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Jind News: शिक्षाविद डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी के साहित्य पर होगा शोध
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07जेएनडी03:डॉ.धर्मदेव विद्यार्थी।
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जींद। शिक्षा, साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी के साहित्य पर अब शोधार्थी पीएचडी करेंगे। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, रोहतक की शोध समिति ने धर्मदेव विद्यार्थी साहित्य के विविध आयाम विषय पर शोध कार्य को मंजूरी दी है।
विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में हुई शोध समिति की बैठक के बाद जारी पत्र के अनुसार हिसार निवासी शोधार्थी संदीप कुमार को इस विषय पर पीएचडी करने की अनुमति प्रदान की गई है।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. बाबूराम ने स्वीकृति पत्र डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी को सौंपते हुए कहा कि हरियाणा के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रदेश के एक साहित्यकार के बहुआयामी साहित्य पर विश्वविद्यालय स्तर पर शोध किया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि डॉ. विद्यार्थी अब तक इतिहास, योग, समाज सुधार, भाषा विज्ञान और महापुरुषों पर आधारित चित्रकथाओं सहित विभिन्न विषयों पर 58 पुस्तकें लिख चुके हैं। उनकी अनेक कृतियां राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हो चुकी हैं। डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी ने हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, संस्कृत और हरियाणवी सहित पांच भाषाओं में गद्य और पद्य साहित्य का सृजन किया है।
उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। पिछले 45 वर्षों से शिक्षा जगत में सक्रिय डॉ. विद्यार्थी राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान, रेड एंड व्हाइट ब्रेवरी अवार्ड तथा समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी स्थान प्राप्त कर चुके हैं।
डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी ने विश्वविद्यालय प्रशासन और हिंदी विभाग का आभार जताते हुए कहा कि इस शोध से उनके साहित्य के नए आयाम सामने आएंगे और युवा शोधार्थियों को साहित्य सृजन के लिए प्रेरणा मिलेगी।
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विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में हुई शोध समिति की बैठक के बाद जारी पत्र के अनुसार हिसार निवासी शोधार्थी संदीप कुमार को इस विषय पर पीएचडी करने की अनुमति प्रदान की गई है।
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हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. बाबूराम ने स्वीकृति पत्र डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी को सौंपते हुए कहा कि हरियाणा के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रदेश के एक साहित्यकार के बहुआयामी साहित्य पर विश्वविद्यालय स्तर पर शोध किया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि डॉ. विद्यार्थी अब तक इतिहास, योग, समाज सुधार, भाषा विज्ञान और महापुरुषों पर आधारित चित्रकथाओं सहित विभिन्न विषयों पर 58 पुस्तकें लिख चुके हैं। उनकी अनेक कृतियां राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हो चुकी हैं। डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी ने हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, संस्कृत और हरियाणवी सहित पांच भाषाओं में गद्य और पद्य साहित्य का सृजन किया है।
उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। पिछले 45 वर्षों से शिक्षा जगत में सक्रिय डॉ. विद्यार्थी राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान, रेड एंड व्हाइट ब्रेवरी अवार्ड तथा समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी स्थान प्राप्त कर चुके हैं।
डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी ने विश्वविद्यालय प्रशासन और हिंदी विभाग का आभार जताते हुए कहा कि इस शोध से उनके साहित्य के नए आयाम सामने आएंगे और युवा शोधार्थियों को साहित्य सृजन के लिए प्रेरणा मिलेगी।