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प्राकृतिक खेती से घटती लागत और बढ़ती उर्वरता : डॉ. अनीश पंवार
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17जेएनडी26: डॉ. अनीश पंवार ढाठरथ गांव में किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक करते हुए
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जींद। ढाटरथ गांव में आयोजित किसान जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में खंड तकनीकी प्रबंधक डॉ. अनीश पंवार ने प्राकृतिक खेती के महत्व, इसके लाभ और आधुनिक कृषि में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
डॉ. अनीश पंवार ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक लाभकारी और टिकाऊ विकल्प है। इससे खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को जीरो बजट खेती भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें किसानों को बाजार से महंगे उर्वरक या कीटनाशक खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान अपने घर और खेत में उपलब्ध संसाधनों से ही विभिन्न पोषक तत्व एवं जैविक कीटनाशक तैयार कर सकते हैं।
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उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से बचने का आह्वान किया, क्योंकि इनका लगातार प्रयोग मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करता है तथा पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसके विपरीत प्राकृतिक खेती से तैयार होने वाली फसलें अधिक पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होती हैं।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, ब्रह्मास्त्र और मलचिंग सहित प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही इन तकनीकों के प्रयोग से फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और लागत कम करने के उपाय भी समझाए गए। किसानों ने कार्यक्रम में विशेष रुचि दिखाई और प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर कई प्रश्न पूछे।
डॉ. पंवार ने उनके सवालों का विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए व्यवहारिक जानकारी साझा की। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना की और कहा कि इससे उन्हें नई तकनीकों को समझने और खेती में अपनाने की प्रेरणा मिलती है। इस अवसर पर सत्यपाल प्रौद्योगिकी प्रबंधक, सुनील कुमार और ईश्वरदत्त मौजूद रहे।
डॉ. अनीश पंवार ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक लाभकारी और टिकाऊ विकल्प है। इससे खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।
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उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को जीरो बजट खेती भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें किसानों को बाजार से महंगे उर्वरक या कीटनाशक खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान अपने घर और खेत में उपलब्ध संसाधनों से ही विभिन्न पोषक तत्व एवं जैविक कीटनाशक तैयार कर सकते हैं।
उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से बचने का आह्वान किया, क्योंकि इनका लगातार प्रयोग मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करता है तथा पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसके विपरीत प्राकृतिक खेती से तैयार होने वाली फसलें अधिक पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होती हैं।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, ब्रह्मास्त्र और मलचिंग सहित प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही इन तकनीकों के प्रयोग से फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और लागत कम करने के उपाय भी समझाए गए। किसानों ने कार्यक्रम में विशेष रुचि दिखाई और प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर कई प्रश्न पूछे।
डॉ. पंवार ने उनके सवालों का विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए व्यवहारिक जानकारी साझा की। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना की और कहा कि इससे उन्हें नई तकनीकों को समझने और खेती में अपनाने की प्रेरणा मिलती है। इस अवसर पर सत्यपाल प्रौद्योगिकी प्रबंधक, सुनील कुमार और ईश्वरदत्त मौजूद रहे।