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Kaithal News: आरती देवी ने जूडो में हासिल किया मुकाम
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आरती देवी
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कैथल। सौंगल गांव निवासी खिलाड़ी आरती देवी ने बताया कि महज 13 साल की उम्र में ही उन्होंने जूडो का खेल शुरू किया। गांव में ही उन्होंने शुरुआती प्रशिक्षण लिया और बाद में कोच संदीप (डीपीआई) के मार्गदर्शन में अपनी प्रतिभा को निखारा। इसके बाद जूडो में इंटर कॉलेज में स्वर्ण और कांस्य पदक हासिल किया।
आरती ने कहा कि उनके पिता और कोच संदीप का सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। उनके निरंतर समर्थन और मार्गदर्शन की बदौलत ही उसने खेल के दम पर ग्रुप डी की नौकरी प्राप्त कर ली। वर्तमान में वह खेल विभाग में नौकरी कर रही हैं और आगे भी खेलों से जुड़े रहने की इच्छा रखती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का उनका अब भी सपना है।
रोजाना पांच से छह घंटे करती हैं अभ्यास
आरती ने बताया कि रोजाना 5 से 6 घंटे अभ्यास करती थीं। प्रतियोगिताओं के समय वह दोपहर में जिम में भी अतिरिक्त प्रशिक्षण लेती थीं, जो कॉलेज के बाद होता था। आरती का कहना है कि इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था। उन्हें और उनके परिवार को कई तरह की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सीजन के समय वह अपने माता-पिता के साथ खेतों में मजदूरी भी करती थीं। गांव में खेलों की सुविधाएं सीमित थीं और कई लोग उनके पिता को सलाह देते थे कि बेटी को बाहर खेलने या पढ़ाई के लिए न भेजें। इसके बावजूद उनके पिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और सुबह उन्हें खुद ट्रेनिंग सेंटर छोड़कर आते थे।
इरादे मजबूत होना जरूरी : आरती
आरती ने अपनी स्कूली शिक्षा 12वीं तक गांव सौंगल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने आरकेएसडी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। उनके पिता मजदूरी करते थे और परिवार में दो बहनें व दो भाई हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के बावजूद आरती ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। आरती ने कहा कि अगर इरादे मजबूत हों तो कठिन परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। उनकी उपलब्धियां न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय हैं।
उपलब्धियां
जूडो : ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतिभागी
जूडो : इंटर कॉलेज में स्वर्ण और कांस्य पदक
जूडो : सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में रजत पदक
कुराश : नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक
रेसलिंग : इंटर कॉलेज में रजत और कांस्य पदक
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आरती ने कहा कि उनके पिता और कोच संदीप का सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। उनके निरंतर समर्थन और मार्गदर्शन की बदौलत ही उसने खेल के दम पर ग्रुप डी की नौकरी प्राप्त कर ली। वर्तमान में वह खेल विभाग में नौकरी कर रही हैं और आगे भी खेलों से जुड़े रहने की इच्छा रखती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का उनका अब भी सपना है।
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रोजाना पांच से छह घंटे करती हैं अभ्यास
आरती ने बताया कि रोजाना 5 से 6 घंटे अभ्यास करती थीं। प्रतियोगिताओं के समय वह दोपहर में जिम में भी अतिरिक्त प्रशिक्षण लेती थीं, जो कॉलेज के बाद होता था। आरती का कहना है कि इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था। उन्हें और उनके परिवार को कई तरह की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सीजन के समय वह अपने माता-पिता के साथ खेतों में मजदूरी भी करती थीं। गांव में खेलों की सुविधाएं सीमित थीं और कई लोग उनके पिता को सलाह देते थे कि बेटी को बाहर खेलने या पढ़ाई के लिए न भेजें। इसके बावजूद उनके पिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और सुबह उन्हें खुद ट्रेनिंग सेंटर छोड़कर आते थे।
इरादे मजबूत होना जरूरी : आरती
आरती ने अपनी स्कूली शिक्षा 12वीं तक गांव सौंगल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने आरकेएसडी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। उनके पिता मजदूरी करते थे और परिवार में दो बहनें व दो भाई हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के बावजूद आरती ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। आरती ने कहा कि अगर इरादे मजबूत हों तो कठिन परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। उनकी उपलब्धियां न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय हैं।
उपलब्धियां
जूडो : ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतिभागी
जूडो : इंटर कॉलेज में स्वर्ण और कांस्य पदक
जूडो : सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में रजत पदक
कुराश : नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक
रेसलिंग : इंटर कॉलेज में रजत और कांस्य पदक

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