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Jhajjar-Bahadurgarh News: ठेकेदार की बिड कैपिसिटी पूरी न मिलने पर छह करोड़ के दो टेंडर रद्द
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Fri, 17 Apr 2026 02:54 AM IST
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फोटो-60: बहादुरगढ़ की श्रीराम कालोनी में शुरू हुआ था काम। स्रोत ठेकेदार
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बहादुरगढ़। नगर परिषद द्वारा वर्ष 2023 में वैध घोषित की गईं दो कॉलोनियों में विकास कार्यों को लेकर जारी करीब छह करोड़ रुपये के दो टेंडर को रद्द कर दिया गया है। ये टेंडर माया विहार कॉलोनी और श्रीराम कॉलोनी में गली और नाली निर्माण के लिए जारी किए गए थे। जिस ठेकेदार को वर्क ऑर्डर दिया गया था उसकी बिड कैपेसिटी पूरी न होने के चलते जिला नगर आयुक्त (डीएमसी) के आदेश पर अधिशासी अभियंता ने दोनों टेंडर रद्द कर दिए।
दरअसल, इन टेंडरों के आवंटन को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाले ठेकेदार कुलवंत ने आरोप लगाया था कि टेंडर गलत तरीके से आवंटित किए गए हैं। इस संबंध में उन्होंने समाधान शिविर में शिकायत देने के साथ अदालत का भी दरवाजा खटखटाया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला नगर आयुक्त अभिनव सिवाच ने जांच शुरू करवाई। जांच के दौरान आरोप सही पाए गए। इसके बाद संबंधित ठेकेदार बिजेंद्र को आवंटित दोनों टेंडरों को रद्द करने का निर्णय लिया गया। टेंडर रद्द होने से दोनों कॉलोनियों में विकास कार्य फिलहाल ठप हो गए हैं। इससे स्थानीय निवासियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। वहीं प्रशासन अब नई प्रक्रिया के तहत पारदर्शी तरीके से दोबारा टेंडर जारी करने की तैयारी में है।
इंसेट
ये होती है बिड कैपिसिटी
टेंडर या निविदा में बिड कैपेसिटी का अर्थ उस अधिकतम कार्य मूल्य से है जिसे करने के लिए एक ठेकेदार या बोलीदाता पात्र है। यह प्रक्रिया तकनीकी मूल्यांकन के दौरान ये सुनिश्चित करने का एक तरीका है कि ठेकेदार के पास नई परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय और परिचालन संसाधन हैं।
वर्जन
पहले वाले अधिशासी अभियंता ने वर्क आर्डर जारी कर दिया था। मशीनरी व टाइल फैक्टरी स्थापित कर काम भी शुरू कर दिया था। करीब 25 प्रतिशत काम पूरा हो गया था। पहले सभी कागज ठीक थे लेकिन अब मौजूदा अधिकारी कागज में कमी निकाल रहे हैं। यह अन्याय है। वे इस बारे में जल्द ही कार्रवाई करेंगे। अधिकारियों ने मिलीभगत करके अन्याय किया है। इस कारण लाखों का नुकसान हुआ है। -बिजेंद्र कुमार, ठेकेदार
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माया विहार और श्रीराम काॅलोनी के टेंडर जिस ठेकेदार को आवंटित किए गए थे उसकी शिकायत आई थी। जांच की तो आरोप सही पाए गए। ठेकेदार की बिड कैपिसिटी पूरी नहीं थी। ऐसे में डीएमसी के आदेश पर दोनों टेंडर रद कर दिए हैं। इन दोनों टेंडर को लेकर कोई काम शुरू नहीं हो सका था।-भारत भूषण, अधिशासी अभियंता, नगर परिषद, बहादुरगढ़।
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दरअसल, इन टेंडरों के आवंटन को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाले ठेकेदार कुलवंत ने आरोप लगाया था कि टेंडर गलत तरीके से आवंटित किए गए हैं। इस संबंध में उन्होंने समाधान शिविर में शिकायत देने के साथ अदालत का भी दरवाजा खटखटाया था।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला नगर आयुक्त अभिनव सिवाच ने जांच शुरू करवाई। जांच के दौरान आरोप सही पाए गए। इसके बाद संबंधित ठेकेदार बिजेंद्र को आवंटित दोनों टेंडरों को रद्द करने का निर्णय लिया गया। टेंडर रद्द होने से दोनों कॉलोनियों में विकास कार्य फिलहाल ठप हो गए हैं। इससे स्थानीय निवासियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। वहीं प्रशासन अब नई प्रक्रिया के तहत पारदर्शी तरीके से दोबारा टेंडर जारी करने की तैयारी में है।
इंसेट
ये होती है बिड कैपिसिटी
टेंडर या निविदा में बिड कैपेसिटी का अर्थ उस अधिकतम कार्य मूल्य से है जिसे करने के लिए एक ठेकेदार या बोलीदाता पात्र है। यह प्रक्रिया तकनीकी मूल्यांकन के दौरान ये सुनिश्चित करने का एक तरीका है कि ठेकेदार के पास नई परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय और परिचालन संसाधन हैं।
वर्जन
पहले वाले अधिशासी अभियंता ने वर्क आर्डर जारी कर दिया था। मशीनरी व टाइल फैक्टरी स्थापित कर काम भी शुरू कर दिया था। करीब 25 प्रतिशत काम पूरा हो गया था। पहले सभी कागज ठीक थे लेकिन अब मौजूदा अधिकारी कागज में कमी निकाल रहे हैं। यह अन्याय है। वे इस बारे में जल्द ही कार्रवाई करेंगे। अधिकारियों ने मिलीभगत करके अन्याय किया है। इस कारण लाखों का नुकसान हुआ है। -बिजेंद्र कुमार, ठेकेदार
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माया विहार और श्रीराम काॅलोनी के टेंडर जिस ठेकेदार को आवंटित किए गए थे उसकी शिकायत आई थी। जांच की तो आरोप सही पाए गए। ठेकेदार की बिड कैपिसिटी पूरी नहीं थी। ऐसे में डीएमसी के आदेश पर दोनों टेंडर रद कर दिए हैं। इन दोनों टेंडर को लेकर कोई काम शुरू नहीं हो सका था।-भारत भूषण, अधिशासी अभियंता, नगर परिषद, बहादुरगढ़।
