
- फोटो : संवाद
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विस्तार
खेल जगत में हिसार की पहचान को एक बार फिर बड़ी उपलब्धि मिली है। जिले के दो अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों पैरा एथलीट एकता भ्याण और मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल का नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए चयनित खिलाड़ियों में शामिल किया गया है। दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों में हालिया प्रदर्शन ने भी चार चांद लगाए हैं। खासकर ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में नरेंद्र बेरवाल ने 90+ किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। भारत के लिए यह राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजी का ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा, जिसमें भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 10 पदक जीते। इनमें सात स्वर्ण और तीन रजत शामिल रहे। नरेंद्र का रजत पदक इनमें शामिल रहा।
हादसे के बाद एकता ने खेलों में बनाई पहचान
हिसार में रोजगार विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के तौर पर पदस्थ एकता भ्याण की कहानी संघर्ष और हौसले की मिसाल है। सड़क हादसे में पैरों से दिव्यांग होने के बाद उन्होंने खेलों को अपनी ताकत बनाया और क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। एकता ने 2018 में जकार्ता एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 2023 में एशियन पैरा गेम्स और वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किए। वर्ष 2024 में जापान के कोबे में हुई वर्ल्ड पैरा
एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने एफ-51 श्रेणी के क्लब थ्रो में 20.12 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। हाल में दिल्ली में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी एकता ने क्लब थ्रो में 19.80 मीटर के प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता एकता राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक कई पदक जीत चुकी हैं और उन्हें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने दिव्यांग रोल मॉडल के रूप में भी चुना है।
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सोरखी के नरेंद्र ने रिंग में लगातार बढ़ाया कद
सोरखी गांव के नरेंद्र बेरवाल ने भी मुक्केबाजी में लगातार अपनी पहचान मजबूत की है। 92 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग के इस मुक्केबाज ने एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता है। इससे पहले वह यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत और यूथ एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके हैं। 2025 के नेशनल गेम्स में भी नरेंद्र ने स्वर्ण पदक हासिल किया था। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में नरेंद्र ने अपने प्रदर्शन से एक बार फिर खुद को साबित किया। क्वार्टर फाइनल जीतकर पदक पक्का करने के बाद उन्होंने सेमीफाइनल में जगह बनाई और फाइनल तक पहुंचे। खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड के डेमर थॉमस से 0-5 से हार के बावजूद नरेंद्र ने रजत पदक हासिल किया।
अर्जुन अवॉर्ड से हिसार की खेल पहचान होगी मजबूत
एकता और नरेंद्र को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना जाना हिसार के खेल इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दोनों खिलाड़ियों ने अलग-अलग परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया है। एकता पैरा खेलों में दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी हैं, वहीं नरेंद्र ने मुक्केबाजी के हैवीवेट वर्ग में भारत की उम्मीदों को मजबूत किया है। दोनों खिलाड़ियों के नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए अनुशंसित 24 खिलाड़ियों की सूची में शामिल किए गए थे। अब इन दोनों को अर्जुन सम्मान मिलने से हिसार की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिलेगी।
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हादसे के बाद एकता ने खेलों में बनाई पहचान
हिसार में रोजगार विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के तौर पर पदस्थ एकता भ्याण की कहानी संघर्ष और हौसले की मिसाल है। सड़क हादसे में पैरों से दिव्यांग होने के बाद उन्होंने खेलों को अपनी ताकत बनाया और क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। एकता ने 2018 में जकार्ता एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 2023 में एशियन पैरा गेम्स और वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किए। वर्ष 2024 में जापान के कोबे में हुई वर्ल्ड पैरा
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एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने एफ-51 श्रेणी के क्लब थ्रो में 20.12 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। हाल में दिल्ली में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी एकता ने क्लब थ्रो में 19.80 मीटर के प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता एकता राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक कई पदक जीत चुकी हैं और उन्हें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने दिव्यांग रोल मॉडल के रूप में भी चुना है।
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सोरखी के नरेंद्र ने रिंग में लगातार बढ़ाया कद
सोरखी गांव के नरेंद्र बेरवाल ने भी मुक्केबाजी में लगातार अपनी पहचान मजबूत की है। 92 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग के इस मुक्केबाज ने एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता है। इससे पहले वह यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत और यूथ एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके हैं। 2025 के नेशनल गेम्स में भी नरेंद्र ने स्वर्ण पदक हासिल किया था। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में नरेंद्र ने अपने प्रदर्शन से एक बार फिर खुद को साबित किया। क्वार्टर फाइनल जीतकर पदक पक्का करने के बाद उन्होंने सेमीफाइनल में जगह बनाई और फाइनल तक पहुंचे। खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड के डेमर थॉमस से 0-5 से हार के बावजूद नरेंद्र ने रजत पदक हासिल किया।
अर्जुन अवॉर्ड से हिसार की खेल पहचान होगी मजबूत
एकता और नरेंद्र को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना जाना हिसार के खेल इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दोनों खिलाड़ियों ने अलग-अलग परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया है। एकता पैरा खेलों में दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी हैं, वहीं नरेंद्र ने मुक्केबाजी के हैवीवेट वर्ग में भारत की उम्मीदों को मजबूत किया है। दोनों खिलाड़ियों के नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए अनुशंसित 24 खिलाड़ियों की सूची में शामिल किए गए थे। अब इन दोनों को अर्जुन सम्मान मिलने से हिसार की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिलेगी।