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Jhajjar-Bahadurgarh News: इस्राइल-ईरान युद्ध का असर जूता इंडस्ट्री पर, रॉ-मटेरियल महंगा होने से बढ़ी चिंता
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-फोटो 51 : सुभाष जग्गा, प्रधान, फुटवियर पार्क एसोसिएशन
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बहादुरगढ़। इस्राइल व ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता का असर अब बहादुरगढ़ की जूता इंडस्ट्री पर भी पड़ने लगा है। एक तो रॉ-मटेरियल की कमी और ऊपर से ईवा (जूते का सोल) और पीवीसी के दामों में 50 से 80 फीसदी की बढ़ोतरी ने उद्यमियों के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं।
हफ्ते भर पहले ईवा 115 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से मिलता था। वहीं युद्ध के बाद इसके दाम 220 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। विदेशों से कच्चे माल का आयात और निर्यात के लिए भी कंटेनर का किराया 800 से 2000 डॉलर तक पहुंच गया है।
इसको लेकर 12 मार्च को बहादुरगढ़ फुटवियर पार्क एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक होगी। इसमें तैयार माल के रेट को आपसी सहमति से बढ़ाने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में सरकार की ओर से सांसद प्रवीण खंडेलवाल मुख्य रूप से मौजूद रहेंगे।
फुटवियर पार्क एसोसिएशन के प्रधान सुभाष जग्गा का कहना है कि कई प्रकार के रॉ-मटेरियल के दाम अचानक 50 से 80 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इतना ही नहीं कई जगहों पर सामान मिलना भी मुश्किल हो गया है और कालाबाजारी भी सामने आने लगी है।
ईवा और पीवीसी रेजिन (प्लास्टिक दाना) जैसे कच्चे माल की कीमतों में सबसे अधिक उछाल आया है। ईवा से जूतों के सोल और योगा मैट बनाए जाते हैं जबकि पीवीसी रेजिन से प्लास्टिक दाना, रैक्सीन और अन्य कई उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इनसे कुर्सी, जूते सहित कई प्रकार के सामान बनते हैं।
बहादुरगढ़ चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरिंदर छिकारा का कहना है कि महज एक सप्ताह में कुछ रॉ-मटेरियल के दाम 115 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 220 रुपये तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा परिवहन खर्च भी काफी बढ़ गया है। इससे उद्योगों की उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ा है।
ऐसे हालात में कई इकाइयों के सामने आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है और मुनाफा कम होने के बजाय नुकसान की स्थिति बनने लगी है। उन्होंने कहा कि यदि हालात जल्दी सामान्य नहीं हुए तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि उद्यमियों ने 12 मार्च को एक बैठक बुलाई है। इसमें निर्णय लिया जाएगा कि उत्पादन जारी रखा जाए, उत्पादों के दाम बढ़ाए जाएं या फिर कुछ समय के लिए उत्पादन बंद करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जाए।
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हफ्ते भर पहले ईवा 115 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से मिलता था। वहीं युद्ध के बाद इसके दाम 220 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। विदेशों से कच्चे माल का आयात और निर्यात के लिए भी कंटेनर का किराया 800 से 2000 डॉलर तक पहुंच गया है।
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इसको लेकर 12 मार्च को बहादुरगढ़ फुटवियर पार्क एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक होगी। इसमें तैयार माल के रेट को आपसी सहमति से बढ़ाने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में सरकार की ओर से सांसद प्रवीण खंडेलवाल मुख्य रूप से मौजूद रहेंगे।
फुटवियर पार्क एसोसिएशन के प्रधान सुभाष जग्गा का कहना है कि कई प्रकार के रॉ-मटेरियल के दाम अचानक 50 से 80 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इतना ही नहीं कई जगहों पर सामान मिलना भी मुश्किल हो गया है और कालाबाजारी भी सामने आने लगी है।
ईवा और पीवीसी रेजिन (प्लास्टिक दाना) जैसे कच्चे माल की कीमतों में सबसे अधिक उछाल आया है। ईवा से जूतों के सोल और योगा मैट बनाए जाते हैं जबकि पीवीसी रेजिन से प्लास्टिक दाना, रैक्सीन और अन्य कई उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इनसे कुर्सी, जूते सहित कई प्रकार के सामान बनते हैं।
बहादुरगढ़ चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरिंदर छिकारा का कहना है कि महज एक सप्ताह में कुछ रॉ-मटेरियल के दाम 115 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 220 रुपये तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा परिवहन खर्च भी काफी बढ़ गया है। इससे उद्योगों की उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ा है।
ऐसे हालात में कई इकाइयों के सामने आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है और मुनाफा कम होने के बजाय नुकसान की स्थिति बनने लगी है। उन्होंने कहा कि यदि हालात जल्दी सामान्य नहीं हुए तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि उद्यमियों ने 12 मार्च को एक बैठक बुलाई है। इसमें निर्णय लिया जाएगा कि उत्पादन जारी रखा जाए, उत्पादों के दाम बढ़ाए जाएं या फिर कुछ समय के लिए उत्पादन बंद करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जाए।

-फोटो 51 : सुभाष जग्गा, प्रधान, फुटवियर पार्क एसोसिएशन

-फोटो 51 : सुभाष जग्गा, प्रधान, फुटवियर पार्क एसोसिएशन