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Jind News: ठगों ने डराया, पुलिस ने दौड़ाया, एफआईआर में घिस गईं एड़ियां

संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Mon, 16 Feb 2026 12:36 AM IST
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Thugs threatened, police chased, FIRs dragged on their heels
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जींद। साइबर ठगी के एक मामले में प्राथमिकी दर्ज करने में पुलिस ने डेढ़ साल लगा दिए। एफआईआर दर्ज कराने के लिए पीड़ित महिला कभी इस थाने तो कभी उस थाने एड़ियां घिसती रही। आखिर में मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। मानवाधिकार आयोग ने मामले में कार्रवाई नहीं होने पर 17 मार्च को जांच अधिकारी को तलब किया है।
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नरवाना के बीरबल नगर की रहने वाली नीतू ने बताया कि जुलाई 2024 को उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर ठगों ने 81 हजार रुपये की ठगी कर ली थी। जब वे साइबर थाने गईं तो ठगी की राशि एक लाख से कम बताकर उन्हें नरवाना पुलिस थाने भेज दिया गया।
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जब वे नरवाना शहर थाने गईं तो पुलिस ने बताया कि उनके पास साइबर अपराध की जांच के लिए उपकरण नहीं हैं। नीतू ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों का व्यवहार भी उनके प्रति अच्छा नहीं रहा। जब पुलिस के कार्रवाई नहीं की तो करीब छह माह पहले उन्होंने मानवाधिकार आयोग को शिकायत दी थी।
आयोग ने एसपी कुलदीप सिंह से कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कार्रवाई नहीं होने पर जांच अधिकारी को 17 मार्च को तलब किया है। इसके बाद आनन-फानन में एएसपी सोनाक्षी सिंह के आदेश पर शनिवार को एफआईआर दर्ज की गई है।
मनी लॉन्ड्रिंग केस में नाम दिखाकर ठगे थे 81 हजार
नीतू ने बताया कि 15 और 16 जुलाई 2024 को उनके पास अलग-अलग नंबरों से कॉल आई। ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस और सीबीआई अफसर बताकर बात की। कहा, उनके आधार कार्ड पर एक फर्जी सिम चल रहा है। इसका इस्तेमाल एक कंपनी ने मनी लॉन्ड्रिंग में किया है। धमकाया गया कि उसका नाम जेट फाउंडर से जुड़े 538 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है। जालसाजों ने धमकाया कि उसे मुंबई के अंधेरी ईस्ट पुलिस स्टेशन आना होगा। जब उसने बीमारी का हवाला दिया तो आरोपियों ने उसे डिजिटल अरेस्ट कर लिया। दो दिनों तक स्काइप वीडियो कॉल पर रहने और किसी को न बताने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई और ट्राई के फर्जी दस्तावेज दिखाए। उसके बैंक खातों की जांच के नाम पर निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश की। ठगों ने भरोसा दिलाया कि बैंक ट्रांजेक्शन वेरिफाई करने के बाद ही केस से नाम हटेगा। डर के साये में उसने पहले 50 हजार रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद 31 हजार एक अन्य बैंक खाते में भेजे। जब ठगों ने डेढ़ लाख की और मांग की तब डिजिटल फ्रॉड का पता चला।
वर्जन-



-इस मामले को लेकर तीन-चार दिन पहले ही मानवाधिकार आयोग से पत्र आया है। मामले की जांच के लिए एएसपी सोनाक्षी सिंह को निर्देश दिए थे। जांच में इस घटना की पुष्टी हुई है। उसके बाद साइबर थाना पुलिस ने धोखाधड़ी में एफआईआर दर्ज कर ली है।

-कुलदीप सिंह, एसपी जींद।
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