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हिसार को-ऑपरेटिव बैंक में करोड़ों का घोटाला: संविदा कर्मियों का वेतन काटा; सिफारिश पर की कर्मचारियों की भर्ती
आशीष वर्मा, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Thu, 15 Jan 2026 07:02 AM IST
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सार
संविदा कर्मचारियों ने सीएम विंडो पर शिकायत कर बैंक व कंपनी पर आठ गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के मुताबिक बैंक में संविदा कर्मचारियों को डीसी रेट (सर्किल रेट) पर वेतन दिया जाना था पर बैंक के महाप्रबंधक ने एजेंसी के साथ मिलकर कम वेतन दिया।
घोटाला। सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिसार सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (डीसीसीबी) में संविदा पर रखे गए कर्मचारियों के वेतन में अवैध कटौती कर 2.20 करोड़ रुपये का घोटाला किए जाने का मामला सामने आया है। इसके अलावा भर्ती नियमों की अनदेखी कर बिना कारण 31 लोगों निकाले गए। उनकी जगह सिफारिश पर 48 लोगों को रखा गया। सहकारिता विभाग की विजिलेंस जांच में इसका खुलासा हुआ है।
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जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार बैंक से मिलीभगत कर संविदा पर कर्मचारी उपलब्ध करवाने वाली एजेंसी मैसर्स बालाजी सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड ने साल 2010 से 2020 तक कर्मचारियों के वेतन में कटौती की। इसके बाद साल 2020 में 31 अनुबंध कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। उनकी जगह 48 कर्मचारी राज्य सरकार के राजनेताओं व वरिष्ठ अधिकारियों की सिफारिश पर रख लिए गए। समिति ने अब बैंक को कंपनी से 2.20 करोड़ रुपये वसूलने और इसे कर्मचारियों को लौटाने की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट के आधार पर हरको बैंक मुख्यालय ने भी हिसार बैंक के महाप्रबंधक (जीएम) से स्पष्टीकरण मांगा है।
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दरअसल, संविदा कर्मचारियों ने सीएम विंडो पर शिकायत कर बैंक व कंपनी पर आठ गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के मुताबिक बैंक में संविदा कर्मचारियों को डीसी रेट (सर्किल रेट) पर वेतन दिया जाना था पर बैंक के महाप्रबंधक ने एजेंसी के साथ मिलकर कम वेतन दिया। ऐसा करके हर महीने छह लाख रुपये का गबन किया गया। शिकायत के आधार पर विजिलेंस ने जांच की तो आरोप सही पाए गए। वेतन कटौती के लिए एजेंसी ने जो दलीलें दीं, वे निराधार पाई गईं। जांच में साबित हुआ है कि 31 कर्मचारियों की अवैध बर्खास्तगी जानबूझकर और बिना नोटिस दिए की गई। आदेशों के बावजूद इन कर्मचारियों की बहाली नहीं की गई। उनकी जगह 48 कर्मचारी हरियाणा सरकार के प्रमुख राजनेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों की सिफारिश पर विज्ञापन/पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का पालन किए बिना रखे गए। जांच रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि गहन जांच से उच्च अधिकारियों को परेशानी हो सकती है।
जांच समिति ने यह सिफारिश की
- डीसीसीबी को 2.20 करोड़ रुपये वसूलने होंगे और आउटसोर्स कर्मचारियों की काटी गई राशि वापस करने होंगे। यदि शिकायतकर्ता और ठेकेदार दोनों की ओर से दायर अदालती मामले वसूली में बाधा बन रहे हैं तो उन्हें शीघ्रता से निपटाया जाना चाहिए। हरको बैंक के सक्षम अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे।
- डीसीसीबी हिसार को भर्ती में भाई-भतीजावाद को समाप्त करने और पारदर्शी सार्वजनिक विज्ञापन के माध्यम से योग्यता के आधार पर योग्य कर्मचारी नियुक्ति करने होंगे।
- उन सभी महाप्रबंधकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने चाहिए जिनके कार्यकाल में 31 कर्मचारियों को बिना किसी कारण के हटाया गया। रजिस्ट्रार सहकारी समितियां के बावजूद उन्हें वापस नहीं लिया गया।