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Jhajjar-Bahadurgarh News: प्लास्टिक छोड़िए, कपड़े और जूट के थैले अपनाइए
Thu, 02 Jul 2026 09:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 02 Jul 2026 09:03 PM IST
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फोटो-56: बहादुरगढ़ के गांव सांखोल में कपड़े व जूट के थैले का प्रयोग करने की शपथ लेते संघर्षशील जन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में शहर की कई सामाजिक संस्थाओं ने सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। लोगों को प्लास्टिक की थैली छोड़कर कपड़े और जूट के थैले अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। खास बात यह है कि यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है बल्कि हजारों लोगों को निशुल्क कपड़े और जूट के थैले भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सांखोल की संघर्षशील जनकल्याण सेवा समिति, भगत सिंह मैत्री संस्था और क्लीन एंड ग्रीन संस्था पिछले कई वर्षों से लगातार इस अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। संस्थाओं के सदस्य बाजारों, स्कूलों, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक कार्यक्रमों में पहुंचकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। साथ ही कपड़े और जूट के थैले वितरित कर उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
भगत सिंह मैत्री संस्था ने तीन साल में 10 हजार कपड़े के थैले वितरित किए हैं। उन्होंने 5 जून 2025 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ मिलकर शहर की सब्जी मंडी में अभियान चलाकर कपड़े के थैले वितरित किए थे और लोगों को पॉलिथिन का प्रयोग न करने की सलाह दी थी।
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संस्था के अध्यक्ष प्रदीप यादव का मानना है कि यदि हर परिवार केवल एक कपड़े का थैला नियमित रूप से इस्तेमाल करना शुरू कर दें तो हर साल हजारों प्लास्टिक बैग के उपयोग को रोका जा सकता है। यही छोटी-छोटी अच्छी आदतें बड़े बदलाव की नींव बनती हैं। अभियान का असर यह भी देखने को मिल रहा है कि कई लोग अब बाजार जाते समय अपना थैला साथ लेकर निकलते हैं और दुकानदार भी ग्राहकों को पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता मास्टर मनीष चाहार का कहना है कि स्वच्छ और हरित बहादुरगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब हर नागरिक इसमें अपनी भागीदारी निभाएगा। उनका संदेश है कि प्लास्टिक छोड़िए, कपड़े का थैला जोड़िए केवल एक नारा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण देने का संकल्प है। मनीष ने खुद कपड़े के 500 थैले बनवाए हैं। वे अपने स्कूल में बच्चों के जन्मदिन पर उन्हें कपड़े से बना थैला देते हैं। वहीं क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट से जुड़े प्रदीप रेढू, डॉ. अजय जैन ने भी पिछले दिनों अभियान चलाकर लोगों को जूट व कपड़े के थैले वितरित किए थे। उन्होंने मेट्रो स्टेशन व सब्जी मंडी में नुक्कड़ नाटक करके भी लोगों को प्लास्टिक बैग का प्रयोग न करने के लिए लोगों को जागरूक किया था।
इंसेट
बहादुरगढ़ में चल रहा ग्रीन बेल अभियान
शहर के क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट की ओर से ग्रीन बेल अभियान के तहत लोगों को खरीदारी के लिए घर से कपड़े या जूट का थैला लेकर आने के लिए प्रेरित किया जा रहा। यह अभियान पिछले महीने 5 जून को शुरू हुआ था। इसमें विशेष बात यह है कि जो ग्राहक अपना थैला साथ लेकर आ रहे हैं, उनके सम्मान में स्टोर संचालक द्वारा घंटी (बेल) बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया जा रहा।
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बहादुरगढ़। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में शहर की कई सामाजिक संस्थाओं ने सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। लोगों को प्लास्टिक की थैली छोड़कर कपड़े और जूट के थैले अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। खास बात यह है कि यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है बल्कि हजारों लोगों को निशुल्क कपड़े और जूट के थैले भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सांखोल की संघर्षशील जनकल्याण सेवा समिति, भगत सिंह मैत्री संस्था और क्लीन एंड ग्रीन संस्था पिछले कई वर्षों से लगातार इस अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। संस्थाओं के सदस्य बाजारों, स्कूलों, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक कार्यक्रमों में पहुंचकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। साथ ही कपड़े और जूट के थैले वितरित कर उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
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भगत सिंह मैत्री संस्था ने तीन साल में 10 हजार कपड़े के थैले वितरित किए हैं। उन्होंने 5 जून 2025 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ मिलकर शहर की सब्जी मंडी में अभियान चलाकर कपड़े के थैले वितरित किए थे और लोगों को पॉलिथिन का प्रयोग न करने की सलाह दी थी।
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संस्था के अध्यक्ष प्रदीप यादव का मानना है कि यदि हर परिवार केवल एक कपड़े का थैला नियमित रूप से इस्तेमाल करना शुरू कर दें तो हर साल हजारों प्लास्टिक बैग के उपयोग को रोका जा सकता है। यही छोटी-छोटी अच्छी आदतें बड़े बदलाव की नींव बनती हैं। अभियान का असर यह भी देखने को मिल रहा है कि कई लोग अब बाजार जाते समय अपना थैला साथ लेकर निकलते हैं और दुकानदार भी ग्राहकों को पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता मास्टर मनीष चाहार का कहना है कि स्वच्छ और हरित बहादुरगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब हर नागरिक इसमें अपनी भागीदारी निभाएगा। उनका संदेश है कि प्लास्टिक छोड़िए, कपड़े का थैला जोड़िए केवल एक नारा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण देने का संकल्प है। मनीष ने खुद कपड़े के 500 थैले बनवाए हैं। वे अपने स्कूल में बच्चों के जन्मदिन पर उन्हें कपड़े से बना थैला देते हैं। वहीं क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट से जुड़े प्रदीप रेढू, डॉ. अजय जैन ने भी पिछले दिनों अभियान चलाकर लोगों को जूट व कपड़े के थैले वितरित किए थे। उन्होंने मेट्रो स्टेशन व सब्जी मंडी में नुक्कड़ नाटक करके भी लोगों को प्लास्टिक बैग का प्रयोग न करने के लिए लोगों को जागरूक किया था।
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बहादुरगढ़ में चल रहा ग्रीन बेल अभियान
शहर के क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट की ओर से ग्रीन बेल अभियान के तहत लोगों को खरीदारी के लिए घर से कपड़े या जूट का थैला लेकर आने के लिए प्रेरित किया जा रहा। यह अभियान पिछले महीने 5 जून को शुरू हुआ था। इसमें विशेष बात यह है कि जो ग्राहक अपना थैला साथ लेकर आ रहे हैं, उनके सम्मान में स्टोर संचालक द्वारा घंटी (बेल) बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया जा रहा।

फोटो-56: बहादुरगढ़ के गांव सांखोल में कपड़े व जूट के थैले का प्रयोग करने की शपथ लेते संघर्षशील जन