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लक्ष्य का निर्धारण जीवन में सबसे जरूरी : अशोक पुजारी
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जींद। मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सफलता नहीं बल्कि आत्मिक शांति और संतुलन प्राप्त करना भी है। महाराजा अग्रसेन पुजारी अशोक शर्मा ने कहा कि इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सबसे पहले जरूरी है लक्ष्य का निर्धारण।
लक्ष्य विहीन जीवन दिशाहीन जहाज के समान होता है जो किसी भी तूफान में डगमगा सकता है। पंचम काल के इस युग में भी अगर हम सही सोच रखें तो प्रकृति की सारी शक्तियां हमारे साथ हो जाती हैं। महापुरूषों ने स्वयं अपने जीवन से यह उदाहरण दिए है कि चुनौतियों से डरना नहीं उन्हें आत्मबल से पार करना ही धर्म है।
सफलता हमेशा हमारे हाथ में नहीं होती लेकिन कैसी सोच रखनी है यह पूरी तरह हमारे हाथ में होता है। उन्होंने कहा कि नकारात्मकता से घिरे रहना आत्मा की शक्ति को क्षीण करता है जबकि सकारात्मक विचार जीवन को ऊर्जावान बनाते हैं। अपने विचारों को शुद्ध, स्पष्ट और सकारात्मक बनाए रखें। जब मन निर्मल होगा तभी जीवन सार्थक होगा।
भगवान से सच्चा नाता जोड़ने वाला भक्त कभी अकेला नहीं रहता। भगवान को जो एक बार पकड़ लेता है, उसका साथ भगवान कभी नहीं छोड़ते।बीता हुआ समय वापस नहीं आता, इसलिए धर्म कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। यज्ञ करने और उसमें सहभागिता से पितृ प्रसन्न होते हैं तथा भगवान की कृपा प्राप्त होती है। यज्ञ में शारीरिक और आर्थिक सहयोग करने वाले भी पुण्य के भागी बनते हैं।
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सफलता हमेशा हमारे हाथ में नहीं होती लेकिन कैसी सोच रखनी है यह पूरी तरह हमारे हाथ में होता है। उन्होंने कहा कि नकारात्मकता से घिरे रहना आत्मा की शक्ति को क्षीण करता है जबकि सकारात्मक विचार जीवन को ऊर्जावान बनाते हैं। अपने विचारों को शुद्ध, स्पष्ट और सकारात्मक बनाए रखें। जब मन निर्मल होगा तभी जीवन सार्थक होगा।
भगवान से सच्चा नाता जोड़ने वाला भक्त कभी अकेला नहीं रहता। भगवान को जो एक बार पकड़ लेता है, उसका साथ भगवान कभी नहीं छोड़ते।बीता हुआ समय वापस नहीं आता, इसलिए धर्म कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। यज्ञ करने और उसमें सहभागिता से पितृ प्रसन्न होते हैं तथा भगवान की कृपा प्राप्त होती है। यज्ञ में शारीरिक और आर्थिक सहयोग करने वाले भी पुण्य के भागी बनते हैं।
