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Jhajjar-Bahadurgarh News: ससुर की प्रेरणा और सास के सहयोग से महक रही निशा की बगिया
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 25 May 2026 01:25 AM IST
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24jjrp12- गांव गोरिया निवासी निशा यादव पौधे लगाते हुए। स्रोत : परिजन
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साल्हावास। गांव गोरिया निवासी निशा यादव पर्यावरण संरक्षण के लिए मुहिम चलाती हैं। उनके मन में टीस थी कि शादी के बाद वे पर्यावरण संरक्षण मुहिम को आगे बढ़ा पाएंगी या नहीं लेकिन उनकी इस मुहिम में उनके ससुर चंद्रपाल और सास कमलेश ने पूरा सहयोग दिया।
शादी के बाद पति धर्मेंद्र ने भी समय-समय पर उन्हें प्रोत्साहित किया। अब निशा यादव की बगिया महक उठी है। उनके इस काम में बेटे गर्व और बेटी परिधि के साथ अन्य परिजनों का सहयोग मिल रहा है। वह आज युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं।
निशा यादव का कहना है कि सास-ससुर का भी प्रकृति के प्रति लगाव रहा है। उन्होंने अपने घर में दो पौधे लगाकर इसकी शुरुआत की जिनकी संख्या आज सैकड़ों हो गई है। उन्होंने छायादार और औषधीय पौधे लगाए हुए हैं। वे औषधीय पौधों को सबसे ज्यादा अहमियत दे रही हैं।
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उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों को लगाने से उन्हें विभिन्न प्रकार की औषधियां के लिए पैसा खर्च नहीं करना पड़ता। बहुत सारी चीज उन्हें पौधों से ही मिल जाती हैं। वे समय-समय पर सामाजिक कार्य करवाती रहती हैं। इस दौरान कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों को पौधा भेंट करना नहीं भूलती।
गांव की महिलाएं हो रही प्रेरित
निशा यादव का मानना है कि अगर हर घर की छत या आंगन में कुछ पौधे लग जाएं तो पर्यावरण को बड़ी राहत मिल सकती है। इस हरियाली भरी पहल से पड़ोसी और रिश्तेदार भी प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग उनसे पौधे लगाने और उनकी देखभाल के तरीके सीख रहे हैं। उनका कहना है कि हरियाली के लिए बड़े संसाधनों की नहीं बल्कि जागरूकता और प्रेम की जरूरत होती है।
औषधीय पौधों के साथ सफेद चंदन को दे रही प्राथमिकता
निशा यादव का कहना है कि पौधे न केवल घर की शोभा बढ़ाते हैं बल्कि सेहत दुरुस्त रखने के भी काम आते हैं। उन्हें अधिकतर औषधियां अपने घर में ही उगे पौधों से मिल जाती हैं। उनका इस्तेमाल करके उन्हें और रोगों से लड़ने की शारीरिक शक्ति भी मिलती है। सफेद चंदन, तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, अश्वगंधा, पुदीना, लेमनग्रास, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अडूसा, नीम, अजवाइन, हरसिंगार, गुड़हल, कनेर, अपराजिता, चमेली, रजनीगंधा, गुलाब, गेंदा, बेलपत्र और सदाबहार पौधों को प्राथमिकता से लगाती हैं।
शादी के बाद पति धर्मेंद्र ने भी समय-समय पर उन्हें प्रोत्साहित किया। अब निशा यादव की बगिया महक उठी है। उनके इस काम में बेटे गर्व और बेटी परिधि के साथ अन्य परिजनों का सहयोग मिल रहा है। वह आज युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं।
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निशा यादव का कहना है कि सास-ससुर का भी प्रकृति के प्रति लगाव रहा है। उन्होंने अपने घर में दो पौधे लगाकर इसकी शुरुआत की जिनकी संख्या आज सैकड़ों हो गई है। उन्होंने छायादार और औषधीय पौधे लगाए हुए हैं। वे औषधीय पौधों को सबसे ज्यादा अहमियत दे रही हैं।
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उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों को लगाने से उन्हें विभिन्न प्रकार की औषधियां के लिए पैसा खर्च नहीं करना पड़ता। बहुत सारी चीज उन्हें पौधों से ही मिल जाती हैं। वे समय-समय पर सामाजिक कार्य करवाती रहती हैं। इस दौरान कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों को पौधा भेंट करना नहीं भूलती।
गांव की महिलाएं हो रही प्रेरित
निशा यादव का मानना है कि अगर हर घर की छत या आंगन में कुछ पौधे लग जाएं तो पर्यावरण को बड़ी राहत मिल सकती है। इस हरियाली भरी पहल से पड़ोसी और रिश्तेदार भी प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग उनसे पौधे लगाने और उनकी देखभाल के तरीके सीख रहे हैं। उनका कहना है कि हरियाली के लिए बड़े संसाधनों की नहीं बल्कि जागरूकता और प्रेम की जरूरत होती है।
औषधीय पौधों के साथ सफेद चंदन को दे रही प्राथमिकता
निशा यादव का कहना है कि पौधे न केवल घर की शोभा बढ़ाते हैं बल्कि सेहत दुरुस्त रखने के भी काम आते हैं। उन्हें अधिकतर औषधियां अपने घर में ही उगे पौधों से मिल जाती हैं। उनका इस्तेमाल करके उन्हें और रोगों से लड़ने की शारीरिक शक्ति भी मिलती है। सफेद चंदन, तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, अश्वगंधा, पुदीना, लेमनग्रास, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अडूसा, नीम, अजवाइन, हरसिंगार, गुड़हल, कनेर, अपराजिता, चमेली, रजनीगंधा, गुलाब, गेंदा, बेलपत्र और सदाबहार पौधों को प्राथमिकता से लगाती हैं।