जींद। जिले के पिल्लूखेड़ा क्षेत्र में मानसून की पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की फसल पर संकट गहराता जा रहा है। कई गांवों में खेतों में नमी की कमी के कारण दरारें पड़ गई हैं और धान की फसल सूखने लगी है। फसल खराब होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब किसान अच्छी बारिश के इंतजार में टकटकी लगाए हुए हैं। पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के मोरखी, पिल्लूखेड़ा, मालसरी खेड़ा, लुदाना और भिड़ताना समेत कई गांवों में धान की फसल प्रभावित हुई है। कुछ किसानों के खेतों में फसल पूरी तरह खराब हो गई जिसके बाद उन्होंने उसे नष्ट कर दोबारा धान की रोपाई की है। इससे किसानों पर बीज, मजदूरी और खेत तैयार करने का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है।
किसानों सुनील मराठा, योगेश कुमार, अमर सिंह, सतबीर और मनफूल ने बताया कि धान की फसल के लिए इस समय पर्याप्त पानी की जरूरत है लेकिन बारिश नहीं होने से खेतों में नमी लगातार कम हो रही है। जिन खेतों में फसल ज्यादा खराब हो गई थी, वहां दोबारा रोपाई करनी पड़ी। इससे पहले की लागत के साथ दोबारा बीज और मजदूरी का खर्च भी उठाना पड़ा है। कुछ किसान ट्यूबवेल और अन्य सिंचाई साधनों से फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं। मौसम वैज्ञानिक डॉ. राजेश, जींद ने बताया कि आगामी दिनों में जिले में बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है।