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Chandigarh-Haryana News: 12 करोड़ रुपये से अधिक का भ्रष्टाचार, फरीदाबाद नगर निगम के दो अधिकारियों को झटका
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- हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए किया अग्रिम जमानत से इन्कार
- लोक सेवक का भ्रष्टाचार किसी व्यक्ति के विरूद्ध नहीं बल्कि समाज के प्रति अपराध : हाईकोर्ट
चंडीगढ़। 12 करोड़ रुपये से अधिक के भ्रष्टाचार के आरोप में दर्ज मामले में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने फरीदाबाद नगर निगम के दो अधिकारियों को झटका देते हुए अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने कहा कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, सरकारी रिकॉर्ड में जालसाजी और सार्वजनिक धन के गबन जैसे गंभीर आरोपों वाले मामलों में गिरफ्तारी से पहले जमानत पर अत्यधिक सतर्क दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
जस्टिस सुमित गोयल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप स्वभाव से ही गंभीर और संगीन हैं। किसी लोक सेवक की ओर से किया गया भ्रष्टाचार केवल किसी व्यक्ति के विरुद्ध अपराध नहीं होता बल्कि यह पूरे समाज के खिलाफ अपराध है जो प्रशासन में जनता के विश्वास को कमजोर करता है।
अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराध सार्वजनिक प्रशासन की जड़ों पर प्रहार करते हैं और सरकारी संस्थानों में जनता के भरोसे को क्षीण करते हैं।
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड के अवलोकन से लोक सेवकों की ओर से आधिकारिक पद का दुरुपयोग, सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी, आपराधिक साजिश और 12 करोड़ रुपये से अधिक की सार्वजनिक राशि के गबन के गंभीर आरोप हैं।
कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि मामला केवल दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है इसलिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि कई एफआईआर दर्ज होने और देरी से मामला सामने आने की दलील पर इस स्तर पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आरोपों की गंभीरता, याचिकाकर्ताओं की भूमिका, जांच की वर्तमान अवस्था और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
यह मामला फरीदाबाद एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार वर्ष 2018 में इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने से जुड़े 13 फर्जी वर्क ऑर्डर एक ठेकेदार के नाम पर तैयार किए गए। लगभग 72.75 लाख के मूल अनुमान को कुछ ही समय में बढ़ाकर 12.18 करोड़ से अधिक कर दिया गया। न तो कोई वैध वर्क ऑर्डर जारी हुआ और न ही कोई वास्तविक कार्य कराया गया।
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- लोक सेवक का भ्रष्टाचार किसी व्यक्ति के विरूद्ध नहीं बल्कि समाज के प्रति अपराध : हाईकोर्ट
चंडीगढ़। 12 करोड़ रुपये से अधिक के भ्रष्टाचार के आरोप में दर्ज मामले में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने फरीदाबाद नगर निगम के दो अधिकारियों को झटका देते हुए अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने कहा कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, सरकारी रिकॉर्ड में जालसाजी और सार्वजनिक धन के गबन जैसे गंभीर आरोपों वाले मामलों में गिरफ्तारी से पहले जमानत पर अत्यधिक सतर्क दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
जस्टिस सुमित गोयल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप स्वभाव से ही गंभीर और संगीन हैं। किसी लोक सेवक की ओर से किया गया भ्रष्टाचार केवल किसी व्यक्ति के विरुद्ध अपराध नहीं होता बल्कि यह पूरे समाज के खिलाफ अपराध है जो प्रशासन में जनता के विश्वास को कमजोर करता है।
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अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराध सार्वजनिक प्रशासन की जड़ों पर प्रहार करते हैं और सरकारी संस्थानों में जनता के भरोसे को क्षीण करते हैं।
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड के अवलोकन से लोक सेवकों की ओर से आधिकारिक पद का दुरुपयोग, सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी, आपराधिक साजिश और 12 करोड़ रुपये से अधिक की सार्वजनिक राशि के गबन के गंभीर आरोप हैं।
कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि मामला केवल दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है इसलिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि कई एफआईआर दर्ज होने और देरी से मामला सामने आने की दलील पर इस स्तर पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आरोपों की गंभीरता, याचिकाकर्ताओं की भूमिका, जांच की वर्तमान अवस्था और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
यह मामला फरीदाबाद एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार वर्ष 2018 में इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने से जुड़े 13 फर्जी वर्क ऑर्डर एक ठेकेदार के नाम पर तैयार किए गए। लगभग 72.75 लाख के मूल अनुमान को कुछ ही समय में बढ़ाकर 12.18 करोड़ से अधिक कर दिया गया। न तो कोई वैध वर्क ऑर्डर जारी हुआ और न ही कोई वास्तविक कार्य कराया गया।
