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Jind News: खटकड़ गांव की रेणू बनीं ड्रोन दीदी, पेश की महिला सशक्तीकरण की मिसाल
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18जेएनडी17: खेतों में ड्रोन उड़ाती रेणू खटकड़। संवाद
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जींद। जिले के खटकड़ गांव की रेणू आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए उन्होंने खेती में ड्रोन का उपयोग कर महिला सशक्तीकरण की मिसाल पेश की है। गांव में लोग अब रेणू को ड्रोन दीदी के नाम से पुकारते हैं।
रेणू बताती हैं कि करीब तीन साल पहले 2022 में उन्होंने गुरुग्राम में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लिया था। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने खेती में ड्रोन से कीटनाशक और खाद के छिड़काव का काम शुरू किया।
शुरुआत में चुनौतियां जरूर आईं लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पहले साल उन्हें महज 150 एकड़ में ही ड्रोन से स्प्रे का काम मिला लेकिन उनकी मेहनत और सटीक कार्यशैली के चलते आज यह आंकड़ा बढ़कर 1000 एकड़ तक पहुंच गया है।
अब प्रदेश के विभिन्न जिलों से किसान उन्हें फोन और मोबाइल एप के माध्यम से ऑर्डर देते हैं और वे अपनी टीम के साथ वहां पहुंचकर काम करती हैं।
प्रति एकड़ 300 रुपये लेती हैं शुल्क
रेणू बताती हैं कि वे प्रति एकड़ करीब 300 रुपये तक शुल्क लेती हैं। ड्रोन तकनीक से कम समय में अधिक क्षेत्र में सटीक छिड़काव संभव हो पाता है। इससे फसल को भी नुकसान नहीं होता और उत्पादन में भी सुधार आता है। कपास, सब्जियां, गन्ना और बागवानी जैसी फसलों में किसान अब तेजी से ड्रोन से स्प्रे करवाने लगे हैं। इससे न केवल मजदूरी की लागत घट रही है बल्कि किसानों को जहरीले रसायनों के सीधे संपर्क से भी राहत मिल रही है।
शुरुआत में लोगों को भरोसा दिलाना बड़ी चुनौती थी
रेणू बताती हैं कि शुरुआत में लोगों को भरोसा दिलाना सबसे बड़ी चुनौती थी लेकिन अब उनकी मेहनत रंग ला रही है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में वे और महिलाओं को इस क्षेत्र से जोड़ेंगी ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें। रेणू का कहना है कि अगर हौसला और मेहनत हो तो कोई भी महिला किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती है।
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रेणू बताती हैं कि करीब तीन साल पहले 2022 में उन्होंने गुरुग्राम में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लिया था। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने खेती में ड्रोन से कीटनाशक और खाद के छिड़काव का काम शुरू किया।
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शुरुआत में चुनौतियां जरूर आईं लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पहले साल उन्हें महज 150 एकड़ में ही ड्रोन से स्प्रे का काम मिला लेकिन उनकी मेहनत और सटीक कार्यशैली के चलते आज यह आंकड़ा बढ़कर 1000 एकड़ तक पहुंच गया है।
अब प्रदेश के विभिन्न जिलों से किसान उन्हें फोन और मोबाइल एप के माध्यम से ऑर्डर देते हैं और वे अपनी टीम के साथ वहां पहुंचकर काम करती हैं।
प्रति एकड़ 300 रुपये लेती हैं शुल्क
रेणू बताती हैं कि वे प्रति एकड़ करीब 300 रुपये तक शुल्क लेती हैं। ड्रोन तकनीक से कम समय में अधिक क्षेत्र में सटीक छिड़काव संभव हो पाता है। इससे फसल को भी नुकसान नहीं होता और उत्पादन में भी सुधार आता है। कपास, सब्जियां, गन्ना और बागवानी जैसी फसलों में किसान अब तेजी से ड्रोन से स्प्रे करवाने लगे हैं। इससे न केवल मजदूरी की लागत घट रही है बल्कि किसानों को जहरीले रसायनों के सीधे संपर्क से भी राहत मिल रही है।
शुरुआत में लोगों को भरोसा दिलाना बड़ी चुनौती थी
रेणू बताती हैं कि शुरुआत में लोगों को भरोसा दिलाना सबसे बड़ी चुनौती थी लेकिन अब उनकी मेहनत रंग ला रही है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में वे और महिलाओं को इस क्षेत्र से जोड़ेंगी ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें। रेणू का कहना है कि अगर हौसला और मेहनत हो तो कोई भी महिला किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती है।