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Jind News: छोटे शौक से बना बड़ा जुनून, मां से मिली प्रकृति प्रेम की प्रेरणा

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2026 11:47 PM IST
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A small hobby evolved into a great passion; the inspiration for a love of nature came from my mother.
03जेएनडी20-पौधों की देख रेख कर पानी डालती सरिता। संवाद
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नरवाना। ग्रामीण परिवेश में जहां एक ओर लोग खेतों से जुड़े होते हैं, वहीं घरों की छतें अक्सर खाली पड़ी रहती हैं। गांव डूमरखा कलां निवासी सरिता ने अपनी छत को हरियाली में बदलकर प्रकृति का संदेश दिया है। उनका यह प्रयास न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है बल्कि गांव के अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रहा है।
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सरिता को बचपन से ही पौधों से विशेष लगाव रहा है। यह प्रेरणा उन्हें अपनी माता विमला देवी से मिली। समय के साथ उन्होंने महसूस किया कि गांव में भी हरियाली कम होती जा रही है और लोग अपने घरों के आंगन व छतों का बेहतर उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इसी सोच के साथ सरिता ने अपनी छत पर छोटी-सी बगिया तैयार की।
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शुरुआत में उन्होंने कुछ गमलों में सामान्य पौधे लगाए लेकिन धीरे-धीरे यह शौक शौक जुनून में बदल गया। आज सरिता की छत पर गुलाब, गेंदा, गुड़हल, तुलसी, एलोवेरा, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट के साथ-साथ टमाटर, अजवाइन और गिलोय जैसे उपयोगी पौधे भी लहलहा रहे हैं। सरिता की यह बगिया न केवल देखने में आकर्षक है बल्कि उनके परिवार को ताजी और शुद्ध सब्जियां भी उपलब्ध करवा रही है।
सरिता बताती हैं कि घर के कामकाज के बाद जब वे अपने पौधों के बीच समय बिताती हैं तो उन्हें मानसिक शांति और सुकून मिलता है। उनके पति राजेश सिंह भी बगिया की देखभाल में उनका पूरा सहयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि रोज सुबह-शाम पौधों के बीच समय बिताने और योग करने से एक अलग ही अनुभव होता है। संवाद
सरिता की बगिया बनी गांव के लिए प्रेरणा

सरिता की पहल का असर अब पूरे गांव में साफ दिखाई दे रहा है। उनकी छत पर बनी सुंदर बगिया को देखने के लिए आसपास के लोग उत्सुकता से आते हैं और उनसे बागवानी के गुर सीखते हैं। सरिता भी सभी को कम खर्च में गार्डन तैयार करने, जैविक खाद बनाने और पानी बचाने के आसान तरीके बताती हैं। सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट से प्रेरित होकर गांव के 20 से अधिक घरों में लोगों ने अपनी छतों और आंगनों में पौधे लगाने शुरू कर दिए हैं। बच्चों में भी प्रकृति और पौधों के प्रति रुचि बढ़ी है। अब सरिता की यह बगिया सिर्फ उनके घर तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनकी पहल यह संदेश देती है कि यदि हर घर छोटा-सा प्रयास करें तो गांवों में हरियाली बढ़ाई जा सकती है और पर्यावरण को स्वच्छ व स्वस्थ बनाया जा सकता है।
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