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Chandigarh-Haryana News: गुरुग्राम टावर ऑफ जस्टिस के निर्माण में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को नोटिस
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-15 मई तक निर्माण पूरा न हुआ तो मुख्य सचिव पर कार्रवाई की चेतावनी
-बार-बार मौका देने के बावजूद निर्माण पूरा न होने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। गुरुग्राम में बन रहे बहुप्रतीक्षित टावर ऑफ जस्टिस प्रोजेक्ट में लगातार हो रही देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मामले का संज्ञान लिया है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 15 मई तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो मुख्य सचिव के खिलाफ व्यक्तिगत कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण परियोजना में वर्षों की देरी गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बार-बार समय दिए जाने के बावजूद काम पूरा न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। गुरुग्राम में टावर ऑफ जस्टिस परियोजना की शुरुआत कई साल पहले बड़े दावे के साथ की गई थी। इस परियोजना के तहत करीब 7 एकड़ जमीन पर आधुनिक सुविधाओं से लैस विशाल न्यायिक परिसर बनाया जाना था जिसमें लगभग 55 कोर्टरूम और अत्याधुनिक सुविधाएं प्रस्तावित थीं। इसकी लागत करीब 133 करोड़ रुपये बताई गई थी और इसे उत्तर भारत के सबसे बड़े न्यायिक परिसरों में शामिल माना गया था। योजना के अनुसार यह प्रोजेक्ट 3 वर्षों में पूरा होना था लेकिन अब तक निर्माण अधूरा है। हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि तय समय सीमा तक काम पूरा नहीं होने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और मुख्य सचिव के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर भी इस निर्माण में देरी पर सवाल उठाए गए लेकिन इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं हुआ। ऐसे में अब न्यायिक स्तर पर इस मामले का संज्ञान लेना आवश्यक हो गया है।
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-बार-बार मौका देने के बावजूद निर्माण पूरा न होने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। गुरुग्राम में बन रहे बहुप्रतीक्षित टावर ऑफ जस्टिस प्रोजेक्ट में लगातार हो रही देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मामले का संज्ञान लिया है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 15 मई तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो मुख्य सचिव के खिलाफ व्यक्तिगत कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण परियोजना में वर्षों की देरी गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बार-बार समय दिए जाने के बावजूद काम पूरा न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। गुरुग्राम में टावर ऑफ जस्टिस परियोजना की शुरुआत कई साल पहले बड़े दावे के साथ की गई थी। इस परियोजना के तहत करीब 7 एकड़ जमीन पर आधुनिक सुविधाओं से लैस विशाल न्यायिक परिसर बनाया जाना था जिसमें लगभग 55 कोर्टरूम और अत्याधुनिक सुविधाएं प्रस्तावित थीं। इसकी लागत करीब 133 करोड़ रुपये बताई गई थी और इसे उत्तर भारत के सबसे बड़े न्यायिक परिसरों में शामिल माना गया था। योजना के अनुसार यह प्रोजेक्ट 3 वर्षों में पूरा होना था लेकिन अब तक निर्माण अधूरा है। हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि तय समय सीमा तक काम पूरा नहीं होने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और मुख्य सचिव के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर भी इस निर्माण में देरी पर सवाल उठाए गए लेकिन इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं हुआ। ऐसे में अब न्यायिक स्तर पर इस मामले का संज्ञान लेना आवश्यक हो गया है।
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