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Kaithal News: समर्थन में उतरे बात्ता के ग्रामीणों का शिष्टमंडल एसपी से मिला
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 18 Mar 2026 01:28 AM IST
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33 पुलिस अधीक्षक से मिलने लघु सचिवालय में पहुंचे बाता गांव के ग्रामीण व महंत
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। बात्ता गांव स्थित डेरा बाबा राजपुरी के विवाद के मुद्दे पर ग्रामीणों का एक शिष्टमंडल पुलिस अधीक्षक से मिला। शिष्टमंडल में मठ के महंत नरेश पुरी सहित गांव के 100 से अधिक लोग शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल में पंच रूप राणा, पूर्व सरपंच पवन शर्मा, दिलबाग राणा, साहिब सिंह सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डेरा के पूर्व महंत सोमपुरी वर्तमान महंत नरेश पुरी से पैसे की मांग कर रहे हैं और उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से बार-बार पुलिस व प्रशासन के पास झूठी शिकायतें दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार अधिकारियों के पास जाने से डेरा, गौशाला और अन्य व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस अधीक्षक के समक्ष पूरे मामले को विस्तार से रखा गया, जिसके बाद एसपी ने आश्वासन दिया कि भविष्य में यदि नरेश पुरी के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो पुलिस उन्हें मुख्यालय बुलाने के बजाय मठ या डेरा में जाकर ही उनका पक्ष सुनेगी। इस पर ग्रामीणों ने एसपी का आभार जताया।
2018 में नरेश पुरी को सौंपी गई थी महंती : ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2010 में बाबा ओमपुरी के निधन के बाद उनके शिष्य सोमपुरी को गद्दी सौंपी गई थी, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।
वर्ष 2018 में एक वीडियो वायरल होने के बाद सोमपुरी डेरा छोड़कर चले गए। इसके बाद गांव की 21 सदस्यीय कमेटी ने सर्वसम्मति से महंत नरेश पुरी को गद्दी सौंपी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में पूर्व महंत सोमपुरी वापस आए और कलायत एसडीएम कार्यालय में बयान दर्ज करवाकर डेरा की भूमि का इंतकाल नरेश पुरी के नाम पर कराया।
पूर्व महंत पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप : ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व महंत के कार्यकाल में डेरा पर लगभग ढाई करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। वहीं, नरेश पुरी के कार्यभार संभालने के बाद डेरा को कर्जमुक्त कर विकास कार्यों को गति दी गई है।
ग्रामीणों ने कहा कि वर्तमान में डेरा, गोशाला और भूमि के रखरखाव को लेकर गांव पूरी तरह संतुष्ट है और महंत नरेश पुरी के समर्थन में खड़ा है।
लगभग 330 साल पुराना है डेरा बाबा राजपुरी
पूर्व सरपंच पवन शर्मा और पूर्व पंच रूप राणा ने बताया कि गांव बात्ता का बाबा राजपुरी डेरा लगभग 330 वर्ष पुराना है। इतिहास के अनुसार, वर्ष 1690 में बाबा लदाना में जन्मे बाबा राजपुरी ने आठ वर्ष की आयु में गांव बात्ता में आकर संत सरस्वती पुरी से दीक्षा ली थी। वर्तमान में महंत नरेश पुरी इस डेरा के 15वें महंत हैं। डेरा के पास लगभग 350 एकड़ भूमि है, जबकि करीब 10 एकड़ क्षेत्र में डेरा और गोशाला स्थापित है। ग्रामीणों के अनुसार, डेरा द्वारा पावर हाउस, खेल स्टेडियम सहित कई सार्वजनिक संस्थानों के लिए नि:शुल्क भूमि भी उपलब्ध करवाई गई है।
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कलायत। बात्ता गांव स्थित डेरा बाबा राजपुरी के विवाद के मुद्दे पर ग्रामीणों का एक शिष्टमंडल पुलिस अधीक्षक से मिला। शिष्टमंडल में मठ के महंत नरेश पुरी सहित गांव के 100 से अधिक लोग शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल में पंच रूप राणा, पूर्व सरपंच पवन शर्मा, दिलबाग राणा, साहिब सिंह सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डेरा के पूर्व महंत सोमपुरी वर्तमान महंत नरेश पुरी से पैसे की मांग कर रहे हैं और उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से बार-बार पुलिस व प्रशासन के पास झूठी शिकायतें दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार अधिकारियों के पास जाने से डेरा, गौशाला और अन्य व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ रहा है।
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ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस अधीक्षक के समक्ष पूरे मामले को विस्तार से रखा गया, जिसके बाद एसपी ने आश्वासन दिया कि भविष्य में यदि नरेश पुरी के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो पुलिस उन्हें मुख्यालय बुलाने के बजाय मठ या डेरा में जाकर ही उनका पक्ष सुनेगी। इस पर ग्रामीणों ने एसपी का आभार जताया।
2018 में नरेश पुरी को सौंपी गई थी महंती : ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2010 में बाबा ओमपुरी के निधन के बाद उनके शिष्य सोमपुरी को गद्दी सौंपी गई थी, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।
वर्ष 2018 में एक वीडियो वायरल होने के बाद सोमपुरी डेरा छोड़कर चले गए। इसके बाद गांव की 21 सदस्यीय कमेटी ने सर्वसम्मति से महंत नरेश पुरी को गद्दी सौंपी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में पूर्व महंत सोमपुरी वापस आए और कलायत एसडीएम कार्यालय में बयान दर्ज करवाकर डेरा की भूमि का इंतकाल नरेश पुरी के नाम पर कराया।
पूर्व महंत पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप : ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व महंत के कार्यकाल में डेरा पर लगभग ढाई करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। वहीं, नरेश पुरी के कार्यभार संभालने के बाद डेरा को कर्जमुक्त कर विकास कार्यों को गति दी गई है।
ग्रामीणों ने कहा कि वर्तमान में डेरा, गोशाला और भूमि के रखरखाव को लेकर गांव पूरी तरह संतुष्ट है और महंत नरेश पुरी के समर्थन में खड़ा है।
लगभग 330 साल पुराना है डेरा बाबा राजपुरी
पूर्व सरपंच पवन शर्मा और पूर्व पंच रूप राणा ने बताया कि गांव बात्ता का बाबा राजपुरी डेरा लगभग 330 वर्ष पुराना है। इतिहास के अनुसार, वर्ष 1690 में बाबा लदाना में जन्मे बाबा राजपुरी ने आठ वर्ष की आयु में गांव बात्ता में आकर संत सरस्वती पुरी से दीक्षा ली थी। वर्तमान में महंत नरेश पुरी इस डेरा के 15वें महंत हैं। डेरा के पास लगभग 350 एकड़ भूमि है, जबकि करीब 10 एकड़ क्षेत्र में डेरा और गोशाला स्थापित है। ग्रामीणों के अनुसार, डेरा द्वारा पावर हाउस, खेल स्टेडियम सहित कई सार्वजनिक संस्थानों के लिए नि:शुल्क भूमि भी उपलब्ध करवाई गई है।