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Jind News: बड़ा सवालः थाने से 200 मीटर दूर किसकी शह पर चल रही थी अवैध फैक्टरी
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 08 Mar 2026 04:49 AM IST
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जींद। थाने से 200 दूर रंग-गुलाल की अवैध फैक्टरी किसकी शह से चल रही थी? चप्पे-चप्पे पर चौकसी का दावा करने वाली पुलिस या फैक्टरी लगने से पहले धुआं सूंघ लेने वाले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी भनक नहीं थी। यक्ष प्रश्न है कि क्या प्रशासन दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर सकेगा?
करीब दो हजार की आबादी वाली भाट कॉलोनी में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि अवैध है। बावजूद इसके डेढ़ साल से अवैध फैक्टरी संचालित होती रही। रंग-गुलाल और स्प्रे से रोजाना लाखों का धंधा चोखा होता रहा। धूल-धुएं की परतें सारे नियम-कायदों के ऊपर चढ़ती रहीं।
लेकिन, इसकी भनक न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों को हुई और न ही सरकारी खजाना भरने के बहाने गली-गली निगहबानी करने वाले नगर पालिका के कर्मचारियों को। आखिरकार चार महिला मजदूरों की मौत का गुनहगार है कौन?
स्थानीय लोगों ने सफीदों थाना पुलिस से लेकर प्रशासन तक पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि घटनास्थल से करीब 200 मीटर दूर थाना है। यह कैसे संभव है कि इन्हें कोई खबर ही न हो।
फैक्टरी तक रोजाना छोटी गाड़ियां आकर माल ले जाती थीं और कच्चा माल भी पहुंचाया जाता था। आए दिन कबाड़ वाले भी आते रहते थे। इसके बाद भी जानकारी का अभाव कई विभागों की सामूहिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
अवैध फैक्टरी में नहीं थे आग से बचाव के इंतजाम
हादसे में घायल जेठानी की सेवादारी के लिए आईं पिंकी ने बताया कि यह फैक्टरी करीब डेढ़ वर्ष से संचालित हो रही थी। फिलहाल जो महिला-पुरुष यहां काम कर रहे थे, वे तीन महीने पहले ही आए थे। फैक्टरी में सुरक्षा के इंतजाम थे न ही आग से बचाव के उपकरण ही मौजूद थे। रोज मजदूरों के अंदर जाते ही बाहर गेट पर ताला लगा दिया जाता था। शाम को छुट्टी के समय ही ताला खुलता था। उन्होंने केमिकल से रंग बनाने का काम होने के बावजूद प्रशासनिक विभागों के जांच नहीं करने पर भी सवाल उठाए।इनसेट--
रिहायशी इलाके की कराएंगे जांच, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई : डीसी
डीसी का कहना है कि रिहायशी इलाके में फैक्टरी चलाने और हादसा होने की जांच कराई जा रही है। इसमें देखेंगे कि कैसे यह फैक्टरी चलती रही और किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके लिए जो भी दोषी मिलेंगे, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस रिहायशी इलाके समेत अन्य क्षेत्रों की भी जांच कराएंगे ताकि ऐसी घटनाओं का दोहराव रोका जा सके।
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करीब दो हजार की आबादी वाली भाट कॉलोनी में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि अवैध है। बावजूद इसके डेढ़ साल से अवैध फैक्टरी संचालित होती रही। रंग-गुलाल और स्प्रे से रोजाना लाखों का धंधा चोखा होता रहा। धूल-धुएं की परतें सारे नियम-कायदों के ऊपर चढ़ती रहीं।
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लेकिन, इसकी भनक न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों को हुई और न ही सरकारी खजाना भरने के बहाने गली-गली निगहबानी करने वाले नगर पालिका के कर्मचारियों को। आखिरकार चार महिला मजदूरों की मौत का गुनहगार है कौन?
स्थानीय लोगों ने सफीदों थाना पुलिस से लेकर प्रशासन तक पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि घटनास्थल से करीब 200 मीटर दूर थाना है। यह कैसे संभव है कि इन्हें कोई खबर ही न हो।
फैक्टरी तक रोजाना छोटी गाड़ियां आकर माल ले जाती थीं और कच्चा माल भी पहुंचाया जाता था। आए दिन कबाड़ वाले भी आते रहते थे। इसके बाद भी जानकारी का अभाव कई विभागों की सामूहिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
अवैध फैक्टरी में नहीं थे आग से बचाव के इंतजाम
हादसे में घायल जेठानी की सेवादारी के लिए आईं पिंकी ने बताया कि यह फैक्टरी करीब डेढ़ वर्ष से संचालित हो रही थी। फिलहाल जो महिला-पुरुष यहां काम कर रहे थे, वे तीन महीने पहले ही आए थे। फैक्टरी में सुरक्षा के इंतजाम थे न ही आग से बचाव के उपकरण ही मौजूद थे। रोज मजदूरों के अंदर जाते ही बाहर गेट पर ताला लगा दिया जाता था। शाम को छुट्टी के समय ही ताला खुलता था। उन्होंने केमिकल से रंग बनाने का काम होने के बावजूद प्रशासनिक विभागों के जांच नहीं करने पर भी सवाल उठाए।इनसेट
रिहायशी इलाके की कराएंगे जांच, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई : डीसी
डीसी का कहना है कि रिहायशी इलाके में फैक्टरी चलाने और हादसा होने की जांच कराई जा रही है। इसमें देखेंगे कि कैसे यह फैक्टरी चलती रही और किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके लिए जो भी दोषी मिलेंगे, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस रिहायशी इलाके समेत अन्य क्षेत्रों की भी जांच कराएंगे ताकि ऐसी घटनाओं का दोहराव रोका जा सके।