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Jind News: युवाओं को टीबी के खिलाफ जागरूक किया
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25जेएनडी21: माई भारत वॉलंटियर्स के लिए टीबी उन्मूलन प्रशिक्षण में मौजूद छात्र और छात्राएं। स्रो
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जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में बुधवार को कंप्यूटर इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर की तरफ से माई भारत वॉलंटियर्स के लिए राष्ट्रीय टीबी रोग उन्मूलन विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम डॉ. अमित कुमार, सिस्टम एनालिस्ट, के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को टीबी के खिलाफ जागरूक करना करना था। कार्यक्रम में माई भारत वॉलंटियर्स के साथ-साथ मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने भी सक्रिय सहभागिता की।
डॉ. कोमल एवं डॉ. संदीप गोयत, दस्तावेज़ कार्यक्रम कोऑर्डिनेटर ने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु के कारण होती है और फेफड़ों को प्रभावित करती है।
उन्होंने कहा कि सही जानकारी और नियमित इलाज से यह पूरी तरह ठीक हो सकती है। विशेषज्ञों ने बताया कि विश्व स्तर पर टीबी अभी भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। कार्यक्रम के दौरान टीबी के प्रमुख लक्षणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई जिनमें दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना और अत्यधिक कमजोरी शामिल हैं।
समाज के सभी वर्गों से अपील की गई कि वे टीबी के प्रति जागरूक बनें, लक्षणों को नजरअंदाज न करें और उपचार को बीच में न छोड़ें। सभी ने मिलकर टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने का आह्वान किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजेश कुमार बंसल, डॉ. अमित कुमार डॉ. कोमल, डॉ. संदीप गोयत मौजूद रहे।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को टीबी के खिलाफ जागरूक करना करना था। कार्यक्रम में माई भारत वॉलंटियर्स के साथ-साथ मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने भी सक्रिय सहभागिता की।
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डॉ. कोमल एवं डॉ. संदीप गोयत, दस्तावेज़ कार्यक्रम कोऑर्डिनेटर ने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु के कारण होती है और फेफड़ों को प्रभावित करती है।
उन्होंने कहा कि सही जानकारी और नियमित इलाज से यह पूरी तरह ठीक हो सकती है। विशेषज्ञों ने बताया कि विश्व स्तर पर टीबी अभी भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। कार्यक्रम के दौरान टीबी के प्रमुख लक्षणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई जिनमें दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना और अत्यधिक कमजोरी शामिल हैं।
समाज के सभी वर्गों से अपील की गई कि वे टीबी के प्रति जागरूक बनें, लक्षणों को नजरअंदाज न करें और उपचार को बीच में न छोड़ें। सभी ने मिलकर टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने का आह्वान किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजेश कुमार बंसल, डॉ. अमित कुमार डॉ. कोमल, डॉ. संदीप गोयत मौजूद रहे।