{"_id":"6a3980afaa10d9e8c303cc83","slug":"ultrasound-service-stalled-due-to-lack-of-radiologist-machine-sealed-for-three-months-jind-news-c-199-1-sroh1009-155518-2026-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में अल्ट्रासाउंड सेवा ठप, तीन माह से बंद मशीन सील","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में अल्ट्रासाउंड सेवा ठप, तीन माह से बंद मशीन सील
विज्ञापन
22जेएनडी10: नागरिक अस्पताल में बंद किया गया अल्ट्रासाउंड मशीन का 28 नंबर कमरा। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जींद। नागरिक अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण अल्ट्रासाउंड सेवा पूरी तरह से ठप हो चुकी थी। तीन माह से बंद पड़ी मशीन को को सुरक्षा की दृष्टि से सील कर दिया गया है।
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1700 से अधिक ओपीडी होती है। अब सामान्य मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल में करीब 11 वर्ष बाद अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा शुरू हुई थी। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिली थी, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के तबादले के बाद यह सेवा फिर से प्रभावित हो गई।
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1700 से ज्यादा ओपीडी होती है। अब सामान्य मरीजों की जेब पर भार पड़ रहा है। मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल में करीब 11 वर्ष बाद अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा शुरू हुई थी। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिली थी लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के तबादले के बाद यह सेवा दोबारा प्रभावित हो गई।
विज्ञापन
डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होने के कारण तीन माह से मशीन बंद पड़ी थी। इसके बाद पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश भोला और डॉ. वंदना ने मशीन को सुरक्षा की दृष्टि से सील कर दिया ताकि लंबे समय तक बंद रहने के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी क्षति या अनधिकृत उपयोग की आशंका न रहे।
जिला मुख्यालय के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी सुविधा का बंद होना चिंता का विषय है। स्वास्थ्य विभाग से जल्द रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति कर मशीन को दोबारा शुरू करने की मांग की गई है ताकि मरीजों को निजी अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें सस्ती एवं सुलभ जांच सुविधा मिल सके।
मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा
अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद होने से सबसे अधिक परेशानी सामान्य मरीजों को उठानी पड़ रही है। पेट दर्द, पथरी, लीवर और अन्य बीमारियों की जांच के लिए आने वाले मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां 700 से 800 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। हालांकि गर्भवतियों को परेशानी से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शहर के 15 निजी अस्पतालों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के साथ समझौता किया हुआ है। इसके तहत प्रसूति संबंधी जांच के लिए आने वाली महिलाओं के अल्ट्रासाउंड निजी केंद्रों पर कराए जा रहे हैं, ताकि उन्हें समय पर जांच सुविधा मिल सके।
बाक्स
अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण मशीन को सुरक्षा के चलते सील किया गया है। रेडियोलॉजिस्ट की मांग मुख्यालय से की है। जब भी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति होगी मशीन की सील हटा दी जाएगी।
-डॉ. रघुवीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद।
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1700 से अधिक ओपीडी होती है। अब सामान्य मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल में करीब 11 वर्ष बाद अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा शुरू हुई थी। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिली थी, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के तबादले के बाद यह सेवा फिर से प्रभावित हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1700 से ज्यादा ओपीडी होती है। अब सामान्य मरीजों की जेब पर भार पड़ रहा है। मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल में करीब 11 वर्ष बाद अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा शुरू हुई थी। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिली थी लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के तबादले के बाद यह सेवा दोबारा प्रभावित हो गई।
डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होने के कारण तीन माह से मशीन बंद पड़ी थी। इसके बाद पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश भोला और डॉ. वंदना ने मशीन को सुरक्षा की दृष्टि से सील कर दिया ताकि लंबे समय तक बंद रहने के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी क्षति या अनधिकृत उपयोग की आशंका न रहे।
जिला मुख्यालय के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी सुविधा का बंद होना चिंता का विषय है। स्वास्थ्य विभाग से जल्द रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति कर मशीन को दोबारा शुरू करने की मांग की गई है ताकि मरीजों को निजी अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें सस्ती एवं सुलभ जांच सुविधा मिल सके।
मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा
अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद होने से सबसे अधिक परेशानी सामान्य मरीजों को उठानी पड़ रही है। पेट दर्द, पथरी, लीवर और अन्य बीमारियों की जांच के लिए आने वाले मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां 700 से 800 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। हालांकि गर्भवतियों को परेशानी से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शहर के 15 निजी अस्पतालों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के साथ समझौता किया हुआ है। इसके तहत प्रसूति संबंधी जांच के लिए आने वाली महिलाओं के अल्ट्रासाउंड निजी केंद्रों पर कराए जा रहे हैं, ताकि उन्हें समय पर जांच सुविधा मिल सके।
बाक्स
अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण मशीन को सुरक्षा के चलते सील किया गया है। रेडियोलॉजिस्ट की मांग मुख्यालय से की है। जब भी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति होगी मशीन की सील हटा दी जाएगी।
-डॉ. रघुवीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद।