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Jhajjar-Bahadurgarh News: गुरु हुए अस्त, अब 20 नवंबर से ही बजेंगी शहनाइयां
Thu, 16 Jul 2026 06:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 16 Jul 2026 06:09 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। देवगुरु बृहस्पति (गुरु) के अस्त होने के साथ ही मांगलिक और वैवाहिक कार्यों पर विराम लग गया है। अब 20 नवंबर से देव उठनी एकादशी के बाद ही विवाह सहित अन्य शुभ कार्य दोबारा शुरू होंगे। ज्योतिषाचार्य लालचंद कॉलोनी निवासी रमेश भगत के अनुसार गुरु के अस्त रहने की अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते।
बुधवार से गुप्त नवरात्र भी शुरू हो गए हैं, जो 23 जुलाई तक चलेंगे। इस दौरान साधक मां दुर्गा की विशेष साधना और दस महाविद्याओं की उपासना करेंगे। वहीं 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास आरंभ होगा। मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के योगनिद्रा काल में चले जाते हैं, इसलिए इस अवधि में भी विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
बताया कि चातुर्मास समाप्त होने के बाद 20 नवंबर को देव उठनी एकादशी से शुभ कार्यों की फिर शुरुआत होगी और विवाह का नया सीजन आरंभ होगा। वर्ष 2026 के अंतिम दो महीनों नवंबर और दिसंबर में विवाह के कुल 11 शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। ऐसे में विवाह की तैयारी कर रहे परिवारों को अब नवंबर तक इंतजार करना होगा। पंडितों का कहना है कि शुभ मुहूर्तों को देखते हुए वर्ष के अंत में विवाह समारोहों की अच्छी खासी रौनक रहने की संभावना है।
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बहादुरगढ़। देवगुरु बृहस्पति (गुरु) के अस्त होने के साथ ही मांगलिक और वैवाहिक कार्यों पर विराम लग गया है। अब 20 नवंबर से देव उठनी एकादशी के बाद ही विवाह सहित अन्य शुभ कार्य दोबारा शुरू होंगे। ज्योतिषाचार्य लालचंद कॉलोनी निवासी रमेश भगत के अनुसार गुरु के अस्त रहने की अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते।
बुधवार से गुप्त नवरात्र भी शुरू हो गए हैं, जो 23 जुलाई तक चलेंगे। इस दौरान साधक मां दुर्गा की विशेष साधना और दस महाविद्याओं की उपासना करेंगे। वहीं 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास आरंभ होगा। मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के योगनिद्रा काल में चले जाते हैं, इसलिए इस अवधि में भी विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
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बताया कि चातुर्मास समाप्त होने के बाद 20 नवंबर को देव उठनी एकादशी से शुभ कार्यों की फिर शुरुआत होगी और विवाह का नया सीजन आरंभ होगा। वर्ष 2026 के अंतिम दो महीनों नवंबर और दिसंबर में विवाह के कुल 11 शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। ऐसे में विवाह की तैयारी कर रहे परिवारों को अब नवंबर तक इंतजार करना होगा। पंडितों का कहना है कि शुभ मुहूर्तों को देखते हुए वर्ष के अंत में विवाह समारोहों की अच्छी खासी रौनक रहने की संभावना है।
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