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मेघालय मॉडल पर हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड: स्मार्ट बुक्स इस सत्र से होंगी शुरू, जानें क्या होंगे नए बदलाव?

संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Published by: शाहिल शर्मा Updated Wed, 18 Mar 2026 03:58 PM IST
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सार

स्मार्ट पुस्तक के अंदर प्रत्येक प्रश्न पर क्यूआर कोड अंकित किया गया है। अगर बच्चे को किसी तरह का कोई संशय या फिर जिज्ञासा है तो उसे गुरुजी से परामर्श लेने की जरूरत नहीं बल्कि क्यूआर कोड को स्कैन करते ही उसे एक लिंक प्राप्त होगा।

Smart books will be introduced in Haryana School Education Board from this session
डॉक्टर पवन कुमार, बोर्ड अध्यक्ष - फोटो : संवाद
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विस्तार

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड अब मेघालय शिक्षा बोर्ड की तर्ज पर कक्षा नौवीं से बारहवीं तक स्मार्ट पुस्तकें लागू करने की तैयारी कर चुका है। इसी शिक्षा सत्र से प्रत्येक कक्षा में स्मार्ट पुस्तकें बच्चों को पढ़ाई जाएंगी। स्मार्ट पुस्तक के अंदर प्रत्येक प्रश्न पर क्यूआर कोड अंकित किया गया है। अगर बच्चे को किसी तरह का कोई संशय या फिर जिज्ञासा है तो उसे गुरुजी से परामर्श लेने की जरूरत नहीं बल्कि क्यूआर कोड को स्कैन करते ही उसे एक लिंक प्राप्त होगा। जिसके जरिए उस प्रश्न से जुड़ी विस्तृत जानकारी उस बच्चे के सामने होगी। 

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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉक्टर पवन कुमार ने पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि स्मार्ट पुस्तकों के साथ बोर्ड वर्चुअल लैब की सुविधा भी मुहैया करवाएगा। जिसके लिंक के जरिए विद्यार्थी आसानी से तकनीकी गतिविधियों के अलावा इंटरनेट और एआई तकनीक से जुड़ी जानकारी भी हासिल कर पाएंगे। स्मार्ट पुस्तकों के प्रकाशन का काम भी अंतिम चरण में चल रहा है।

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इसी सत्र से लागू होगा त्रिभाषीय फार्मूला
बोर्ड अध्यक्ष डॉक्टर पवन कुमार ने बताया कि इसी शिक्षा सत्र से बोर्ड त्रिभाषीय फार्मूला लागू करने जा रहा है। जिसके बाद प्रत्येक विद्यार्थी का पांच विषयों की बजाए छह विषयों के आधार पर आंकलन होगा। उन्होंने बताया कि कक्षा नौवीं से बारहवीं तक विद्यार्थी हिंदी, अंग्रेजी के अलावा संस्कृत, पंजाबी या उर्दू भाषा का चयन कर सकेंगे। जिसके बाद सात विषय हो जाएंगे। पहले पांच विषयों से विद्यार्थी का आंकलन होता था, मगर अब छह विषयों के आधार पर विद्यार्थी को फेल या पास किया जाएगा।

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड प्रदेश में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए संचालित हो रहे आठ स्कूलों में पढ़ने वाले मूक बधीर बच्चों के लिए भी विशेष कदम उठाने जा रहा है। उनके लिए संस्कृत भाषा में कोई संकेत इशारे से जुड़ी तकनीक नहीं है। ऐसे में इन छात्रों के लिए भी त्रिभाषीय फार्मूले के तहत नई व्यवस्था लागू की जाएगी। जिससे उनका कौशल और अधिक निखारा जा सके।

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