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Jind News: आषाढ़ अमावस्या पर सुबह स्नान के बाद पितरों का तर्पण करें
Sun, 12 Jul 2026 05:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 12 Jul 2026 05:51 PM IST
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फोटो 12जेएनडी05-सत्यनारायण शास्त्री।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उचाना। आषाढ़ मास की अमावस्या 14 जुलाई को मनाई जाएगी। धार्मिक दृष्टि से यह दिन पितरों के तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य के लिए पुण्यदायी माना गया है।
राधा-कृष्ण प्राचीन मंदिर पुजारी सत्यनारायण शांडिल्य ने बताया कि इस दिन विधि-विधान से किए गए धार्मिक कार्य सीधे पितरों तक पहुंचते हैं। इससे पितृदोष के प्रभाव में कमी आती है और परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। उन्होंने बताया कि अमावस्या तिथि 13 जुलाई को शाम छह बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 14 जुलाई दोपहर तीन बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी।
उदया तिथि के अनुसार अमावस्या व्रत और पूजा 14 जुलाई को की जाएगी। आषाढ़ अमावस्या के दिन प्रात:काल स्नान के बाद पितरों का तर्पण करें। पीपल वृक्ष पर जल अर्पित कर दीपक जलाएं तथा परिक्रमा करें। इसके साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल एवं दक्षिणा का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
गाय, कौए और कुत्ते को भोजन कराने का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन उपायों से पितरों की कृपा प्राप्त होती है, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि आषाढ़ अमावस्या पर अपने पूर्वजों का स्मरण करें, धर्म-कर्म और दान-पुण्य के कार्यों में भाग लें और परिवार की सुख-समृद्धि और पितरों के आशीर्वाद की कामना करें।
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उचाना। आषाढ़ मास की अमावस्या 14 जुलाई को मनाई जाएगी। धार्मिक दृष्टि से यह दिन पितरों के तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य के लिए पुण्यदायी माना गया है।
राधा-कृष्ण प्राचीन मंदिर पुजारी सत्यनारायण शांडिल्य ने बताया कि इस दिन विधि-विधान से किए गए धार्मिक कार्य सीधे पितरों तक पहुंचते हैं। इससे पितृदोष के प्रभाव में कमी आती है और परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। उन्होंने बताया कि अमावस्या तिथि 13 जुलाई को शाम छह बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 14 जुलाई दोपहर तीन बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी।
उदया तिथि के अनुसार अमावस्या व्रत और पूजा 14 जुलाई को की जाएगी। आषाढ़ अमावस्या के दिन प्रात:काल स्नान के बाद पितरों का तर्पण करें। पीपल वृक्ष पर जल अर्पित कर दीपक जलाएं तथा परिक्रमा करें। इसके साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल एवं दक्षिणा का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
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गाय, कौए और कुत्ते को भोजन कराने का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन उपायों से पितरों की कृपा प्राप्त होती है, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि आषाढ़ अमावस्या पर अपने पूर्वजों का स्मरण करें, धर्म-कर्म और दान-पुण्य के कार्यों में भाग लें और परिवार की सुख-समृद्धि और पितरों के आशीर्वाद की कामना करें।
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