{"_id":"6a25d327a2cb5242ba0b7a52","slug":"when-the-city-council-did-not-take-care-of-the-lake-the-elders-started-cleaning-it-themselves-hisar-news-c-21-hsr1005-886091-2026-06-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: नगर परिषद ने नहीं ली झील की सुध तो बुजुर्गों ने खुद ही सफाई की शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: नगर परिषद ने नहीं ली झील की सुध तो बुजुर्गों ने खुद ही सफाई की शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Mon, 08 Jun 2026 01:53 AM IST
विज्ञापन
हांसी में झील से कचरा निकालते हुए समिति के सदस्य।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
हांसी। शहर की ऐतिहासिक आमटी तालाब झील की बदहाली पर नगर परिषद ने संज्ञान नहीं लिया तो आस पास के लोग इसकी देखरेख में जुट गए हैं। यहां पर समिति बनाकर अपने स्तर पर सफाई व देखरेख का कार्य कर रहे हैं। समिति यहां पेड़-पौधों की देखभाल करती है। इसके अलावा बेसहारा पशु झील परिसर में न घुसे इसके लिए जाली के जेट लगवाए गए हैं।
संस्था के सदस्य सुबह जब सैर के लिए यहां आते हैं तो यहां पर शराब की खाली बोतलें व अन्य सामान बिखरा हुआ होता है। जिसे संस्था के सदस्य पहले यहां साफ-सफाई करते हैं, उसके बाद सैर करते हैं। वहीं यहां लगे लाइटों व सबमर्सिबल की मरम्मत भी संस्था करवा रही है। पांच वर्ष पहले कोरोना काल में आस पास के बुजुर्गों ने यहां घूमने आना शुरू किया।
देखते-देखते अन्य लोग भी आने लगे। बदहाल झील की व्यवस्था संभालने के लिए आवाज भी उठाते रहे, समाधान नहीं हुआ तो अपने स्तर पर पैसे एकत्रित करके काम करवाए। फिर देखरेख करने वालों ने आमटी झील उद्यान सेवा समिति के नाम से समिति बनाई। इसके तहत अब देखरेख करते हैं। लेकिन समिति भी एक सीमित दायरे में काम कर सकती है, न ही समिति के पास कोई विशेष बजट है।
विज्ञापन
समिति के सदस्य डीसी, डीएमसी व अन्य अधिकारियों से मिलकर झील की औपचारिक देखरेख का जिम्मा लेने की मांग कर चुके हैं। लेकिन अधिकारियों ने उन्हें यह कहते हुए जिम्मेदारी देने से मना कर दिया है कि जल्दी ही इस पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।
सरकार बदली तो आमटी झील अनाथ हो गई
2019 से हमें पता लगा कि इसकी देखरेख का कार्य नगर परिषद ने किसी ठेकेदार को दिया हुआ है। लेकिन काम एक रुपये का भी नहीं किया। उसके बाद समिति बनाकर हम सब मिलकर काम करवा रहे हैं। कुछ समय पहले लाइट खराब हुई तो ठेकेदार ने मना कर दिया। हम अपने स्तर पर पैसे एकत्रित करके काम करवाते हैं।-राजेंद्र यादव, प्रधान, आमटी तालाब उद्यान सुधार सेवा समिति,
वर्ष 2004 में सरकार बदली तो आमटी झील अनाथ हो गई। पहले एचएसवीपी इसकी देखरेख करते थे, लेकिन बाद में नगर परिषद को इसकी जिम्मेदारी दे दी। नगर परिषद ने तो इसे खंडहर बना दिया। ये तो आस पास के लोग मिलकर इसकी देखरेख कर रहे हैं। नहीं तो इसकी हालत और खराब हो जाती। - नवीन मेहरा
झील के सुधार के लिए पैसा आता है लेकिन वह कहां जाता है यह पता नहीं। पहले यहां किश्ती थी वह पता नहीं अब कहां गई। रात को यह शराब का अड्डा बन जाता है। समिति ही इसकी सफाई व देखभाल करती है। यहां लाइटें ठीक करवाई व तारें बदलने का कार्य समिति ने ही किया।- कृष्ण सोनी।
सरकार इसका सुधार करे तो इससे बढ़िया पार्क कोई नहीं होगा। क्योंकि शहर में तालाब किनारे पार्क यहीं पर ही है। यह शहर के बीचों बीच भी है। सरकार से मांग है कि इस पर ध्यान दे। समिति जिम्मेदारी लेना चाहती है तो हमें दे दो। अभी यहां कोई व्यवस्था नहीं है। - शिव कुमार
झील अच्छा पर्यटक स्थल है। सरकार को इसकी तरफ ध्यान देना चाहिए। अभी तक जो समिति देखरेख कर रही है, उसे ही नगर परिषद औपचारिक तौर पर देखरेख का जिम्मेदारी दें। अधिकारियों को कई बार कह चुके हैं, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। सरकार की तरफ से झील की देखरेख के लिए नया बजट जारी किया है उसके तहत कार्य करवाया जाए।- कमलेश गर्ग, क्षेत्रीय संयुक्त महामंत्री, भारत विकास परिषद।
संस्था के सदस्य सुबह जब सैर के लिए यहां आते हैं तो यहां पर शराब की खाली बोतलें व अन्य सामान बिखरा हुआ होता है। जिसे संस्था के सदस्य पहले यहां साफ-सफाई करते हैं, उसके बाद सैर करते हैं। वहीं यहां लगे लाइटों व सबमर्सिबल की मरम्मत भी संस्था करवा रही है। पांच वर्ष पहले कोरोना काल में आस पास के बुजुर्गों ने यहां घूमने आना शुरू किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
देखते-देखते अन्य लोग भी आने लगे। बदहाल झील की व्यवस्था संभालने के लिए आवाज भी उठाते रहे, समाधान नहीं हुआ तो अपने स्तर पर पैसे एकत्रित करके काम करवाए। फिर देखरेख करने वालों ने आमटी झील उद्यान सेवा समिति के नाम से समिति बनाई। इसके तहत अब देखरेख करते हैं। लेकिन समिति भी एक सीमित दायरे में काम कर सकती है, न ही समिति के पास कोई विशेष बजट है।
Trending Videos
समिति के सदस्य डीसी, डीएमसी व अन्य अधिकारियों से मिलकर झील की औपचारिक देखरेख का जिम्मा लेने की मांग कर चुके हैं। लेकिन अधिकारियों ने उन्हें यह कहते हुए जिम्मेदारी देने से मना कर दिया है कि जल्दी ही इस पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।
सरकार बदली तो आमटी झील अनाथ हो गई
2019 से हमें पता लगा कि इसकी देखरेख का कार्य नगर परिषद ने किसी ठेकेदार को दिया हुआ है। लेकिन काम एक रुपये का भी नहीं किया। उसके बाद समिति बनाकर हम सब मिलकर काम करवा रहे हैं। कुछ समय पहले लाइट खराब हुई तो ठेकेदार ने मना कर दिया। हम अपने स्तर पर पैसे एकत्रित करके काम करवाते हैं।-राजेंद्र यादव, प्रधान, आमटी तालाब उद्यान सुधार सेवा समिति,
वर्ष 2004 में सरकार बदली तो आमटी झील अनाथ हो गई। पहले एचएसवीपी इसकी देखरेख करते थे, लेकिन बाद में नगर परिषद को इसकी जिम्मेदारी दे दी। नगर परिषद ने तो इसे खंडहर बना दिया। ये तो आस पास के लोग मिलकर इसकी देखरेख कर रहे हैं। नहीं तो इसकी हालत और खराब हो जाती। - नवीन मेहरा
झील के सुधार के लिए पैसा आता है लेकिन वह कहां जाता है यह पता नहीं। पहले यहां किश्ती थी वह पता नहीं अब कहां गई। रात को यह शराब का अड्डा बन जाता है। समिति ही इसकी सफाई व देखभाल करती है। यहां लाइटें ठीक करवाई व तारें बदलने का कार्य समिति ने ही किया।- कृष्ण सोनी।
सरकार इसका सुधार करे तो इससे बढ़िया पार्क कोई नहीं होगा। क्योंकि शहर में तालाब किनारे पार्क यहीं पर ही है। यह शहर के बीचों बीच भी है। सरकार से मांग है कि इस पर ध्यान दे। समिति जिम्मेदारी लेना चाहती है तो हमें दे दो। अभी यहां कोई व्यवस्था नहीं है। - शिव कुमार
झील अच्छा पर्यटक स्थल है। सरकार को इसकी तरफ ध्यान देना चाहिए। अभी तक जो समिति देखरेख कर रही है, उसे ही नगर परिषद औपचारिक तौर पर देखरेख का जिम्मेदारी दें। अधिकारियों को कई बार कह चुके हैं, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। सरकार की तरफ से झील की देखरेख के लिए नया बजट जारी किया है उसके तहत कार्य करवाया जाए।- कमलेश गर्ग, क्षेत्रीय संयुक्त महामंत्री, भारत विकास परिषद।