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Jind News: गांव करसोला की शान हैं महावीर चक्र विजेता कैप्टन फतेह सिंह लाठर
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15 जुलाना 02: डॉ अजमेर लाठर।
- फोटो : गांव डाहिनी में शोक संवेदना व्यक्त करते सपा राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव एवं अन्य। स्रोत संवाद
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जुलाना। गांव करसोला शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ अपनी वीर सैनिक परंपरा के लिए भी जाना जाता है। गांव की पावन धरती ने देश को महावीर चक्र विजेता कैप्टन फतेह सिंह लाठर जैसा वीर सपूत दिया जिनकी बहादुरी और राष्ट्रभक्ति आज भी ग्रामीणों के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। गांव के बुजुर्ग और युवा आज भी उनके साहसिक कारनामों को सम्मान के साथ याद करते हैं।
24 फरवरी 1920 को करसोला गांव के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे फतेह सिंह लाठर ने युवावस्था में ही देश सेवा का संकल्प लिया। इसी भावना के साथ उन्होंने 3 जून 1939 को भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में भर्ती होकर अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने विभिन्न मोर्चों पर अपनी सेवाएं दीं और स्वतंत्रता के बाद कश्मीर क्षेत्र में तैनात रहे। वर्ष 1948 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी वीरता का ऐसा परिचय सामने आया जिसने उन्हें देश के महान योद्धाओं की श्रेणी में खड़ा कर दिया। युद्ध के दौरान उनकी यूनिट दुश्मन सेना से घिर गई थी और कई सैनिक घायल हो चुके थे।
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कठिन परिस्थितियों में फतेह सिंह लाठर को घायल सैनिकों और हथियारों को सुरक्षित वापस लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन की गोलीबारी के बीच पहुंचकर साथियों की मदद की। स्वयं घायल होने के बावजूद उन्होंने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया और अद्भुत साहस का परिचय दिया।
उनकी असाधारण वीरता, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए भारत सरकार ने 14 सितंबर 1948 को उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया। यह देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। उन्होंने 1962 और 1965 के युद्धों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा बाद में कैप्टन पद से सेवानिवृत्त हुए। 17 मई 1987 को उनका निधन हो गया लेकिन उनकी वीरगाथा आज भी करसोला की पहचान बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कैप्टन फतेह सिंह लाठर केवल एक सैनिक नहीं, बल्कि गांव की शान, युवाओं के आदर्श और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं। उनकी गौरवशाली विरासत आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
बाक्स
कैप्टन फतेह सिंह लाठर केवल करसोला ही नहीं, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का गौरव हैं। उनकी वीरता की गाथा नई पीढ़ी को देश सेवा के लिए प्रेरित करती है। - डॉ अजमेर लाठर, ग्रामीण।
बाक्स
गांव के बच्चे जब फतेह सिंह लाठर के संघर्ष और साहस की कहानी सुनते हैं तो उनमें राष्ट्रभक्ति की भावना और मजबूत होती है। यह विरासत गांव की सबसे बड़ी पूंजी है। -चमन नागर, ग्रामीण।
बाक्स
करसोला के लोगों को गर्व है कि उनकी धरती ने महावीर चक्र विजेता जैसा वीर सपूत देश को दिया। उनकी बहादुरी की चर्चा आज भी गांव के बुजुर्गों की जुबान पर रहती है। - वेदमित्र लाठर, ग्रामीण।
बाक्स
कैप्टन फतेह सिंह लाठर का जीवन हमें सिखाता है कि साहस, कर्तव्य और देशभक्ति से बढ़कर कुछ नहीं होता। उनकी वीरता की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। -सुरतपाल सिंह, ग्रामीण।
बाक्स
महावीर चक्र विजेता कैप्टन फतेह सिंह लाठर की वीरता और राष्ट्रसेवा की गाथा करसोला गांव की सबसे बड़ी पहचान है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि साधारण परिवार में जन्मा एक युवा भी अपने साहस और समर्पण से देश के इतिहास में अमिट छाप छोड़ सकता है। - राजकुमार पांचाल
फोटो कैप्शन:
15 जुलाना 01: महावीर चक्र विजेता कैप्टन फतेह सिंह का फाइल फोटो। संवाद
15 जुलाना 02: डॉ अजमेर लाठर।
15 जुलाना 03: चमन नागर ग्रामीण।
15 जुलाना 04: वेदमित्र लाठर ग्रामीण।
15 जुलाना 05: सुरतपाल ग्रामीण।
15 जुलाना 06: राजकुमार पांचाल।
24 फरवरी 1920 को करसोला गांव के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे फतेह सिंह लाठर ने युवावस्था में ही देश सेवा का संकल्प लिया। इसी भावना के साथ उन्होंने 3 जून 1939 को भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में भर्ती होकर अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की।
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द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने विभिन्न मोर्चों पर अपनी सेवाएं दीं और स्वतंत्रता के बाद कश्मीर क्षेत्र में तैनात रहे। वर्ष 1948 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी वीरता का ऐसा परिचय सामने आया जिसने उन्हें देश के महान योद्धाओं की श्रेणी में खड़ा कर दिया। युद्ध के दौरान उनकी यूनिट दुश्मन सेना से घिर गई थी और कई सैनिक घायल हो चुके थे।
कठिन परिस्थितियों में फतेह सिंह लाठर को घायल सैनिकों और हथियारों को सुरक्षित वापस लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन की गोलीबारी के बीच पहुंचकर साथियों की मदद की। स्वयं घायल होने के बावजूद उन्होंने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया और अद्भुत साहस का परिचय दिया।
उनकी असाधारण वीरता, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए भारत सरकार ने 14 सितंबर 1948 को उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया। यह देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। उन्होंने 1962 और 1965 के युद्धों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा बाद में कैप्टन पद से सेवानिवृत्त हुए। 17 मई 1987 को उनका निधन हो गया लेकिन उनकी वीरगाथा आज भी करसोला की पहचान बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कैप्टन फतेह सिंह लाठर केवल एक सैनिक नहीं, बल्कि गांव की शान, युवाओं के आदर्श और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं। उनकी गौरवशाली विरासत आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
बाक्स
कैप्टन फतेह सिंह लाठर केवल करसोला ही नहीं, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का गौरव हैं। उनकी वीरता की गाथा नई पीढ़ी को देश सेवा के लिए प्रेरित करती है। - डॉ अजमेर लाठर, ग्रामीण।
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गांव के बच्चे जब फतेह सिंह लाठर के संघर्ष और साहस की कहानी सुनते हैं तो उनमें राष्ट्रभक्ति की भावना और मजबूत होती है। यह विरासत गांव की सबसे बड़ी पूंजी है। -चमन नागर, ग्रामीण।
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करसोला के लोगों को गर्व है कि उनकी धरती ने महावीर चक्र विजेता जैसा वीर सपूत देश को दिया। उनकी बहादुरी की चर्चा आज भी गांव के बुजुर्गों की जुबान पर रहती है। - वेदमित्र लाठर, ग्रामीण।
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कैप्टन फतेह सिंह लाठर का जीवन हमें सिखाता है कि साहस, कर्तव्य और देशभक्ति से बढ़कर कुछ नहीं होता। उनकी वीरता की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। -सुरतपाल सिंह, ग्रामीण।
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महावीर चक्र विजेता कैप्टन फतेह सिंह लाठर की वीरता और राष्ट्रसेवा की गाथा करसोला गांव की सबसे बड़ी पहचान है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि साधारण परिवार में जन्मा एक युवा भी अपने साहस और समर्पण से देश के इतिहास में अमिट छाप छोड़ सकता है। - राजकुमार पांचाल
फोटो कैप्शन:
15 जुलाना 01: महावीर चक्र विजेता कैप्टन फतेह सिंह का फाइल फोटो। संवाद
15 जुलाना 02: डॉ अजमेर लाठर।
15 जुलाना 03: चमन नागर ग्रामीण।
15 जुलाना 04: वेदमित्र लाठर ग्रामीण।
15 जुलाना 05: सुरतपाल ग्रामीण।
15 जुलाना 06: राजकुमार पांचाल।

15 जुलाना 02: डॉ अजमेर लाठर।- फोटो : गांव डाहिनी में शोक संवेदना व्यक्त करते सपा राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव एवं अन्य। स्रोत संवाद

15 जुलाना 02: डॉ अजमेर लाठर।- फोटो : गांव डाहिनी में शोक संवेदना व्यक्त करते सपा राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव एवं अन्य। स्रोत संवाद

15 जुलाना 02: डॉ अजमेर लाठर।- फोटो : गांव डाहिनी में शोक संवेदना व्यक्त करते सपा राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव एवं अन्य। स्रोत संवाद

15 जुलाना 02: डॉ अजमेर लाठर।- फोटो : गांव डाहिनी में शोक संवेदना व्यक्त करते सपा राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव एवं अन्य। स्रोत संवाद