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Hisar News: मां चंडके देवी मंदिर में नक्काशीदार मुख्य द्वार का लोकार्पण
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हिसार के प्राचीन मां चंडके देवी मंदिर के नक्काशीयुक्त मुख्य द्वार के लोकार्पण के दौरान मौजूद श्
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हिसार। गांव पाबड़ा स्थित प्राचीन मां चंडके देवी मंदिर में नक्काशीदार मुख्य द्वार का लोकार्पण मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बुधवार को किया गया। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण स्थित कुंड में विधि-विधान के साथ हवन संपन्न हुआ।
हवन के उपरांत महंत जयदेवानंद गिरी महाराज, सरपंच दलबीर, पूर्व सरपंच प्रदीप राजा, पूर्व सरपंच कलीराम, सरपंच हरदीप (किनाला), रवि सरपंच (फरीदपुर), गोशाला प्रधान शमशेर कुंडू सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने मुख्य द्वार का लोकार्पण किया। इसके साथ ही गुलाब कंडूल, कीर्तिरतन शर्मा, जयप्रकाश गोयल और राजेश बंसल की ओर से पुनर्निर्मित मां का दरबार, शेड, रसोई और पार्किंग स्थल का भी लोकार्पण किया गया।
मां चंडके देवी सेवा समिति के सदस्यों ने श्रद्धालुओं को 19 से 27 जनवरी तक आयोजित होने वाले नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने का आमंत्रण दिया। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं में सात्विक प्रसाद वितरित किया गया।
समिति के प्रधान जगदीश तायल ने बताया कि चार वर्ष पूर्व मकर संक्रांति पर मुख्य द्वार के निर्माण कार्य की शुरुआत की गई थी और चार वर्ष बाद इसी पर्व पर इसका लोकार्पण किया गया। उन्होंने कहा कि नक्काशीदार मुख्य द्वार के निर्माण से मंदिर की भव्यता और आस्था का वातावरण और सुदृढ़ हुआ है।
तायल ने बताया कि नौ दिवसीय आयोजन के दौरान सहस्त्र चंडी पाठ और शिव महारुद्राभिषेक किया जाएगा। इस अवधि में निरंतर अटूट लंगर की व्यवस्था रहेगी। प्रतिदिन 108 ब्राह्मणों द्वारा सुबह आठ से 11 बजे तक और शाम चार से सात बजे तक सहस्त्र चंडी पाठ एवं महायज्ञ होगा।
रोज शाम 7:15 से 8:15 बजे तक हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, संतोषी माता और शनि देव का जाप किया जाएगा। इसके बाद रात 8:30 बजे से सुबह पांच बजे तक शिव महारुद्राभिषेक होगा। आयोजन का समापन 27 जनवरी को सुबह 10 बजे पूर्ण आहुति के साथ किया जाएगा।
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हवन के उपरांत महंत जयदेवानंद गिरी महाराज, सरपंच दलबीर, पूर्व सरपंच प्रदीप राजा, पूर्व सरपंच कलीराम, सरपंच हरदीप (किनाला), रवि सरपंच (फरीदपुर), गोशाला प्रधान शमशेर कुंडू सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने मुख्य द्वार का लोकार्पण किया। इसके साथ ही गुलाब कंडूल, कीर्तिरतन शर्मा, जयप्रकाश गोयल और राजेश बंसल की ओर से पुनर्निर्मित मां का दरबार, शेड, रसोई और पार्किंग स्थल का भी लोकार्पण किया गया।
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मां चंडके देवी सेवा समिति के सदस्यों ने श्रद्धालुओं को 19 से 27 जनवरी तक आयोजित होने वाले नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने का आमंत्रण दिया। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं में सात्विक प्रसाद वितरित किया गया।
समिति के प्रधान जगदीश तायल ने बताया कि चार वर्ष पूर्व मकर संक्रांति पर मुख्य द्वार के निर्माण कार्य की शुरुआत की गई थी और चार वर्ष बाद इसी पर्व पर इसका लोकार्पण किया गया। उन्होंने कहा कि नक्काशीदार मुख्य द्वार के निर्माण से मंदिर की भव्यता और आस्था का वातावरण और सुदृढ़ हुआ है।
तायल ने बताया कि नौ दिवसीय आयोजन के दौरान सहस्त्र चंडी पाठ और शिव महारुद्राभिषेक किया जाएगा। इस अवधि में निरंतर अटूट लंगर की व्यवस्था रहेगी। प्रतिदिन 108 ब्राह्मणों द्वारा सुबह आठ से 11 बजे तक और शाम चार से सात बजे तक सहस्त्र चंडी पाठ एवं महायज्ञ होगा।
रोज शाम 7:15 से 8:15 बजे तक हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, संतोषी माता और शनि देव का जाप किया जाएगा। इसके बाद रात 8:30 बजे से सुबह पांच बजे तक शिव महारुद्राभिषेक होगा। आयोजन का समापन 27 जनवरी को सुबह 10 बजे पूर्ण आहुति के साथ किया जाएगा।