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हरियाणा: अर्जुन अवॉर्ड के लिए नरेंद्र बेरवाल का चयन, खुशी से झूम उठा परिवार, हांसी में जश्न का माहौल
Tue, 18 Aug 2026 10:25 PM IST
मयूर शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Published by: मयूर शर्मा
Updated Tue, 18 Aug 2026 10:25 PM IST
सार
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में 90 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले नरेंद्र बेरवाल ने अपने शानदार प्रदर्शन से एक बार फिर खुद को साबित किया। अर्जुन अवॉर्ड के लिए उनका चयन हांसी के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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खिलाड़ी नरेंद्र बेरवाल अपनी मां के साथ खुशी जाहिर करते हुए
- फोटो : संवाद
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विस्तार
खेल जगत में हांसी की पहचान को एक बार फिर बड़ी उपलब्धि मिली है। जिले के सोरखी गांव निवासी अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल का नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए चयनित खिलाड़ियों में शामिल होने पर गांव से लेकर पूरे हांसी जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों, ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया और नरेंद्र की उपलब्धि पर गर्व जताया।
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में 90 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले नरेंद्र बेरवाल ने अपने शानदार प्रदर्शन से एक बार फिर खुद को साबित किया। अर्जुन अवॉर्ड के लिए उनका चयन हांसी के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
खास बात यह है कि नरेंद्र बेरवाल ने जिस भी बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, वहां उन्होंने देश के लिए पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। एशियन गेम्स में कांस्य पदक, यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत, यूथ एशियन चैंपियनशिप में कांस्य और 2025 के नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक उनके शानदार सफर की गवाही देते हैं।
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16 साल की मेहनत का नतीजा
नरेंद्र बेरवाल ने वर्ष 2009 में दूध, दही और हलवे जैसे पौष्टिक आहार के साथ बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। मैट्रिक के बाद उन्होंने पूरी तरह मुक्केबाजी पर ध्यान केंद्रित कर लिया। भिवानी बॉक्सिंग अकादमी में कोच देवराज के मार्गदर्शन में उन्होंने कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
नरेंद्र वर्ष 2013 में भारतीय सेना में भर्ती हुए। इसके बाद उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2012 में फिलीपींस यूथ वर्ल्ड कप में रजत, 2013 में आर्मेनिया यूथ एशियन चैंपियनशिप में रजत और 2015 के मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। इसके बाद 2023 के एशियन गेम्स में कांस्य पदक और करीब छह महीने बाद यूरोपियन कप में स्वर्ण पदक जीतकर नरेंद्र ने अपनी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ा।
राष्ट्रमंडल खेलों में भी चमका नरेंद्र का सितारा
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में नरेंद्र ने 90 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल जीतकर उन्होंने पदक पक्का किया और इसके बाद सेमीफाइनल में जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई। खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड के डेमर थॉमस से 0-5 से हार के बावजूद नरेंद्र ने रजत पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया।
रजत पदक जीतने के बाद नरेंद्र ने साफ कहा था कि उनका सफर अभी समाप्त नहीं हुआ है। उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय 16 वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास को दिया।
अर्जुन अवॉर्ड के लिए नाम आने पर बोले नरेंद्र
अर्जुन अवॉर्ड के लिए नाम चयनित होने पर नरेंद्र बेरवाल ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें इस उपलब्धि से बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि वह आगे भी इसी तरह देश और प्रदेश के लिए पदक जीतकर नाम रोशन करने का प्रयास करेंगे। नरेंद्र ने कहा कि देश के लिए खेलना अपने आप में गर्व की बात है और इस तरह का सम्मान मिलना खुशी को और बढ़ा देता है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा तिरंगे की शान को ऊंचा रखने के लिए मेहनत करते रहेंगे।
युवाओं को संदेश देते हुए नरेंद्र ने कहा कि मेहनत, अनुशासन, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और कोच की सलाह का ईमानदारी से पालन करने वाला खिलाड़ी निश्चित रूप से सफलता हासिल कर सकता है।
गांव में जश्न, माता-पिता बोले- गर्व की बात
नरेंद्र के अर्जुन अवॉर्ड के लिए चयन पर उनके पिता जगदीश बेरवाल और माता रोशनी देवी ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पूरे सोरखी गांव और हांसी जिले के लिए यह गर्व की बात है। परिवार को उम्मीद है कि नरेंद्र आने वाले एशियन गेम्स और ओलंपिक में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान और ऊंचा करेंगे।
वहीं सोरखी निवासी आप पार्टी नेता राजेंद्र सोरखी ने कहा कि नरेंद्र का अर्जुन अवॉर्ड के लिए चयन होना गांव, जिले और पूरे प्रदेश के लिए खुशी की बात है। गांव के लोगों को अपने बेटे की उपलब्धि पर गर्व है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि नरेंद्र आने वाले समय में देश के लिए इससे भी बड़े पदक जीतेंगे।
16 साल की मेहनत, देश के लिए लगातार पदक और अब अर्जुन अवॉर्ड की बारी—नरेंद्र बेरवाल की यह उपलब्धि हांसी के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है।
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ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में 90 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले नरेंद्र बेरवाल ने अपने शानदार प्रदर्शन से एक बार फिर खुद को साबित किया। अर्जुन अवॉर्ड के लिए उनका चयन हांसी के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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खास बात यह है कि नरेंद्र बेरवाल ने जिस भी बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, वहां उन्होंने देश के लिए पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। एशियन गेम्स में कांस्य पदक, यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत, यूथ एशियन चैंपियनशिप में कांस्य और 2025 के नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक उनके शानदार सफर की गवाही देते हैं।
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16 साल की मेहनत का नतीजा
नरेंद्र बेरवाल ने वर्ष 2009 में दूध, दही और हलवे जैसे पौष्टिक आहार के साथ बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। मैट्रिक के बाद उन्होंने पूरी तरह मुक्केबाजी पर ध्यान केंद्रित कर लिया। भिवानी बॉक्सिंग अकादमी में कोच देवराज के मार्गदर्शन में उन्होंने कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
नरेंद्र वर्ष 2013 में भारतीय सेना में भर्ती हुए। इसके बाद उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2012 में फिलीपींस यूथ वर्ल्ड कप में रजत, 2013 में आर्मेनिया यूथ एशियन चैंपियनशिप में रजत और 2015 के मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। इसके बाद 2023 के एशियन गेम्स में कांस्य पदक और करीब छह महीने बाद यूरोपियन कप में स्वर्ण पदक जीतकर नरेंद्र ने अपनी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ा।
राष्ट्रमंडल खेलों में भी चमका नरेंद्र का सितारा
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में नरेंद्र ने 90 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल जीतकर उन्होंने पदक पक्का किया और इसके बाद सेमीफाइनल में जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई। खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड के डेमर थॉमस से 0-5 से हार के बावजूद नरेंद्र ने रजत पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया।
रजत पदक जीतने के बाद नरेंद्र ने साफ कहा था कि उनका सफर अभी समाप्त नहीं हुआ है। उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय 16 वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास को दिया।
अर्जुन अवॉर्ड के लिए नाम आने पर बोले नरेंद्र
अर्जुन अवॉर्ड के लिए नाम चयनित होने पर नरेंद्र बेरवाल ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें इस उपलब्धि से बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि वह आगे भी इसी तरह देश और प्रदेश के लिए पदक जीतकर नाम रोशन करने का प्रयास करेंगे। नरेंद्र ने कहा कि देश के लिए खेलना अपने आप में गर्व की बात है और इस तरह का सम्मान मिलना खुशी को और बढ़ा देता है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा तिरंगे की शान को ऊंचा रखने के लिए मेहनत करते रहेंगे।
युवाओं को संदेश देते हुए नरेंद्र ने कहा कि मेहनत, अनुशासन, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और कोच की सलाह का ईमानदारी से पालन करने वाला खिलाड़ी निश्चित रूप से सफलता हासिल कर सकता है।
गांव में जश्न, माता-पिता बोले- गर्व की बात
नरेंद्र के अर्जुन अवॉर्ड के लिए चयन पर उनके पिता जगदीश बेरवाल और माता रोशनी देवी ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पूरे सोरखी गांव और हांसी जिले के लिए यह गर्व की बात है। परिवार को उम्मीद है कि नरेंद्र आने वाले एशियन गेम्स और ओलंपिक में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान और ऊंचा करेंगे।
वहीं सोरखी निवासी आप पार्टी नेता राजेंद्र सोरखी ने कहा कि नरेंद्र का अर्जुन अवॉर्ड के लिए चयन होना गांव, जिले और पूरे प्रदेश के लिए खुशी की बात है। गांव के लोगों को अपने बेटे की उपलब्धि पर गर्व है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि नरेंद्र आने वाले समय में देश के लिए इससे भी बड़े पदक जीतेंगे।
16 साल की मेहनत, देश के लिए लगातार पदक और अब अर्जुन अवॉर्ड की बारी—नरेंद्र बेरवाल की यह उपलब्धि हांसी के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है।