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सरकारी स्कूलों में संख्या बढ़ाने के दावे और बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रही सरकार : हरपाल सिंह
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26जेएनडी02: डेमोक्रेटिक स्कूल टीचर एसोसिएशन सदस्य बैठक में मौजूद। स्रोत संगठन
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जींद। डेमोक्रेटिक स्कूल टीचर एसोसिएशन की बैठक में सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और शिक्षकों की लंबित मांगों पर चर्चा हुई। जिला प्रधान हरपाल सिंह ने कहा कि सरकार सरकारी स्कूलों में संख्या बढ़ाने का दावा कर रही है और चिराग योजना के माध्यम से बच्चों को निजी स्कूलों में भी भेज रही है।
उन्होंने इस दोहरी मानसिकता की निंदा करते हुए योजना को तुरंत वापस लेने की मांग की। राज्य कोषाध्यक्ष वेदपाल रिढाल ने कहा कि अध्यापकों का मूल कार्य शिक्षण है, इसलिए उनसे गैर-शैक्षणिक कार्य न लिए जाएं।
उन्होंने विभाग में कार्यरत शिक्षकों के लिए टेट की अनिवार्यता समाप्त करने और गेस्ट टीचरों के लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें नियमित करने की मांग की। कहा कि एचकेआरएन कर्मचारियों के वेतन से काटा जा रहा जीएसटी तर्कहीन है और इसे बंद किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन बहाल हो और नई पेंशन स्कीम को वापस लेकर सभी के लिए पुरानी पेंशन लागू की जाए। प्रदेश में खाली पड़े 40,000 पदों को नियमित भर्ती से भरा जाए। हर स्कूल में सफाई कर्मचारी, विषयवार अध्यापक और प्राथमिक स्तर पर प्रत्येक कक्षा के लिए अलग शिक्षक की व्यवस्था हो।
पहली कक्षा में दाखिले की आयु छह वर्ष के बजाय दोबारा पांच वर्ष की जाए। समय पर किताबें उपलब्ध कराना, जल्द ट्रांसफर ड्राइव चलाना और एसीपी नियमों से अंकों की शर्त हटाई जाए। मौके पर उपाध्यक्ष सतीश सरोहा, संजय कुमार, महा सिंह कटारिया, सुरेंद्र मोर, रोहतास रंगा, सुनील कुमार और सतीश उचाना और अनेक शिक्षक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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उन्होंने इस दोहरी मानसिकता की निंदा करते हुए योजना को तुरंत वापस लेने की मांग की। राज्य कोषाध्यक्ष वेदपाल रिढाल ने कहा कि अध्यापकों का मूल कार्य शिक्षण है, इसलिए उनसे गैर-शैक्षणिक कार्य न लिए जाएं।
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उन्होंने विभाग में कार्यरत शिक्षकों के लिए टेट की अनिवार्यता समाप्त करने और गेस्ट टीचरों के लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें नियमित करने की मांग की। कहा कि एचकेआरएन कर्मचारियों के वेतन से काटा जा रहा जीएसटी तर्कहीन है और इसे बंद किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन बहाल हो और नई पेंशन स्कीम को वापस लेकर सभी के लिए पुरानी पेंशन लागू की जाए। प्रदेश में खाली पड़े 40,000 पदों को नियमित भर्ती से भरा जाए। हर स्कूल में सफाई कर्मचारी, विषयवार अध्यापक और प्राथमिक स्तर पर प्रत्येक कक्षा के लिए अलग शिक्षक की व्यवस्था हो।
पहली कक्षा में दाखिले की आयु छह वर्ष के बजाय दोबारा पांच वर्ष की जाए। समय पर किताबें उपलब्ध कराना, जल्द ट्रांसफर ड्राइव चलाना और एसीपी नियमों से अंकों की शर्त हटाई जाए। मौके पर उपाध्यक्ष सतीश सरोहा, संजय कुमार, महा सिंह कटारिया, सुरेंद्र मोर, रोहतास रंगा, सुनील कुमार और सतीश उचाना और अनेक शिक्षक प्रतिनिधि मौजूद रहे।