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Jind News: रंग-गुलाल फैक्टरी में आग ने खेली खून की होली, आधे घंटे मची रही चीख-पुकार, दीवार तोड़कर निकाले मजदूर
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 08 Mar 2026 04:51 AM IST
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07जेएनडी33, 34, 35, 36: हादसे के बाद विलाप करते परिजन। संवाद
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जींद। सफीदों की भाट कॉलोनी में रंग-गुलाल की अवैध फैक्टरी में शनिवार को लगी भीषण आग में फंसे मजदूरों की आधे घंटे तक चीख-पुकार गूंजती रही। शोर-शराबा सुनकर पहुंचे पड़ोसियों ने पहले फैक्टरी के गेट का ताला, फिर दीवार तोड़कर 16 महिला मजदूरों को निकाला। इस बीच कई मजदूर जान बचाने के लिए छत से कूद गए। इस हादसे में चार महिलाओं की मौत हो गई, 18 झुलस गए। इनमें कई की स्थिति चिंताजनक बची हुई है।
एसपी कुलदीप सिंह के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता लगा है कि फैक्टरी अवैध रूप से संचालित है। इसे सफीदों के वार्ड-11 का राजू डेढ़ साल से चला रहा था। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करके हिरासत में लिया है। फैक्टरी में आसपास के लोग ही मजदूरी करते थे। सुबह 10ः45 बजे जब आग लगी, अंदर 30 मजदूर काम कर रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शी प्रवीन, नरेश, दीपक, कमला व पप्पूू ने बताया कि आगजनी की घटना लगभग 10ः45 बजे की है। फैक्टरी में चीख पुकार सुनकर वे लोग पहुंचे तो चौतरफा धुएं का गुबार उठ रहा था। अंदर फंसी महिलाएं जान बचाने की गुहार लगा रही थीं। कुछ महिला मजदूर कमरे से बाहर निकलकर गेट के पास पहुंची तो यह बंद मिला।
घबराकर फिर वह अंदर भागीं और आग-धुएं में घिर गईं। कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। कुछ मजदूर छत की ओर भागे और लपटों से बचने के लिए नीचे छलांग लगा दी। उन्हें चोटें आई हैं। फैक्टरी गेट पर ताला लगा होने से मदद के लिए तुरंत कोई नहीं पहुंच सका।
इस बीच, युवाओं ने फैक्टरी गेट का ताला तोड़ा। अंदर गए तो गेट से धुआं और लपटें बाहर आ रही थीं। इस कारण दीवार तोड़कर 16 महिला मजदूरों को बाहर निकाला गया। इनके निकाले जाने तक फायर ब्रिगेड या एंबुलेंस का कोई अता-पता नहीं था।
प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि 10ः45 बजे आग की सूचना मिलने के बावजूद फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस दोपहर 12ः15 बजे पहुंच पाई। गेट बंद होने और रिहायशी इलाके का रास्ता संकरा होने से दमकल कर्मियों को भी अंदर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू करने में देरी हुई।
गंभीर रूप से झुलसे लोगों को बाहर निकाला गया। इसमें दो महिला मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो का अस्पताल में निधन हो गया। घायलों को पहले नागरिक अस्पताल लाया गया। यहां से कई गंभीर हाल में थे, जिन्हें पीजीआई व अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किया गया है।
इस बीच, डीसी मोहम्मद इमरान रजा और एसपी कुलदीप सिंह घटनास्थल पहुंचे और परिजनों को बेहतर इलाज और आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया। डीसी ने कहा कि हादसे की पूरी जांच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मजदूरों को अंदर करके गेट पर ताला लगा देता था फैक्टरी संचालक
प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि फैक्टरी संचालक राजू रोजाना सुबह मजदूरों को फैक्टरी के अंदर करके मुख्य गेट पर बाहर से ताला लगा देता था ताकि किसी को अंदर काम चलने की खबर न लगे। शाम को वही आकर ताला खोलता था तब सारे लोग बाहर निकलते थे। शनिवार को आग में झुलसने से महिला मजदूरों मौत की बड़ी वजह भी यही रही। वे बचने के लिए बाहर भागकर मेनगेट तक पहुंच गईंं लेकिन ताला लगा होने से बाहर नहीं जा पाईं। ऊंची दीवार भी फांदना उनके बस का नहीं था। अंदर ही लौटकर धुएं और लपटों में घिर गईं।
तीन महीने से काम कर रहे थे मजदूर
घायलों के साथ अस्पताल में आई पिंकी ने बताया कि फैक्टरी में काम करने वाले अधिकतर महिला और पुरुष करीब तीन महीने से यहां मजदूरी कर रहे थे। फैक्टरी में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे और न ही आग से बचाव के उपकरण मौजूद थे। प्रतिदिन मजदूरों के अंदर जाते ही बाहर गेट को ताला लगा दिया जाता था। शाम को छुट्टी के समय ही ताला खुलता था।
परिजनों ने जताया रोष, जाम लगाने का प्रयास
फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की देरी से गुस्साए मृतकों और घायलों के परिजनों में भारी रोष देखने को मिला। परिजनों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जींद चौक पर ट्रैफिक जाम करने का प्रयास किया। मौके पर पहुंचे डीसी व एसपी से उन्होंने लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। दोनों अधिकारियों ने इसका भरोसा देते हुए उन्हें समझाकर शांत कराया।
फैक्टरी संचालक राजु पुत्र जयकुमार वार्ड 11 निवासी के रुप में पहचान हुई है। इसमें राजु समेत कई लोगों को डिटेन किया है। सभी से पूछताछ की जा रही है। अभी तक सामने आया है कि फैक्टरी अवैध तरीके से चलाई जा रही थी। इसमें मुख्य आरोपी राजु के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, बाकि लोगों की संलिप्ता पाई गई तो उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होगी।
- कुलदीप सिंह, एसपी जींद
भाट कॉलोनी के पप्पू बने भगवान, धुएं में हो गए बेहोश
भाट कालोनी निवासी पप्पू (42) फैक्टरी में फंसे लोगों के लिए जीवनदाता बने। उन्होंने ही मुख्य गेट का ताला तोड़ा। इसके बाद वह फैक्टरी के अंदर घुसे और लोगों को निकालने लगे। धुएं और लपटों के बीच उनका भी दम घुटने लगा। उन्हें उल्टियां हुईं और बेहोश तक हो गए। इसके बाद उनको भी अस्पताल पहुंचाया गया।
सफीदों में नहीं मिली एंबुलेंस
सफीदों के नागरिक अस्पताल में एक ही एंबुलेंस थी। वह भी घटना के समय किसी मरीज को लेकर जींद गई थी। इस कारण समय से एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद जींद व आसपास से एंबुलेंस मंगवाकर घायलों को उपचार के लिए पहुंचाया गया।
- डॉ. सुनील, एसएमओ नागरिक अस्पताल, सफीदों
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एसपी कुलदीप सिंह के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता लगा है कि फैक्टरी अवैध रूप से संचालित है। इसे सफीदों के वार्ड-11 का राजू डेढ़ साल से चला रहा था। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करके हिरासत में लिया है। फैक्टरी में आसपास के लोग ही मजदूरी करते थे। सुबह 10ः45 बजे जब आग लगी, अंदर 30 मजदूर काम कर रहे थे।
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प्रत्यक्षदर्शी प्रवीन, नरेश, दीपक, कमला व पप्पूू ने बताया कि आगजनी की घटना लगभग 10ः45 बजे की है। फैक्टरी में चीख पुकार सुनकर वे लोग पहुंचे तो चौतरफा धुएं का गुबार उठ रहा था। अंदर फंसी महिलाएं जान बचाने की गुहार लगा रही थीं। कुछ महिला मजदूर कमरे से बाहर निकलकर गेट के पास पहुंची तो यह बंद मिला।
घबराकर फिर वह अंदर भागीं और आग-धुएं में घिर गईं। कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। कुछ मजदूर छत की ओर भागे और लपटों से बचने के लिए नीचे छलांग लगा दी। उन्हें चोटें आई हैं। फैक्टरी गेट पर ताला लगा होने से मदद के लिए तुरंत कोई नहीं पहुंच सका।
इस बीच, युवाओं ने फैक्टरी गेट का ताला तोड़ा। अंदर गए तो गेट से धुआं और लपटें बाहर आ रही थीं। इस कारण दीवार तोड़कर 16 महिला मजदूरों को बाहर निकाला गया। इनके निकाले जाने तक फायर ब्रिगेड या एंबुलेंस का कोई अता-पता नहीं था।
प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि 10ः45 बजे आग की सूचना मिलने के बावजूद फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस दोपहर 12ः15 बजे पहुंच पाई। गेट बंद होने और रिहायशी इलाके का रास्ता संकरा होने से दमकल कर्मियों को भी अंदर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू करने में देरी हुई।
गंभीर रूप से झुलसे लोगों को बाहर निकाला गया। इसमें दो महिला मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो का अस्पताल में निधन हो गया। घायलों को पहले नागरिक अस्पताल लाया गया। यहां से कई गंभीर हाल में थे, जिन्हें पीजीआई व अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किया गया है।
इस बीच, डीसी मोहम्मद इमरान रजा और एसपी कुलदीप सिंह घटनास्थल पहुंचे और परिजनों को बेहतर इलाज और आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया। डीसी ने कहा कि हादसे की पूरी जांच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मजदूरों को अंदर करके गेट पर ताला लगा देता था फैक्टरी संचालक
प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि फैक्टरी संचालक राजू रोजाना सुबह मजदूरों को फैक्टरी के अंदर करके मुख्य गेट पर बाहर से ताला लगा देता था ताकि किसी को अंदर काम चलने की खबर न लगे। शाम को वही आकर ताला खोलता था तब सारे लोग बाहर निकलते थे। शनिवार को आग में झुलसने से महिला मजदूरों मौत की बड़ी वजह भी यही रही। वे बचने के लिए बाहर भागकर मेनगेट तक पहुंच गईंं लेकिन ताला लगा होने से बाहर नहीं जा पाईं। ऊंची दीवार भी फांदना उनके बस का नहीं था। अंदर ही लौटकर धुएं और लपटों में घिर गईं।
तीन महीने से काम कर रहे थे मजदूर
घायलों के साथ अस्पताल में आई पिंकी ने बताया कि फैक्टरी में काम करने वाले अधिकतर महिला और पुरुष करीब तीन महीने से यहां मजदूरी कर रहे थे। फैक्टरी में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे और न ही आग से बचाव के उपकरण मौजूद थे। प्रतिदिन मजदूरों के अंदर जाते ही बाहर गेट को ताला लगा दिया जाता था। शाम को छुट्टी के समय ही ताला खुलता था।
परिजनों ने जताया रोष, जाम लगाने का प्रयास
फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की देरी से गुस्साए मृतकों और घायलों के परिजनों में भारी रोष देखने को मिला। परिजनों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जींद चौक पर ट्रैफिक जाम करने का प्रयास किया। मौके पर पहुंचे डीसी व एसपी से उन्होंने लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। दोनों अधिकारियों ने इसका भरोसा देते हुए उन्हें समझाकर शांत कराया।
फैक्टरी संचालक राजु पुत्र जयकुमार वार्ड 11 निवासी के रुप में पहचान हुई है। इसमें राजु समेत कई लोगों को डिटेन किया है। सभी से पूछताछ की जा रही है। अभी तक सामने आया है कि फैक्टरी अवैध तरीके से चलाई जा रही थी। इसमें मुख्य आरोपी राजु के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, बाकि लोगों की संलिप्ता पाई गई तो उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होगी।
- कुलदीप सिंह, एसपी जींद
भाट कॉलोनी के पप्पू बने भगवान, धुएं में हो गए बेहोश
भाट कालोनी निवासी पप्पू (42) फैक्टरी में फंसे लोगों के लिए जीवनदाता बने। उन्होंने ही मुख्य गेट का ताला तोड़ा। इसके बाद वह फैक्टरी के अंदर घुसे और लोगों को निकालने लगे। धुएं और लपटों के बीच उनका भी दम घुटने लगा। उन्हें उल्टियां हुईं और बेहोश तक हो गए। इसके बाद उनको भी अस्पताल पहुंचाया गया।
सफीदों में नहीं मिली एंबुलेंस
सफीदों के नागरिक अस्पताल में एक ही एंबुलेंस थी। वह भी घटना के समय किसी मरीज को लेकर जींद गई थी। इस कारण समय से एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद जींद व आसपास से एंबुलेंस मंगवाकर घायलों को उपचार के लिए पहुंचाया गया।
- डॉ. सुनील, एसएमओ नागरिक अस्पताल, सफीदों