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Jind News: शिविर में विद्यार्थियों को बताई शहरों की विशेषताएं
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02जेएनडी12-गर्मी सीजन शिविर के अंतिम दिन अध्यापक और छात्र-छात्राएं। स्रोत संस्थान
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नरवाना। राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बेलरखा में चल रहे भारतीय भाषा गर्मी सीजन शिविर का मंगलवार को समापन हो गया। शिविर में विद्यार्थियों ने भाषाई दक्षता और संवाद कौशल को निखारा।
प्रधानाचार्य बलजीत गोयत ने विद्यार्थियों को भारत के प्रमुख शहरों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न राज्यों के प्रसिद्ध शहरों की पहचान, वहां की भाषा, संस्कृति, परंपराओं और विशेषताओं के बारे में बताया। शिविर के दौरान विद्यार्थियों को शहरों से संबंधित सामान्य बातचीत, बाजार, विद्यालय और दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले संवादों का अभ्यास कराया गया।
साथ ही विद्यार्थियों को प्रभावी ढंग से प्रश्न पूछने और उनके सटीक उत्तर देने की कला भी सिखाई गई। समूह आधारित गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया गया।
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इस अवसर पर आयोजित संवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी भाषा क्षमता तथा अभिव्यक्ति कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों के आत्मविश्वास और प्रस्तुति की सराहना की गई।
अध्यापक प्रदीप जागलान ने बताया कि इस तरह के शिविर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारतीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर है और इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इस अवसर पर प्राध्यापिका राजबाला, सुनीता, सुमन मौजूद रही।
प्रधानाचार्य बलजीत गोयत ने विद्यार्थियों को भारत के प्रमुख शहरों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न राज्यों के प्रसिद्ध शहरों की पहचान, वहां की भाषा, संस्कृति, परंपराओं और विशेषताओं के बारे में बताया। शिविर के दौरान विद्यार्थियों को शहरों से संबंधित सामान्य बातचीत, बाजार, विद्यालय और दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले संवादों का अभ्यास कराया गया।
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साथ ही विद्यार्थियों को प्रभावी ढंग से प्रश्न पूछने और उनके सटीक उत्तर देने की कला भी सिखाई गई। समूह आधारित गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया गया।
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अध्यापक प्रदीप जागलान ने बताया कि इस तरह के शिविर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारतीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर है और इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इस अवसर पर प्राध्यापिका राजबाला, सुनीता, सुमन मौजूद रही।