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Jhajjar-Bahadurgarh News: निशानदेही व चकबंदी में उलझा शामलात भूमि से अतिक्रमण हटाओ अभियान
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फोटो-54: बहादुरगढ़ में पिछले दिनों बाईपास की तरफ सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाती जेसीबी। फाइल फो
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बहादुरगढ़। शहर में सरकारी व शामलात भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान निशानदेही और चकबंदी की प्रक्रिया में उलझकर रह गया है। नगर परिषद की रिपोर्ट के अनुसार शहर में अब भी करीब 75 एकड़ सरकारी और शामलात भूमि अवैध कब्जे के अधीन है जिसे कब्जा मुक्त नहीं कराया जा सका है।
इस संबंध में रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है। नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार पिछले दिनों सरकार के निर्देश पर अभियान चलाकर करीब 11 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया था। इसके बावजूद 75 एकड़ भूमि अब भी अवैध कब्जों में फंसी हुई है।
यह जमीन दयानंद नगर, लाइनपार, छोटूराम पार्क और संत कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में स्थित है। इनमें से अधिकांश स्थानों पर अवैध निर्माण हो चुके हैं जिससे कार्रवाई और जटिल हो गई है। अकेले लाइनपार क्षेत्र में ही करीब 25 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा है।
इस कारण कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं वर्षों से अटकी हैं। जब भी कोई नया प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया जाता है तो जमीन उपलब्ध न होने का बहाना सामने आ जाता है। इसी वजह से सार्वजनिक शौचालय, लाइब्रेरी, डॉग शेल्टर, गोशाला सहित कई जनहित परियोजनाएं समय पर साकार नहीं हो सकीं।
नगर परिषद के भू अधिकारी नीरज का कहना है कि शामलात भूमि की स्पष्ट निशानदेही और चकबंदी पूरी होने के बाद ही बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई संभव हो पाएगी। फिलहाल कानूनी और तकनीकी अड़चनों के चलते अवैध कब्जे नहीं हटाए जा रहे हैं।
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इस संबंध में रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है। नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार पिछले दिनों सरकार के निर्देश पर अभियान चलाकर करीब 11 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया था। इसके बावजूद 75 एकड़ भूमि अब भी अवैध कब्जों में फंसी हुई है।
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यह जमीन दयानंद नगर, लाइनपार, छोटूराम पार्क और संत कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में स्थित है। इनमें से अधिकांश स्थानों पर अवैध निर्माण हो चुके हैं जिससे कार्रवाई और जटिल हो गई है। अकेले लाइनपार क्षेत्र में ही करीब 25 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा है।
इस कारण कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं वर्षों से अटकी हैं। जब भी कोई नया प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया जाता है तो जमीन उपलब्ध न होने का बहाना सामने आ जाता है। इसी वजह से सार्वजनिक शौचालय, लाइब्रेरी, डॉग शेल्टर, गोशाला सहित कई जनहित परियोजनाएं समय पर साकार नहीं हो सकीं।
नगर परिषद के भू अधिकारी नीरज का कहना है कि शामलात भूमि की स्पष्ट निशानदेही और चकबंदी पूरी होने के बाद ही बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई संभव हो पाएगी। फिलहाल कानूनी और तकनीकी अड़चनों के चलते अवैध कब्जे नहीं हटाए जा रहे हैं।