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Hisar News: राखीगढ़ी में आज से खुलेगा सात टीलों का राज, एएसआई के महानिदेशक करेंगे उद्घाटन
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Thu, 22 Jan 2026 01:10 AM IST
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राखीगढ़ी में साइट नंबर तीन पर खोदाई के लिए की गई सफाई। संवादहांसी जिले के राखीगढ़ी में साइट नंब
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नारनौंद । सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े स्थलों में शामिल विश्वविख्यात पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी एक बार फिर इतिहास के केंद्र में आ गया है। वीरवार से यहां चौथे चरण की खोदाई की शुरुआत की जा रही है जिससे हजारों साल पुरानी सभ्यता से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की उत्खनन शाखा इस बार राखीगढ़ी के सात टीलों पर विशेष अध्ययन करेगी। खोदाई का उद्घाटन एएसआई के महानिदेशक युद्धवीर सिंह रावत करेंगे।
पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि इस चरण का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि राखीगढ़ी जैसा विशाल नगर अलग टीलों में क्यों और कैसे बंटा। पहले की खोदाइयों में नगर के फैलाव के संकेत तो मिले लेकिन टीलों के आपसी जुड़ाव पर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आ सकी थी।
इस बार खोदाई गहराई के स्तर पर की जाएगी। वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करेंगे कि नगर का प्रारंभिक स्वरूप कैसा था और बाद के काल में उसमें किस तरह के बदलाव हुए। यह भी परखा जाएगा कि क्या बाढ़, नदी के मार्ग बदलने या किसी अन्य प्राकृतिक घटना ने नगर की संरचना को प्रभावित किया। एएसआई अधिकारियों के अनुसार यदि यह साबित होता है कि सातों टीले किसी तय योजना के तहत विकसित किए गए थे, तो यह हड़प्पाकालीन शहरी व्यवस्था संबंधी बड़ा निष्कर्ष होगा।
इससे यह भी संकेत मिलेगा कि उस दौर में प्रशासनिक, आवासीय और औद्योगिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग क्षेत्र निर्धारित किए जाते थे। राखीगढ़ी पहले ही हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से बड़ा स्थल माना जा चुका है। ऐसे में यहां होने वाली यह खोदाई केवल स्थानीय इतिहास तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी सिंधु घाटी सभ्यता की समझ को नई दिशा दे सकती है। पुरातत्व विभाग को उम्मीद है कि चौथे चरण की खोदाई से नगर की बसावट, पर्यावरणीय परिस्थितियों और सामाजिक जीवन से जुड़े कई अहम साक्ष्य सामने आएंगे।
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राखीगढ़ी सरस्वती महोत्सव में आज कृषि मंत्री होंगे मुख्य अतिथि
-आज लगेगी विशेष पुरातात्विक प्रदर्शनी
नारनौंद। राखीगढ़ी महोत्सव के आयोजन के बाद सरस्वती महोत्सव के लिए उत्साह बना हुआ है। आज महोत्सव में प्रदेश के कृषि मंत्री कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा मुख्य अतिथि रहेंगे। इस दौरान विशेष पुरातात्विक प्रदर्शनी का आयोजन होगा।
प्रदर्शनी के माध्यम से सरस्वती नदी और उसके तटों पर विकसित हुई प्राचीन सभ्यताओं की ऐतिहासिक यात्रा को आमजन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। प्रदर्शनी में हड़प्पाकालीन सभ्यता से जुड़े चित्र, मानचित्र, जानकारीपूर्ण पैनल और पुरातात्विक साक्ष्यों को प्रदर्शित किया जाएगा, जो भारतीय इतिहास की समृद्ध विरासत को दर्शाएंगे।
सरस्वती महोत्सव के तहत आदि बद्री, पिहोवा, कुणाल और कुरुक्षेत्र जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों पर भी सांस्कृतिक, शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य सरस्वती नदी की सांस्कृतिक विरासत, उसके महत्व और उससे जुड़ी सभ्यताओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना है।
राखीगढ़ी सरस्वती नदी घाटी सभ्यता का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां की खोदाई से प्राप्त अवशेष भारतीय इतिहास को नई दृष्टि प्रदान करते हैं। प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल जानकारी देना ही नहीं, बल्कि विशेष रूप से विद्यार्थियों और शोधार्थियों में इतिहास के प्रति रुचि पैदा करना भी है।
आयोजकों का कहना है कि युवा पीढ़ी को अपनी प्राचीन विरासत से जोड़ना समय की जरूरत है, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझ सकें। प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों के सहयोग से आयोजित सरस्वती महोत्सव को ऐतिहासिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि इस चरण का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि राखीगढ़ी जैसा विशाल नगर अलग टीलों में क्यों और कैसे बंटा। पहले की खोदाइयों में नगर के फैलाव के संकेत तो मिले लेकिन टीलों के आपसी जुड़ाव पर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आ सकी थी।
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इस बार खोदाई गहराई के स्तर पर की जाएगी। वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करेंगे कि नगर का प्रारंभिक स्वरूप कैसा था और बाद के काल में उसमें किस तरह के बदलाव हुए। यह भी परखा जाएगा कि क्या बाढ़, नदी के मार्ग बदलने या किसी अन्य प्राकृतिक घटना ने नगर की संरचना को प्रभावित किया। एएसआई अधिकारियों के अनुसार यदि यह साबित होता है कि सातों टीले किसी तय योजना के तहत विकसित किए गए थे, तो यह हड़प्पाकालीन शहरी व्यवस्था संबंधी बड़ा निष्कर्ष होगा।
इससे यह भी संकेत मिलेगा कि उस दौर में प्रशासनिक, आवासीय और औद्योगिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग क्षेत्र निर्धारित किए जाते थे। राखीगढ़ी पहले ही हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से बड़ा स्थल माना जा चुका है। ऐसे में यहां होने वाली यह खोदाई केवल स्थानीय इतिहास तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी सिंधु घाटी सभ्यता की समझ को नई दिशा दे सकती है। पुरातत्व विभाग को उम्मीद है कि चौथे चरण की खोदाई से नगर की बसावट, पर्यावरणीय परिस्थितियों और सामाजिक जीवन से जुड़े कई अहम साक्ष्य सामने आएंगे।
राखीगढ़ी सरस्वती महोत्सव में आज कृषि मंत्री होंगे मुख्य अतिथि
-आज लगेगी विशेष पुरातात्विक प्रदर्शनी
नारनौंद। राखीगढ़ी महोत्सव के आयोजन के बाद सरस्वती महोत्सव के लिए उत्साह बना हुआ है। आज महोत्सव में प्रदेश के कृषि मंत्री कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा मुख्य अतिथि रहेंगे। इस दौरान विशेष पुरातात्विक प्रदर्शनी का आयोजन होगा।
प्रदर्शनी के माध्यम से सरस्वती नदी और उसके तटों पर विकसित हुई प्राचीन सभ्यताओं की ऐतिहासिक यात्रा को आमजन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। प्रदर्शनी में हड़प्पाकालीन सभ्यता से जुड़े चित्र, मानचित्र, जानकारीपूर्ण पैनल और पुरातात्विक साक्ष्यों को प्रदर्शित किया जाएगा, जो भारतीय इतिहास की समृद्ध विरासत को दर्शाएंगे।
सरस्वती महोत्सव के तहत आदि बद्री, पिहोवा, कुणाल और कुरुक्षेत्र जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों पर भी सांस्कृतिक, शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य सरस्वती नदी की सांस्कृतिक विरासत, उसके महत्व और उससे जुड़ी सभ्यताओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना है।
राखीगढ़ी सरस्वती नदी घाटी सभ्यता का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां की खोदाई से प्राप्त अवशेष भारतीय इतिहास को नई दृष्टि प्रदान करते हैं। प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल जानकारी देना ही नहीं, बल्कि विशेष रूप से विद्यार्थियों और शोधार्थियों में इतिहास के प्रति रुचि पैदा करना भी है।
आयोजकों का कहना है कि युवा पीढ़ी को अपनी प्राचीन विरासत से जोड़ना समय की जरूरत है, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझ सकें। प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों के सहयोग से आयोजित सरस्वती महोत्सव को ऐतिहासिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।